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भोपाल बनेगा देश का पहला ऐसा शहर, जहां होंगी दो बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट

भोपाल देश का पहला ऐसा शहर बनने जा रहा है जहां दो बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट्स होंगी। यह अनूठी उपलब्धि शहर को जैव विविधता संरक्षण के मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगी
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भोपाल बनेगा देश का पहला ऐसा शहर, जहां होंगी दो बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट

भोपाल की पहचान अब सिर्फ झीलों के शहर तक सीमित नहीं रहेगी। राजधानी का बड़ा तालाब यानी भोजताल जल्द ही बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट घोषित किया जाएगा। ऐसा होते ही भोपाल देश का पहला ऐसा शहर बन जाएगा जहां दो बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट होंगी। इससे पहले मप्र जल एवं भूमि प्रबंध संस्थान (वॉल्मी परिसर) को यह दर्जा मिल चुका है।

नगर निगम ने तैयार किया प्रस्ताव

बायोडायवर्सिटी बोर्ड की अनुशंसा पर नगर निगम भोपाल ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। अब संचालक मंडल की बैठक के बाद इस संबंध में अधिसूचना जारी की जाएगी।

क्यों खास है भोपाल का बड़ा तालाब

भोपाल का बड़ा तालाब सिर्फ एक झील नहीं, बल्कि शहर की जीवनरेखा माना जाता है। करीब 31 वर्ग किलोमीटर में फैला भोजताल भोपाल की लगभग 40 प्रतिशत पेयजल जरूरत पूरी करता है। यहां 40 से ज्यादा मछलियों की प्रजातियां पाई जाती हैं और हर साल हजारों प्रवासी पक्षी भी यहां पहुंचते हैं।

जैव विविधता का बड़ा केंद्र

विशेषज्ञों के अनुसार बड़े तालाब में जैव विविधता का बेहद समृद्ध तंत्र मौजूद है। हर साल करीब 20 हजार प्रवासी पक्षी यहां आते हैं, जिनमें व्हाइट स्टॉर्क, काले गले वाले सारस और सारस क्रेन प्रमुख हैं। तालाब में जलीय वनस्पतियों की 106 और सूक्ष्म वनस्पतियों की 208 प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके अलावा यहां 43 से अधिक मछलियों की प्रजातियां, कछुए, केकड़े, घोंघे और कई सूक्ष्म जलजीव भी मौजूद हैं।

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दर्जा मिलने से क्या होगा फायदा

बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट का दर्जा मिलने के बाद बड़े तालाब के आसपास अनियंत्रित निर्माण और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर सख्ती बढ़ेगी। तालाब की हरियाली, पानी और प्राकृतिक वातावरण को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए वैज्ञानिक मॉनिटरिंग की जाएगी। जलीय जीवों और पक्षियों के संरक्षण के लिए अलग योजनाएं तैयार होंगी। साथ ही पानी की गुणवत्ता बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

मध्यप्रदेश में फिलहाल पांच BHS

प्रदेश में अभी पांच बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट हैं। इनमें भोपाल का वॉल्मी परिसर, छिंदवाड़ा का पातालकोट, सतना का नरो हिल्स, अनूपपुर का अमरकंटक और इंदौर की सिरपुर झील शामिल हैं।

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संरक्षण को मिलेगी कानूनी मजबूती

सुदीप सिंह ने कहा कि बड़े तालाब को BHS घोषित करने का प्रस्ताव तैयार हो चुका है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ भोपाल की पहचान नहीं बल्कि शहर की प्राकृतिक विरासत भी है। यह दर्जा मिलने से तालाब के संरक्षण को कानूनी और वैज्ञानिक मजबूती मिलेगी।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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