Ujjain:किसानों की फसल बचाने के लिए सरकार का बड़ा कदम, अफ्रीकन बोमा पद्धति से उज्जैन में शुरू किया जाएगा नीलगायों का रेस्क्यू ऑपरेशन

मध्य प्रदेश। उज्जैन जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों को हो रहे भारी नुकसान को देखते हुए वन विभाग ने नीलगाय नियंत्रण के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है। चंदेसरा से नरवर तक के इलाके को इस योजना के लिए चुना गया है। यहां नीलगायों के झुंडों की पहचान कर उनकी ट्रैकिंग की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार यह कदम किसानों की सुरक्षा और फसल संरक्षण को ध्यान में रखकर उठाया गया है। जल्द ही इन्हें पकड़कर सुरक्षित वन क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा।
नीलगायों की बढ़ती समस्या पर प्रशासन का सख्त कदम
उज्जैन जिले के ग्रामीण इलाकों में नीलगायों की बढ़ती संख्या किसानों के लिए गंभीर समस्या बन चुकी है। ये जानवर अक्सर खेतों में घुसकर खड़ी फसलों को नष्ट कर देते हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। लगातार शिकायतों और हालात को देखते हुए अब वन विभाग ने इन्हें नियंत्रित करने के लिए व्यवस्थित योजना तैयार की है।
चंदेसरा से नरवर तक
वन विभाग ने विशेष रूप से चंदेसरा से लेकर नरवर तक के इलाके को इस अभियान के लिए चुना है। यह क्षेत्र इसलिए महत्वपूर्ण माना गया है क्योंकि यहां नीलगायों के बड़े झुंड अक्सर देखे जाते हैं। विभाग ने सर्वे के माध्यम से इन झुंडों की पहचान कर ली है और उनके आने जाने के रास्तों को भी चिन्हित किया गया है।
ट्रैकिंग और सर्वे से शुरू हुआ काम
इस पूरी योजना के तहत सबसे पहले नीलगायों की ट्रैकिंग की जा रही है। 8 से 10 या उससे अधिक संख्या वाले झुंडों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। वन विभाग की टीम लगातार फील्ड में मौजूद रहकर उनके मूवमेंट को रिकॉर्ड कर रही है ताकि रेस्क्यू के समय किसी तरह की दिक्कत न आए।
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अफ्रीकन बोमा पद्धति से होगा रेस्क्यू
वन विभाग ने नीलगायों को पकड़ने के लिए अफ्रीकन बोमा पद्धति को चुना है। इस तकनीक में एक विशेष घेरा तैयार किया जाता है, जिसमें जानवरों को धीरे धीरे हांका जाता है। इसके लिए आवश्यक उपकरण मंगवा लिए गए हैं और सेटअप लगाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। डीएफओ अनुराग तिवारी के अनुसार चिन्हित स्थानों पर यह सेटअप लगाया जाएगा और इसके बाद रेस्क्यू प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस प्रक्रिया में प्रशिक्षित टीम की मदद ली जाएगी ताकि जानवरों को सुरक्षित तरीके से पकड़ा जा सके।
सुरक्षित वन क्षेत्रों में छोड़ी जाएंगी नीलगायें
रेस्क्यू के बाद सभी नीलगायों को जिले से बाहर सुरक्षित वन क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में फसलों को बचाना और मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करना है। विभाग का मानना है कि इससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी और कृषि नुकसान में कमी आएगी।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे रेस्क्यू ऑपरेशन
मध्य प्रदेश में इस तरह के प्रयास पहले भी किए जा चुके हैं। करीब 7-8 साल पहले मंदसौर जिले में बोमा पद्धति से रेस्क्यू किया गया था। इसके बाद शाजापुर में भी इसी तकनीक का उपयोग किया गया, जहां हिरणों के साथ कुछ नीलगायों को भी पकड़ा गया था। इन अनुभवों के आधार पर अब उज्जैन में यह योजना लागू की जा रही है।
रेस्क्यू में सामने आ रही चुनौतियां
हालांकि यह अभियान आसान नहीं है। जिस क्षेत्र में रेस्क्यू होना है वह चारों तरफ से खुला हुआ है, जिससे जानवरों को एक निश्चित दिशा में लाना कठिन होगा। नीलगाय काफी शक्तिशाली और तेज दौड़ने वाला जानवर है, जो समूह में रहता है, इसलिए उसे नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण है। इसके अलावा यह प्रक्रिया काफी महंगी है, क्योंकि इसमें विशेष उपकरण और कभी कभी हेलीकॉप्टर का भी उपयोग किया जाता है। उज्जैन में इस बार ढोल और शोर के जरिए नीलगायों को दिशा देने की योजना बनाई गई है ताकि उन्हें निर्धारित स्थान तक पहुंचाया जा सके।
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सड़क हादसों का भी बढ़ा खतरा
लोगों के अनुसार नीलगायों की वजह से सिर्फ फसलों को ही नुकसान नहीं हो रहा बल्कि सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। विशेषकर देवास बदनावर हाइवे पर तेज रफ्तार वाहनों के सामने अचानक नीलगाय आने से कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में ऐसे हादसों में चार लोगों की मौत भी दर्ज की गई है।











