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MP News :मध्यप्रदेश में 5 साल में 20 विभागों ने वाहन खरीदे, लेकिन EV किसी ने नहीं लिए

मप्र में ईवी को लेकर नीति तो बन रही है, लेकिन उस पर अमल नहीं किया जा रहा। प्रदेश की ईवी नीति 2019 के अनुसार 50% पब्लिक ट्रांसपोर्ट बसें चलाना था, लेकिन ये नहीं चल सकी हैं। इसी तरह पांच साल में 20 विभागों ने वाहन खरीदे लेकिन ईवी किसी ने नहीं खरीदे।
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मध्यप्रदेश में 5 साल में 20 विभागों ने वाहन खरीदे, लेकिन EV किसी ने नहीं लिए

अशोक गौतम, भोपाल। प्रदेश में वर्ष 2019 में लागू की गई इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) नीति के बावजूद पांच वर्षों में सरकार अपने तय लक्ष्यों से काफी पीछे है। नीति में सार्वजनिक परिवहन की 50% बसों को इलेक्ट्रिक करने, सरकारी कार्यालयों में 30% और निजी क्षेत्र में 25% तक ईवी उपयोग बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया था। सरकारी स्तर पर ईवी उपयोग नहीं बढ़ने से आम लोगों में भी इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर भरोसा नहीं बन पाया है। पिछले दो-तीन वर्षों में ईवी की हिस्सेदारी महज सात प्रतिशत तक ही बढ़ सकी है।

रोड टैक्स योजना समाप्त 

सरकार ने वर्ष 2025 में नई ईवी नीति लागू कर रोड टैक्स सहित अन्य रियायतें दी थीं, लेकिन इनकी अवधि दो माह पहले समाप्त हो चुकी है। पेट्रोल-डीजल वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहनों की अधिक कीमत और चार्जिंग के दौरान आग लगने की घटनाओं ने भी लोगों को ईवी खरीदने से दूर रखा है।

सार्वजनिक परिवहन में लक्ष्य अधूरा

ईवी नीति के तहत परिवहन और नगरीय विकास विभाग को सार्वजनिक परिवहन में 50 प्रतिशत इलेक्ट्रिक बसें शामिल करनी थीं, लेकिन अब तक शहरों के भीतर इलेक्ट्रिक बस संचालन शुरू नहीं हो पाया है। केवल इंदौर-भोपाल और कुछ अंतरराज्यीय मार्गों पर निजी क्षेत्र की सीमित इलेक्ट्रिक बसें दिखाई देती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार चार्जिंग स्टेशन और बैटरी स्वैपिंग व्यवस्था का अभाव सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। नीति में इलेक्ट्रिक बसों को पांच वर्षों तक टोल टैक्स में 50 प्रतिशत छूट का प्रावधान भी किया गया था।

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ईवी इंडस्ट्री भी नहीं लग पाई

नीति के तहत बैटरी, चार्जिंग किट, पैनल और अन्य उपकरणों की ईवी इंडस्ट्री प्रदेश में स्थापित करने की योजना थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई बड़ी प्रगति नहीं हुई। वाहन खराब होने पर उपभोक्ताओं को डीलरों पर निर्भर रहना पड़ता है और कई बार मरम्मत के लिए 15 से 30 दिन तक इंतजार करना पड़ता है।

चार्जिंग पॉइंट की बड़ी समस्या

सरकारी और निजी बड़े भवनों में ईवी चार्जिंग पॉइंट स्थापित करने का लक्ष्य भी अधूरा है। मंत्रालय, सतपुड़ा, विंध्याचल, पर्यावास और निर्माण भवन जैसे बड़े सरकारी परिसरों में अब तक पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन नहीं लग पाए हैं।

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फैक्ट फाइल

स्थान    पब्लिक, संस्थान के चार्जिंग स्टेशन

प्रदेश में कुल   1,794

भोपाल           133

इंदौर              167

जबलपुर           89

ग्वालियर          64

उज्जैन             49

पांच वर्षों में चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की स्थिति

प्रदेश में सार्वजनिक और संस्थागत स्तर पर कुल 1,794 चार्जिंग स्टेशन स्थापित हुए हैं। इनमें भोपाल में 133, इंदौर में 167, जबलपुर में 89, ग्वालियर में 64 और उज्जैन में 49 स्टेशन शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में उपभोक्ता चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के इंतजार में रहे, जबकि निवेशक ईवी वाहनों की संख्या बढ़ने की प्रतीक्षा करते रहे। यही कारण है कि प्रदेश में ईवी इकोसिस्टम अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका। 

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आउटसोर्स पर ईवी लगाए जा रहे हैं

चार्जिंग पॉइंट लगाने के लिए विभाग में एक पोर्टल बनाया गया है। निवेशक इस पोर्टल पर आवेदन कर सरकार की सब्सिडी ले सकते हैं। धीरे-धीरे ईवी वाहनों की संख्या बढ़ रही है, इसी ईवी इन्फ्रास्टेक्चर भी प्रदेश में तैयार हो रहा है। मेरे विभाग में ईवी वाहनों को प्रमोट किया जा रहा है, आउटसोर्स पर ईवी लगाए जा रहे हैं। परिसर में चार्जिंग स्टेशन में लगाए गए हैं।

संकेत भोंडवे, आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास विभाग

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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