Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

भारतीय नौसेना में शामिल 80% स्वदेशी तकनीक से बना INS अमिनी, पनडुब्बियों से निपटने में सक्षम

भारतीय नौसेना को तमिलनाडु के कट्टुपल्ली में स्वदेशी युद्धपोत अमिनी सौंपा गया। 80% से अधिक स्वदेशी तकनीक से लैस यह जहाज पनडुब्बी रोधी अभियानों में सक्षम है।
भारतीय नौसेना में शामिल 80% स्वदेशी तकनीक से बना INS अमिनी, पनडुब्बियों से निपटने में सक्षम

भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम उठाया गया है। तमिलनाडु के कट्टुपल्ली में गुरुवार, 5 नवंबर को स्वदेशी एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW SWC) 'अमिनी' भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया। इसे कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने स्वदेशी तकनीक से डिजाइन और निर्मित किया है। इस युद्धपोत में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।

पनडुब्बियों का पता लगाने और उनसे निपटने में सक्षम

भारतीय नौसेना के मुताबिक, 'अमिनी' अत्याधुनिक हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और सोनार सिस्टम से लैस है। ये उपकरण पानी के भीतर मौजूद दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उनसे निपटने में मदद करेंगे। कम गहरे समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए इस युद्धपोत को तैयार किया गया है।

लक्षद्वीप के अमिनी द्वीप के नाम पर रखा गया नाम

इस युद्धपोत का नाम केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के अमिनी द्वीप के नाम पर रखा गया है। यह पहले नौसेना में शामिल रहे INS Amini का नया रूप है। पुराना INS Amini पेट्या III क्लास का एंटी-सबमरीन वारफेयर कॉर्वेट था, जिसे साल 2002 में नौसेना से हटा दिया गया था। नए युद्धपोत को वही नाम देकर नौसेना ने अपनी पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाया है।

Breaking News

53,866 करोड़ रुपए में बनेंगे 8 नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट

इससे पहले 2 नवंबर को रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए 8 नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट बनाने के लिए 53,866.50 करोड़ रुपए के अनुबंध किए थे। ये अनुबंध गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) के साथ किए गए। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में इन अनुबंधों पर हस्ताक्षर हुए। योजना के तहत GRSE पांच कॉर्वेट बनाएगी, जबकि गोवा शिपयार्ड लिमिटेड तीन कॉर्वेट का निर्माण करेगी। इन युद्धपोतों का डिजाइन भारतीय नौसेना तैयार करेगी और निर्माण रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम करेंगे। इस परियोजना में निजी शिपयार्ड और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) को भी शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य देश के स्वदेशी युद्धपोत निर्माण और रक्षा उत्पादन क्षेत्र को मजबूत करना है।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...

Latest Posts