BRICS Summit 2026:रूस, ईरान और ब्राजील समेत कई देशों के विदेश मंत्री दिल्ली में, भारत की मेजबानी में होगी वैश्विक बैठक

नई दिल्ली। भारत की राजधानी नई दिल्ली इस हफ्ते वैश्विक कूटनीति का बड़ा केंद्र बनने जा रही है। 14 और 15 मई को आयोजित होने वाली BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। भारत इस साल BRICS समूह की अध्यक्षता कर रहा है और इसी जिम्मेदारी के तहत विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इस अहम बैठक की अध्यक्षता करेंगे। दो दिनों तक चलने वाली इस बैठक में वैश्विक राजनीति, पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष, ऊर्जा सुरक्षा, बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार और विकासशील देशों की भूमिका जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है। दुनिया के कई बड़े देशों के विदेश मंत्री और प्रतिनिधिमंडल इसमें हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सभी विदेश मंत्रियों से मुलाकात करेंगे।
दुनिया की नजर नई दिल्ली पर
BRICS देशों की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया कई बड़े संकटों का सामना कर रही है। पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव ने तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में भारत की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक वैश्विक स्तर पर बेहद अहम मानी जा रही है। इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर गहन चर्चा हो सकती है। रूस और ईरान जैसे देशों की मौजूदगी के कारण पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचार-विमर्श सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा।
एस. जयशंकर संभालेंगे बैठक की कमान
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इस पूरे सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक के पहले दिन BRICS सदस्य देश वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों पर चर्चा करेंगे। दूसरे दिन BRICS के 20 वर्षों के सफर, उपलब्धियों और भविष्य की रणनीति पर विशेष सत्र आयोजित होगा। इसके अलावा वैश्विक गवर्नेंस में सुधार और बहुपक्षीय संस्थाओं को मजबूत बनाने पर भी चर्चा की जाएगी। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि विकासशील देशों की आवाज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और अधिक मजबूत होनी चाहिए।
पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात
बैठक के दौरान BRICS देशों के विदेश मंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात नई दिल्ली के ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित की जाएगी। इस दौरान वैश्विक हालात, आर्थिक सहयोग और आगामी BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री मोदी पहले भी BRICS मंच पर विकासशील देशों के हितों और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत को मजबूती से उठा चुके हैं। ऐसे में इस बैठक को भारत की विदेश नीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
रूस और ईरान की मौजूदगी पर खास नजर
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची की मौजूदगी इस बैठक को और महत्वपूर्ण बना रही है। रूस और पश्चिमी देशों के बीच जारी तनाव के बीच BRICS मंच पर रूस की भूमिका लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है। सर्गेई लावरोव की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित रूस यात्रा को लेकर भी चर्चा हो सकती है। वहीं ईरान पश्चिम एशिया के हालात को लेकर BRICS देशों से खुलकर समर्थन चाहता है। ईरान लगातार मांग कर रहा है कि BRICS देश इजरायल और अमेरिका की कार्रवाई के खिलाफ एक साझा निंदा प्रस्ताव पारित करें। हालांकि भारत इस मामले में संतुलित रुख अपनाता नजर आ रहा है।
क्यों नहीं आ रहे चीन के विदेश मंत्री ?
इस बैठक की सबसे ज्यादा चर्चा चीन के विदेश मंत्री वांग यी की गैरमौजूदगी को लेकर हो रही है। चीन के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि पहले से तय कार्यक्रमों और समय की कमी के कारण वांग यी नई दिल्ली नहीं आ पाएंगे। दरअसल, इसी दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति का चीन दौरा प्रस्तावित है। ऐसे में बीजिंग में वांग यी की मौजूदगी को बेहद जरूरी माना जा रहा है। चीन ने भारत की BRICS अध्यक्षता का समर्थन करते हुए कहा है कि वह संगठन के मजबूत और सकारात्मक विकास के लिए भारत के साथ सहयोग जारी रखेगा। चीन की ओर से भारत में मौजूद उसके राजदूत शी फेइहोंग प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। वहीं अगले महीने होने वाली BRICS राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में वांग यी के भारत आने की संभावना है।
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भारत चौथी बार कर रहा मेजबानी
भारत इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में BRICS बैठकों की मेजबानी कर चुका है। अब 2026 में चौथी बार भारत इस संगठन के बड़े सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। भारत की कोशिश है कि BRICS मंच के जरिए वैश्विक दक्षिण यानी विकासशील देशों की चिंताओं को दुनिया के सामने मजबूती से रखा जाए।
BRICS@20 थीम पर रहेगा फोकस
इस साल BRICS बैठक की थीम “BRICS@20” रखी गई है। इसका उद्देश्य संगठन के 20 वर्षों के सफर का मूल्यांकन करना और आने वाले वर्षों की दिशा तय करना है। बैठक में इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। भारत चाहता है कि BRICS केवल एक आर्थिक मंच बनकर न रहे बल्कि विकासशील देशों की सामूहिक आवाज के रूप में भी मजबूत भूमिका निभाए।
कई देशों के साथ होगी बातचीत
BRICS बैठक के दौरान भारत कई देशों के साथ अलग अलग द्विपक्षीय वार्ताएं भी करेगा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर रूस, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, चिली और मालदीव के विदेश मंत्रियों से अलग मुलाकात करेंगे।
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कौन से देश BRICS में हैं शामिल?
BRICS की शुरुआत दुनिया की पांच बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ हुई थी। बाद में इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल हो गए। इसके अलावा बेलारूस, कजाखस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, वियतनाम और उज्बेकिस्तान जैसे कई देश BRICS के पार्टनर देशों के रूप में जुड़े हुए हैं।











