स्टारलिंक मुद्दे पर सरकार का हिटबैक, कहा- मस्क की कंपनी ने सबसे आखिर में लाइसेंस के लिए आवेदन किया और उसे प्राप्त किया

नई दिल्ली। सरकारी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि भारत सैटेलाइट कम्युनिकेशन (satcom) सेक्टर में सभी कंपनियों का स्वागत करता है। अंततः उपभोक्ता ही तय करेंगे कि वे किस सेवा को चुनना चाहते हैं।एक अधिकारी ने ANI से कहा, "ग्राहक ही राजा है।" उन्होंने आगे बताया कि उपभोक्ता कीमत, वैल्यू और सेवा की गुणवत्ता के आधार पर अपना चुनाव करेंगे। फिलहाल, भारत में तीन कंपनियों के पास सैटकॉम लाइसेंस हैं: जियो, वनवेब और स्टारलिंक। सूत्रों ने ANI को बताया कि एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक ने "सबसे आखिर में लाइसेंस के लिए आवेदन किया और उसे प्राप्त किया", लेकिन तीनों कंपनियों को एक "पूरी तरह से पारदर्शी" प्रक्रिया के जरिए लाइसेंस दिए गए हैं।
तय सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए कहा
अधिकारियों ने बताया कि तीनों लाइसेंस धारकों से अपनी क्षमताओं को प्रदर्शित करने और तय सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए कहा गया है। सूत्रों के हवाले से ANI ने बताया कि वनवेब ने सबसे पहले अपने अनुपालन दस्तावेज (compliance documents) जमा किए, उसके बाद जियो और सबसे आखिर में स्टारलिंक ने ऐसा किया।
दो मुख्य कदम बाकी हैं
स्पेक्ट्रम आवंटन और कीमत पर फैसला लेना तथा तीनों कंपनियों द्वारा सुरक्षा जरूरतों को पूरा करना। अधिकारियों ने कहा कि एक बार ये शर्तें पूरी हो जाने पर, पूरे सैटकॉम इकोसिस्टम को फायदा मिल सकता है।
क्या कहा था एलन मस्क ने
मस्क ने कहा था कि स्टारलिंक को दुनिया भर के 165 से ज्यादा देशों में सेवाएं देने की मंजूरी मिल चुकी है। कंपनी पिछले 5 साल से भारत सरकार के हर कानून व जरूरी शर्तों का पालन कर रही है, फिर भी भारत में पूरा लाइसेंस क्यों नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में कुछ चुनिंदा उद्योगपति (कुलीन वर्ग/ऑलिगार्क) इंटरनेट सेवाओं पर अपना एकाधिकार बनाए रखना चाहते हैं और वे स्टारलिंक की लॉन्चिंग को रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
मस्क ने तंज कसते हुए यह भी पोस्ट किया था कि स्टारलिंक को भारत में काम करने से रोकना वहां की जनता के साथ अन्याय है और एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा था— Is Ambani the real boss of India? (क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं)।




















