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Indian Air Force Day 2026: SU-30 MKI के साथ ब्रह्मोस की पहली झलक आई सामने, हिंडन एयरबेस में दिखी भारतीय वायुसेना की ताकत

हिंडन एयरबेस पर वायुसेना दिवस के पूर्वाभ्यास में SU-30 MKI के साथ ब्रह्मोस, राफेल, तेजस, आकाश और प्रचंड की ताकत दिखाई दी। जानें खासियतें।
Indian Air Force Day 2026: SU-30 MKI के साथ ब्रह्मोस की पहली झलक आई सामने, हिंडन एयरबेस में दिखी भारतीय वायुसेना की ताकत
हिंडन में पहली बार दिखी ब्रह्मोस के साथ SU-30 MKI की खास झलक

गाजियाबाद। हिंडन एयरबेस पर भारतीय वायुसेना दिवस के पूर्वाभ्यास में भारतीय वायुसेना की ताकत और ऑपरेशनल तैयारी की शानदार झलक देखने को मिली। SU-30 MKI के साथ ब्रह्मोस, राफेल, तेजस, आकाश मिसाइल, प्रचंड हेलीकॉप्टर और रोहिणी रडार जैसे प्लेटफॉर्म ने अभ्यास में हिस्सा लिया। खास तौर पर ब्रह्मोस से लैस SU-30 MKI की तस्वीरें आकर्षण का केंद्र बनीं। यह प्रदर्शन भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की मारक क्षमता, हवाई सुरक्षा और आधुनिक युद्धक तैयारियों को सामने लाता है।

हिंडन में SU-30 MKI के साथ दिखा ब्रह्मोस

वायुसेना दिवस के पूर्वाभ्यास के दौरान SU-30 MKI और ब्रह्मोस का कॉम्बिनेशन खास तौर पर नजर आया। यह संयोजन भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। SU-30 MKI एक भारी और लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाला लड़ाकू विमान है, जबकि ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। दोनों का एक साथ प्रदर्शन भारतीय वायुसेना की एयर-टू-सरफेस स्ट्राइक क्षमता की तस्वीर पेश करता है।

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ब्रह्मोस की खासियत क्या है?

दिए गए विवरण के मुताबिक ब्रह्मोस की रेंज करीब 400 किलोमीटर तक बताई गई है। इसे तेज गति वाली मिसाइल के तौर पर जाना जाता है और इसे अलग-अलग लक्ष्यों के खिलाफ इस्तेमाल करने की क्षमता के साथ विकसित किया गया है।

राफेल से लेकर तेजस तक दिखी ताकत

हिंडन एयरबेस पर सिर्फ SU-30 MKI और ब्रह्मोस ही आकर्षण का केंद्र नहीं रहे। पूर्वाभ्यास में भारतीय वायुसेना के कई प्रमुख लड़ाकू विमान और हथियार प्रणालियां भी नजर आईं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे- राफेल फाइटर जेट, SU-30 MKI, तेजस, आकाश सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम, लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड, रोहिणी रडार इसके अलावा विभिन्न आधुनिक मिसाइल और हथियार प्रणालियां जैसे- राफेल पर स्कैल्प, माइका और मेटियोर मिसाइलों का कॉन्फिगरेशन भी अभ्यास के दौरान चर्चा में रहा। ये अलग-अलग भूमिकाओं के लिए इस्तेमाल की जाने वाली आधुनिक मिसाइल प्रणालियां हैं।

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SU-30 MKI की कितनी है ताकत?

