
आंध्रप्रदेश। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों के कारण आंध्र प्रदेश में ईंधन संकट की स्थिति बन गई है। लोगों में डर के चलते पेट्रोल पंपों पर अचानक भीड़ बढ़ गई और कई जगह पेट्रोल-डीजल खत्म हो गया। इस वजह से राज्य के कई शहरों में लंबी कतारें और परेशानियां देखने को मिल रही हैं। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत से ज्यादा ईंधन जमा न करें।
दक्षिण भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश इस समय गंभीर ईंधन संकट का सामना कर रहा है जिसने आम लोगों की दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात की खबरों के बीच सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। लोगों में डर इतना बढ़ गया कि पेट्रोल पंपों पर अचानक भारी भीड़ उमड़ पड़ी और देखते ही देखते सैकड़ों पंपों पर ईंधन खत्म हो गया। कई जगह हालात ऐसे बन गए कि पेट्रोल पंपों पर ताले लटकने लगे और वाहन चालकों को घंटों इंतजार करना पड़ा।
राज्य में ईंधन की आपूर्ति सामान्य रूप से चल रही थी लेकिन अचानक फैली अफवाहों के कारण लोगों ने जरूरत से ज्यादा पेट्रोल और डीजल भरवाना शुरू कर दिया। इस पैनिक बाइंग का असर इतना तेज रहा कि आंध्र प्रदेश के 4,510 पेट्रोल पंपों में से लगभग 421 पंपों पर ईंधन पूरी तरह खत्म हो गया। कई स्थानों पर लोग अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल कराने के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आए। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कई पंप संचालकों को बिक्री रोकनी पड़ी।
बढ़ती मांग और आपूर्ति पर दबाव को देखते हुए पेट्रोल पंप डीलर्स ने राशनिंग लागू कर दी है। अब दोपहिया वाहनों को केवल दो लीटर पेट्रोल दिया जा रहा है जबकि चारपहिया वाहनों के लिए यह सीमा अधिकतम दस लीटर तय की गई है। आंध्र प्रदेश पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के अनुसार, डीजल की मांग सामान्य दिनों की तुलना में लगभग दोगुनी हो गई है। जहां पहले रोजाना करीब 7,000 लीटर डीजल की खपत होती थी, वहीं अब यह आंकड़ा 14,000 लीटर से भी अधिक पहुंच गया है।
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राज्य के प्रमुख शहरों जैसे विजयवाड़ा, गुंटूर, नेल्लोर और विशाखापत्तनम में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बनी हुई है। यहां पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गई हैं और कई जगहों पर वाहन चालकों और कर्मचारियों के बीच बहस और झड़प की स्थिति भी देखने को मिली। प्रसिद्ध तीर्थ स्थल तिरुमाला में भी इसका बड़ा असर पड़ा है, जहां परिवहन व्यवस्था काफी हद तक प्रभावित हुई है। पेट्रोल की कमी के कारण कई वाहन सड़कों पर खड़े रह गए, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इस पूरे संकट की सबसे बड़ी वजह सोशल मीडिया पर फैली वे अफवाहें हैं, जिनमें दावा किया जा रहा था कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण भारत में ईंधन की सप्लाई बाधित हो सकती है। इन अफवाहों ने लोगों में डर पैदा कर दिया और उन्होंने तुरंत पेट्रोल पंपों की ओर दौड़ लगा दी। प्रशासन की अपील के बावजूद भीड़ कम नहीं हुई और हालात लगातार बिगड़ते चले गए। कई स्थानों पर पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आपातकालीन बैठक की। इस दौरान सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया गया कि वे तत्काल कार्य योजना बनाकर स्थिति को नियंत्रित करें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हर जिले से विस्तृत रिपोर्ट ली जाए ताकि संकट का समाधान तेजी से किया जा सके। राज्य सरकार लगातार यह प्रयास कर रही है कि ईंधन की आपूर्ति सामान्य हो और लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
राज्य प्रशासन और केंद्र सरकार दोनों ने ही साफ किया है कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है और किसी तरह की कमी की स्थिति नहीं है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत से ज्यादा ईंधन जमा करने से बचें। सरकार का कहना है कि सप्लाई चेन सामान्य है और जल्द ही सभी पेट्रोल पंपों पर स्थिति पहले जैसी हो जाएगी।
इस पूरे मामले की जड़ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहा तनाव माना जा रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते विवाद के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता की आशंका जताई जा रही है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है और भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित कर सकती है। इसी डर ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता पैदा कर दी है, जिसका असर अब भारत के राज्यों में भी दिखने लगा है।
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