हनीट्रैप गैंग का एसआईटी ने लिया रिमांड:महिलाएं फंसाती थीं, ‘पत्रकार’ बनाता था दबाव

इंदौर के चर्चित हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग प्रकरण में एसआईटी ने जांच को नया मोड़ देते हुए आरोपितों पर संगठित अपराध की धाराएं जोड़ दी हैं। पुलिस का दावा है कि यह कोई सामान्य ब्लैकमेलिंग का मामला नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित गिरोह था, जिसके प्रत्येक सदस्य की भूमिका पहले से तय थी। डीसीपी (अपराध) राजेश त्रिपाठी के अनुसार शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह उर्फ चिंटू ठाकुर को अश्लील फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर एक करोड़ रुपये की मांग की गई थी। इसी मामले की जांच के दौरान पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।
मास्टरमाइंड अलका और जयदीप का दोबारा रिमांड
विशेष जांच दल (एसआईटी) ने गिरोह की कथित मास्टरमाइंड अलका दीक्षित और उसके बेटे जयदीप दीक्षित का दोबारा पुलिस रिमांड मांगा है। जांच एजेंसी का कहना है कि पूछताछ के दौरान अलका ने कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई हैं, जिनका सत्यापन किया जाना बाकी है। इसके अलावा कुछ डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य भी बरामद किए जाने हैं।
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जेल में बंद हैं सात आरोपी
फिलहाल मामले में गिरफ्तार सात आरोपी जेल में बंद हैं। इनमें अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, श्वेता जैन, रेशू चौधरी, लाखन चौधरी, विनोद शर्मा और जितेंद्र पुरोहित शामिल हैं। पुलिस ने सभी आरोपितों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं। तलाशी के दौरान अनुबंध पत्र, पेन ड्राइव, चार्जर और अन्य सामग्री भी बरामद हुई है, जिनकी जांच जारी है।
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गैंग में बंटी हुई थीं जिम्मेदारियां
एसआईटी के अनुसार गिरोह के सदस्य अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते थे।
- महिलाओं का काम प्रभावशाली व्यापारियों और नेताओं से संपर्क बढ़ाकर उन्हें जाल में फंसाना था।
- विनोद शर्मा कथित रूप से कानूनी सलाह और रणनीति उपलब्ध कराता था।
- जितेंद्र पुरोहित स्वयं को पत्रकार बताकर लोगों पर दबाव बनाता और वसूली की कोशिश करता था।
- अन्य सदस्य संपर्क, निगरानी और आर्थिक लेन-देन से जुड़े काम संभालते थे।
डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी
जांच एजेंसियां आरोपितों के मोबाइल, पेन ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच करवा रही हैं। पुलिस को उम्मीद है कि इससे ब्लैकमेलिंग नेटवर्क, संपर्कों और संभावित अन्य पीड़ितों से जुड़ी अहम जानकारी मिल सकती है।












