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इंटरनेट की छुट्टी! फोन और लैपटॉप पर बिना नेट चलेंगे ये AI मॉडल

भारत ने EKA-1, Dhir 2B और Dhir 5B नाम के तीन स्वदेशी AI मॉडल लॉन्च किए हैं। इनमें Dhir के दोनों मॉडल स्मार्टफोन और लैपटॉप पर बिना इंटरनेट चल सकते हैं। जानिए इन AI मॉडल की खासियत, भारतीय भाषाओं का सपोर्ट, डेटा प्राइवेसी से जुड़े फायदे और IndiaAI Mission ने इन्हें तैयार करने में कैसे मदद की।
इंटरनेट की छुट्टी! फोन और लैपटॉप पर बिना नेट चलेंगे ये AI मॉडल
भारत का AI में बड़ा धमाका, EKA-1 और Dhir मॉडल हुए लॉन्च

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की दुनिया में अब तक अमेरिका और चीन जैसे देशों का दबदबा देखने को मिला है। ChatGPT से लेकर दूसरे बड़े AI टूल्स तक, दुनियाभर में इनका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन अब भारत भी इस रेस में अपनी रफ्तार बढ़ा रहा है। इसी दिशा में केंद्र सरकार के IT मंत्रालय और IndiaAI Mission की मदद से देश में तैयार किए गए तीन नए AI मॉडल लॉन्च किए गए हैं। इनके नाम EKA-1, Dhir 2B और Dhir 5B हैं। इन नए AI मॉडल की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इनमें से Dhir के दोनों मॉडल स्मार्टफोन और लैपटॉप पर बिना इंटरनेट के भी काम कर सकते हैं। यानी हर छोटे-बड़े काम के लिए बार-बार इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत नहीं पड़ेगी। इतना ही नहीं, डिवाइस पर ही जानकारी प्रोसेस होने से निजी डेटा को सुरक्षित रखने में भी मदद मिल सकती है। इन मॉडल को भारतीय भाषाओं और यहां के यूजर्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

EKA-1: मुश्किल कामों के लिए तैयार किया गया AI मॉडल

तीनों नए मॉडल में EKA-1 सबसे बड़ा और ताकतवर बताया गया है। इसे बेंगलुरु की स्टार्टअप कंपनी Soket Labs ने तैयार किया है। इस मॉडल को खासतौर पर ऐसे कामों के लिए बनाया गया है, जिनमें सोचने-समझने और तर्क लगाने की जरूरत पड़ती है। EKA-1 मुश्किल गणितीय सवाल हल करने, सॉफ्टवेयर कोडिंग और लॉजिकल कामों में मदद कर सकता है। यह एक साथ कई तरह के कामों को समझकर जवाब देने की क्षमता भी रखता है। यानी इसका इस्तेमाल सिर्फ सामान्य सवाल पूछने तक सीमित नहीं रहेगा।

इस मॉडल में 26.3 अरब पैरामीटर हैं और इसे 7.5 ट्रिलियन टोकन के डेटा से ट्रेन किया गया है। आसान भाषा में समझें तो पैरामीटर AI मॉडल के अंदर मौजूद ऐसे हिस्से होते हैं, जो उसे जानकारी समझने और जवाब तैयार करने में मदद करते हैं। वहीं, ट्रेनिंग के दौरान इस्तेमाल किया गया डेटा मॉडल को अलग-अलग तरह की जानकारी सीखने में मदद करता है। EKA-1 अंग्रेजी के अलावा भारत की सभी 22 अनुसूचित भाषाओं को सपोर्ट करता है। इसके चलते देश के अलग-अलग राज्यों के लोग अपनी भाषा में AI की मदद ले सकेंगे। बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विस और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

Dhir 2B और Dhir 5B क्या कर सकते हैं?

