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इंदौर:कोरोना लॉकडाउन में पत्नी की हत्या करने वाले पति को उम्रकैद, मृत्युपूर्व बयान बना सबसे बड़ा सबूत

इंदौर में कोरोना लॉकडाउन के बीच अपनी पत्नी की हत्या करने वाले पति को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इस मामले में मृतका का मृत्युपूर्व बयान ही सबसे बड़ा और निर्णायक सबूत साबित हुआ।
कोरोना लॉकडाउन में पत्नी की हत्या करने वाले पति को उम्रकैद, मृत्युपूर्व बयान बना सबसे बड़ा सबूत

कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान पत्नी की हत्या करने वाले आरोपी पति को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। जिला कोर्ट इंदौर के डॉ. अंबेडकर नगर स्थित पंचम अपर सत्र न्यायालय ने आरोपी को हत्या और सबूत मिटाने के मामले में दोषी ठहराते हुए कठोर दंड दिया।

महाराष्ट्र से लौटते समय किया था हमला

सहायक निदेशक अभियोजन राजेंद्र सिंह भदौरिया के मुताबिक पंचम अपर सत्र न्यायाधीश भरत कुमार व्यास ने आरोपी पंकज (40), निवासी धार जिले को आजीवन कारावास और सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर कुल 2 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया। मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक आनंद नेमा और बलबहादुर सिंह अलावा ने पैरवी की।

लॉकडाउन में पैदल लौट रहे थे दंपती

अभियोजन के अनुसार 8 मई 2020 को थाना मानपुर पुलिस को सूचना मिली थी कि एक महिला फोरलेन सड़क पर गंभीर हालत में खून से लथपथ पड़ी है। महिला को तुरंत लेबड़-मानपुर फोरलेन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मानपुर पहुंचाया गया। इलाज के दौरान महिला ने बताया था कि वह अपने पति पंकज के साथ महाराष्ट्र के जलाना क्षेत्र में मजदूरी करती थी। कोरोना लॉकडाउन के कारण दोनों ट्रक से महाराष्ट्र से मानपुर पहुंचे थे और वहां से पैदल अपने गांव घाटाबिल्लौद जा रहे थे। इसी दौरान पुराने विवाद को लेकर दोनों के बीच झगड़ा हुआ और आरोपी पति ने धारदार चाकू से पत्नी के गले पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल महिला किसी तरह सड़क तक पहुंची और बाद में बेहोश हो गई।

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मृत्युपूर्व बयान ने बदल दिया केस

पुलिस ने पहले हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया था। अस्पताल में इलाज के दौरान महिला ने अपने मृत्युपूर्व बयान में पति पंकज को हमले के लिए जिम्मेदार बताया। बाद में इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई जिसके बाद मामले में हत्या की धारा जोड़ दी गई।

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बिना प्रत्यक्षदर्शी के भी साबित हुआ अपराध

अभियोजन पक्ष के अनुसार मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं था। इसके बावजूद पुलिस और अभियोजन ने 20 गवाहों के बयान अदालत में पेश किए। मृतका के मृत्युपूर्व कथनों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को अदालत ने अहम माना। सभी साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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