दिल्ली के चर्चित डॉक्टर पर इंदौर में FIR:फ्रेंचाइजी के नाम पर महिला से 1.20 करोड़ की ठगी

दिल्ली के चर्चित वेलनेस क्लीनिक की फ्रेंचाइजी दिलाने का झांसा देकर महिला से करोड़ों की वसूली, मशीनें नहीं भेजीं; क्राइम ब्रांच ने डॉक्टर नवनीत हारोर सहित चार आरोपियों पर मामला दर्ज किया।
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फ्रेंचाइजी के नाम पर महिला से 1.20 करोड़ की ठगी
प्रतीकात्मक चित्र

इंदौर में हेयर ट्रांसप्लांट और स्किन वेलनेस क्लीनिक की फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर एक करोड़ 20 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। क्राइम ब्रांच ने दिल्ली के चर्चित “डा. हारोर वेलनेस क्लीनिक” से जुड़े डा. नवनीत हारोर, डा. विनीता पाठक समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

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डीसीपी (क्राइम) राजेश कुमार त्रिपाठी के मुताबिक संगम नगर निवासी रितु दिलीप मेहता ने शिकायत दर्ज करवाई थी। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि करीब दो साल पहले उसकी मुलाकात डा. हारोर वेलनेस क्लीनिक से जुड़े लोगों से हुई थी। आरोपियों ने इंदौर में फ्रेंचाइजी खोलने का प्रस्ताव दिया और इसके लिए 69 लाख 50 हजार रुपये की डील तय की गई।

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करोड़ों कमाने का लालच देकर कराया निवेश

पीड़िता के अनुसार आरोपियों ने दावा किया था कि डा. हारोर के दिल्ली और एनसीआर में कई सफल सेंटर संचालित हैं और बड़ी हस्तियां वहां हेयर ट्रांसप्लांट और स्किन ट्रीटमेंट करवाने आती हैं। डा. नवनीत हारोर खुद को अंतरराष्ट्रीय हेयर ट्रांसप्लांट सर्जन और गोल्ड मेडलिस्ट बताते थे। रितु ने भरोसा कर अलग-अलग तारीखों में आरोपियों के खातों में लाखों रुपये ट्रांसफर किए। बातचीत और संचालन के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया गया, जिसमें डा. नवनीत हारोर, कंपनी डायरेक्टर डा. विनीता पाठक, देबदुलाल बनर्जी और राहुल शावेल को जोड़ा गया था।

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मशीनें नहीं भेजीं, सेंटर खुलने से पहले ही फंस गई महिला

पीड़िता ने बताया कि आरोपियों ने सेंटर की ओपनिंग डेट तक तय कर दी थी। उन्होंने कहा था कि फ्रेंचाइजी का सेटअप कंपनी के तय मापदंडों के अनुसार ही होना चाहिए। इसके बाद आरोपी राहुल शावेल इंदौर आया और उसकी शर्तों के अनुसार सेंटर की आंतरिक सज्जा करवाई गई। रितु ने करीब डेढ़ लाख रुपये महीने के किराए पर जगह ली और इंटीरियर पर 20 लाख रुपये से अधिक खर्च कर दिए। इतना ही नहीं, प्रशिक्षित स्टाफ की भर्ती कर महीनों तक वेतन भी दिया गया। इस तरह कुल निवेश बढ़कर करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपये तक पहुंच गया। लेकिन आरोपियों ने न तो मशीनें भेजीं और न ही फ्रेंचाइजी शुरू करवाई। बाद में जानकारी मिली कि क्लीनिक संचालकों ने वेंडर को भुगतान ही नहीं किया था, जिसके कारण मशीनें भेजी नहीं गईं।

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पहले दबा दी गई थी शिकायत

पीड़िता ने पहले लसूड़िया थाने में शिकायत की थी, लेकिन आरोप है कि केवल नोटिस जारी कर मामला दबा दिया गया। बाद में पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह के निर्देश पर दोबारा जांच करवाई गई। जांच में प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी के सबूत मिलने पर मंगलवार को चारों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर टीम दिल्ली रवाना कर दी गई।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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