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अलनीनो का असर:सूखे के खतरे से चिंतित किसान, गांव-गांव पहुंचकर खेती बचाने की तैयारी में कृषि विभाग

अलनीनो के बढ़ते असर के कारण किसान सूखे के गंभीर खतरे से जूझ रहे हैं जिससे उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं। इस विकट स्थिति से निपटने और खेती को बचाने के लिए कृषि विभाग गांव-गांव पहुंचकर विशेष तैयारियों में जुट गया है।
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सूखे के खतरे से चिंतित किसान, गांव-गांव पहुंचकर खेती बचाने की तैयारी में कृषि विभाग

सुपर अलनीनो के असर ने मध्यप्रदेश में किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम में लगातार बढ़ती गर्मी और कम बारिश की आशंका को देखते हुए खरीफ और रबी दोनों सीजन की फसलों पर खतरा मंडराने लगा है। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण खेतों की मिट्टी कठोर होती जा रही है। इससे मिट्टी की नमी तेजी से खत्म हो रही है और कम वर्षा वाले इलाकों में फसलें पूरी तरह खराब होने का डर बढ़ गया है। स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। विभाग गांव-गांव पहुंचकर किसानों को कम नुकसान में बेहतर उत्पादन के तरीके बता रहा है। जल्द ही किसानों के लिए एडवाइजरी और अलर्ट भी जारी किए जाएंगे।

खरीफ फसलों पर सबसे ज्यादा असर का खतरा

अलनीनो प्रभाव के कारण प्रदेश में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। तेज गर्म हवाओं से जुताई के बाद मिट्टी का क्षरण बढ़ रहा है। प्रदेश में किसान अभी खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें जैसे सोयाबीन, धान, अरहर, ज्वार, मूंग और उड़द की तैयारी में जुटे हैं लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा चिंता आने वाले रबी सीजन की है। किसानों का कहना है कि यदि बारिश कमजोर रही और भूजल स्तर लगातार नीचे गया तो अगली फसल बचाना मुश्किल हो जाएगा।

गांव-गांव पहुंच रहे कृषि रथ

कृषि विभाग ने 15 से 30 मई तक विशेष कृषि रथ अभियान शुरू किया है। ये रथ गांव-गांव जाकर किसानों को मिट्टी के अनुसार फसल चयन, बीज और फर्टिलाइजर के संतुलित उपयोग और सूखे की स्थिति में खेती बचाने के उपायों की जानकारी दे रहे हैं। मौके पर ही किसानों की समस्याएं और सवाल भी सुने जा रहे हैं।

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मध्यप्रदेश में खरीफ खेती का बड़ा दायरा

मध्यप्रदेश में खरीफ फसलों का रकबा करीब 140 से 145 लाख हेक्टेयर है। प्रदेश में सोयाबीन सबसे बड़ी फसल है जिसका रकबा करीब 55 लाख हेक्टेयर है। वहीं मक्का करीब 35 लाख हेक्टेयर और दलहन व श्रीअन्न करीब 23 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोए जाते हैं। प्रदेश में करीब 1.15 से 1.20 करोड़ किसान परिवार खेती से जुड़े हैं। संसद में पेश NSSO रिपोर्ट के अनुसार लगभग 48.6 प्रतिशत किसान परिवार कर्ज में दबे हैं और प्रति परिवार औसत कर्ज 74 हजार 420 रुपए तक पहुंच चुका है।

बोर का पानी भी नीचे चला गया

सागर जिले के ग्राम बरोदा निवासी किसान इंद्राज सिंह ठाकुर का कहना है कि बुंदेलखंड में पहले से ही पानी की कमी रहती है। इस बार ज्यादा गर्मी पड़ने से भूजल स्तर और नीचे चला गया है जिससे बोरवेल भी ज्यादा मददगार नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा कि खरीफ में सोयाबीन और धान की पैदावार को लेकर चिंता है लेकिन उससे भी ज्यादा डर रबी फसल को लेकर है।

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उमाशंकर भार्गव बोले- एडवाइजरी जल्द जारी होगी

सवाल - इस बार सूखे की आशंका के मद्देनजर क्या तैयारियां हैं?

जवाब -अलनीनो प्रभाव और मौसम विभाग की चेतावनी के मद्देनजर तैयारियां जारी हैं। खरीफ फसलों के लिए किसानों को अलर्ट करने के साथ ही एडवाइजरी भी जारी होगी।

सवाल- क्या इसकी शुरुआत कर दी है?

जवाब- अभी तो 15 से 30 मई तक किसान रथ चलाए जा रहे हैं जोकि गांव-गांव जा रहे हैं। इससे खेती में बीज और फर्टिलाइजर के इस्तेमाल से लेकर तैयारी और सावधानियों के बारे में किसानों को बताया जा रहा है।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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