EKA-1 के अलावा Dhir 2B और Dhir 5B नाम के दो और AI मॉडल पेश किए गए हैं। इन्हें ZenteiQ AiTech Innovations ने तैयार किया है। ये EKA-1 के मुकाबले छोटे मॉडल हैं और इनका मुख्य फोकस रोजमर्रा के कामों को आसान बनाना है। दोनों मॉडल ओपन सोर्स हैं। इसका मतलब है कि इनके मॉडल से जुड़ी जानकारी और उपलब्ध कोड का इस्तेमाल डेवलपर तय लाइसेंस और शर्तों के अनुसार कर सकते हैं। ये अंग्रेजी के साथ 10 भारतीय भाषाओं को समझने की क्षमता रखते हैं। इनकी मदद से दस्तावेजों में जरूरी जानकारी ढूंढना, लंबे डॉक्यूमेंट से खास बातें निकालना और रोजाना के कई काम करना आसान हो सकता है। उदाहरण के लिए, अगर आपके पास कई पन्नों का कोई दस्तावेज है, तो AI मॉडल उसकी जरूरी जानकारी समझने और उसका सार तैयार करने में मदद कर सकता है।

बिना इंटरनेट के फोन और लैपटॉप पर चलेंगे AI मॉडल

आज ज्यादातर AI टूल्स का इस्तेमाल करने के लिए इंटरनेट कनेक्शन जरूरी होता है। यूजर सवाल पूछता है और उसकी जानकारी इंटरनेट के जरिए कंपनी के सर्वर तक पहुंचती है। वहां प्रोसेसिंग होने के बाद जवाब वापस मिलता है। लेकिन Dhir मॉडल का खास फीचर यह है कि इन्हें स्मार्टफोन और लैपटॉप पर डाउनलोड करके बिना इंटरनेट के भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यानी हर बार सवाल पूछने के लिए ऑनलाइन रहने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, इसके लिए डिवाइस में मॉडल चलाने लायक स्टोरेज और कंप्यूटिंग क्षमता होना जरूरी है। इसका एक और फायदा डेटा प्राइवेसी से जुड़ा है। जब मॉडल सीधे आपके डिवाइस पर काम करता है, तो जानकारी को प्रोसेस करने के लिए बार-बार किसी बाहरी सर्वर पर भेजने की जरूरत कम हो सकती है। इससे निजी दस्तावेजों और दूसरी संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा बेहतर रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, डेटा सुरक्षा की गारंटी मॉडल के साथ-साथ डिवाइस और उसके इस्तेमाल के तरीके पर भी निर्भर करती है।

रक्षा से लेकर पढ़ाई तक हो सकता है इस्तेमाल

ऑफलाइन AI मॉडल का फायदा कई क्षेत्रों में मिल सकता है। उदाहरण के लिए, सरकारी विभागों में दस्तावेजों को समझने और जरूरी जानकारी खोजने के लिए इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में छात्र पढ़ाई से जुड़े सवालों और नोट्स को समझने में इनकी मदद ले सकते हैं। रक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी ऐसे मॉडल उपयोगी हो सकते हैं, जहां हर समय इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध होना जरूरी नहीं होता। इसके अलावा, कंपनियां भी अपने काम के हिसाब से इन मॉडल का इस्तेमाल करने के नए तरीके तैयार कर सकती हैं।

IndiaAI Mission ने कैसे की मदद?

AI मॉडल तैयार करना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए बड़े कंप्यूटर सिस्टम, काफी डेटा और भारी कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत पड़ती है। इन संसाधनों का खर्च भी काफी ज्यादा होता है। यही वजह है कि छोटे स्टार्टअप के लिए बड़े AI मॉडल तैयार करना चुनौती बन जाता है। IndiaAI Mission के तहत सरकार ने इन स्टार्टअप को कम खर्च में कंप्यूटिंग संसाधन उपलब्ध कराने और रिसर्च में आर्थिक मदद देने का काम किया। इसी सहयोग से इन स्वदेशी AI मॉडल को तैयार करने की दिशा में काम आगे बढ़ सका। EKA-1, Dhir 2B और Dhir 5B की लॉन्चिंग भारत के AI क्षेत्र के लिए एक अहम कदम है। खासकर ऑफलाइन काम करने वाले मॉडल उन यूजर्स के लिए उपयोगी हो सकते हैं, जिन्हें हर समय इंटरनेट की सुविधा नहीं मिलती या जो अपनी जानकारी को डिवाइस तक ही सीमित रखना चाहते हैं। अब देखना होगा कि ये मॉडल असल इस्तेमाल में कितना अच्छा प्रदर्शन करते हैं और भारत की AI रेस को कितनी नई रफ्तार देते हैं।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...

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