
भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) साइन हो गया है। यह समझौता केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के ट्रेड मंत्री टॉड मैक्ले की मौजूदगी में हुआ। इस समझौते को दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में बड़ा कदम माना जा रहा है जो आने वाले वर्षों में व्यापार और निवेश को नई रफ्तार देगा।
FTA के तहत अब भारत से न्यूजीलैंड भेजे जाने वाले लेदर प्रोडक्ट्स, टेक्सटाइल, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग गुड्स पर एक्सपोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी। इससे खासतौर पर लेबर इंटेंसिव सेक्टर को सीधा फायदा मिलेगा और भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत होगी। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता भारत-न्यूजीलैंड संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत है।
इस समझौते के तहत सर्विस सेक्टर में भी भारत को बड़ा फायदा मिला है। IT, एजुकेशन, फाइनेंशियल सर्विसेज और टूरिज्म जैसे सेक्टरों में बाजार पहुंच बढ़ेगी। साथ ही 5,000 भारतीय स्किल्ड प्रोफेशनल्स को न्यूजीलैंड में 3 साल तक काम करने का मौका मिलेगा। इसके लिए टेम्परेरी वर्क वीजा का रास्ता आसान किया गया है।
FTA के जरिए अगले 15 साल में न्यूजीलैंड से भारत में करीब 20 बिलियन डॉलर यानी लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इसे एक पीढ़ी में एक बार होने वाला समझौता बताया है।
भारत ने न्यूजीलैंड को अपने 70% टैरिफ लाइन्स में पहुंच दी है। इसमें सेब, कीवी और मणुका हनी जैसे कृषि उत्पाद शामिल हैं लेकिन इन पर कोटा लिमिट और न्यूनतम आयात मूल्य जैसी शर्तें लागू रहेंगी। हालांकि भारत ने डेयरी प्रोडक्ट्स, दालें, चीनी, प्याज और रक्षा से जुड़े सामान जैसे संवेदनशील सेक्टरों को इस समझौते से बाहर रखा है।
भारत-न्यूजीलैंड FTA की बातचीत 2010 में शुरू हुई थी लेकिन 2015 में इसे रोक दिया गया था। इसके बाद मार्च 2025 में बातचीत फिर शुरू हुई और दिसंबर 2025 में समझौता फाइनल हुआ। इस एग्रीमेंट में कुल 20 चैप्टर शामिल हैं जिनमें गुड्स, सर्विसेज, कस्टम्स और रूल्स ऑफ ओरिजिन जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं।
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फिलहाल दोनों देशों के बीच कुल व्यापार करीब 2.4 बिलियन डॉलर के आसपास है। इसके अलावा आयरन, स्टील और एल्युमीनियम स्क्रैप पर लगने वाले टैरिफ को अगले 10 साल में धीरे-धीरे खत्म किया जाएगा।
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यह FTA भारत के लिए ओशिनिया और प्रशांत क्षेत्र के बाजारों तक पहुंचने का एक बड़ा मौका माना जा रहा है। इससे न सिर्फ एक्सपोर्ट बढ़ेगा बल्कि विदेशी निवेश, रोजगार और सर्विस सेक्टर में भी नई संभावनाएं खुलेंगी।