भारतीय वायुसेना का SU-30 MKI लंबे समय से उसके प्रमुख मल्टीरोल फाइटर जेट्स में शामिल है। इसकी खासियत सिर्फ इसकी रफ्तार नहीं बल्कि भारी हथियार ले जाने की क्षमता और लंबी दूरी तक ऑपरेशन करने की क्षमता भी है।

दिए गए विवरण के अनुसार  विमान की बिना ईंधन भरे रेंज करीब 3,000 किलोमीटर बताई गई है। इसमें 12 हार्डपॉइंट्स हैं। यह करीब 8 टन तक हथियार ले जा सकता है। इसमें अलग-अलग हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें लगाई जा सकती हैं। ब्रह्मोस जैसे भारी हथियार को ले जाने की क्षमता इसे और महत्वपूर्ण बनाती है।

ऑपरेशन सिंदूर से भी जुड़ा SU-30 MKI

स्रोत में दिए गए विवरण के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में भी SU-30 MKI और ब्रह्मोस की भूमिका का उल्लेख किया गया है। इसी वजह से एयर फोर्स डे के पूर्वाभ्यास में ब्रह्मोस से लैस SU-30 MKI का प्रदर्शन दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहा। हालांकि, किसी विशेष ऑपरेशन में किस प्लेटफॉर्म ने कौन-सा लक्ष्य कब और किस तरीके से निशाना बनाया, उससे जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए आधिकारिक स्रोतों को आधार बनाना जरूरी है।

‘सुपर सुखोई’ से बदलेगा SU-30 MKI का अंदाज

भारतीय वायुसेना अपने SU-30 MKI बेड़े को और आधुनिक बनाने की दिशा में ‘सुपर सुखोई’ अपग्रेड प्रोग्राम पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य पुराने विमानों की क्षमताओं को आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप बढ़ाना है। स्रोत के अनुसार इस कार्यक्रम में लगभग 200 जेट्स को आधुनिक मानकों के अनुरूप अपग्रेड करने की योजना का उल्लेख है। शुरुआती चरण में 84 विमानों के बैच की बात कही गई है। इस अपग्रेड के जरिए विमान की एवियोनिक्स, सेंसर, हथियार क्षमता और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर जैसी क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर है।

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रूस के नए इंजन की पेशकश

स्रोत में यह भी दावा किया गया है कि रूस ने अपग्रेड प्रोग्राम के लिए अपने Izdeliye 177S इंजन की पेशकश की है। हालांकि, इस दावे और कार्यक्रम की मौजूदा स्थिति को आधिकारिक रक्षा मंत्रालय या HAL के अपडेट से अलग से सत्यापित किया जाना चाहिए।

फॉरवर्ड एयरफील्ड पर नकली SU-30 भी चर्चा में

भारतीय वायुसेना की रणनीति में सिर्फ असली लड़ाकू विमानों को मजबूत करना ही शामिल नहीं है। स्रोत के अनुसार, फॉरवर्ड एयरफील्ड्स पर हाई-फिडेलिटी इन्फ्लेटेबल SU-30MKI डिकॉय यानी नकली विमान भी तैनात किए गए हैं। इनका मकसद दुश्मन को भ्रमित करना और वास्तविक सैन्य परिसंपत्तियों की पहचान को मुश्किल बनाना बताया गया है। आधुनिक युद्ध में ऐसे डिकॉय दुश्मन के निगरानी और टारगेटिंग सिस्टम को भ्रमित करने की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं।

Air Force Day 2026 में दिखी ‘मेक इन इंडिया’ की झलक

हिंडन एयरबेस पर हुए प्रदर्शन की एक बड़ी खासियत यह भी रही कि इसमें विदेशी प्लेटफॉर्म के साथ स्वदेशी तकनीक और हथियार प्रणालियों को भी जगह मिली। तेजस, आकाश और प्रचंड जैसे प्लेटफॉर्म भारतीय रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ती क्षमता को दर्शाते हैं। वहीं रोहिणी रडार जैसी प्रणाली वायु रक्षा नेटवर्क की महत्वपूर्ण भूमिका को सामने लाती है।

क्यों खास है हिंडन का यह प्रदर्शन?

Air Force Day 2026 के पूर्वाभ्यास में एक साथ इतने आधुनिक विमान, मिसाइल और रडार सिस्टम का प्रदर्शन भारतीय वायुसेना की बहु-स्तरीय क्षमता को दिखाता है। हवा में प्रभुत्व से लेकर जमीन पर सटीक हमला और एयर डिफेंस तक, अलग-अलग भूमिकाओं वाले प्लेटफॉर्म इसमें दिखाई दिए।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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