
डिजिटल पेमेंट को आसान बनाने के लिए RBI ने ऑटो-डेबिट (ई-मैंडेट) नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब ₹15,000 तक के रीकरींग पेमेंट बिना OTP के हो जाएंगे। इससे SIP, सब्सक्रिप्शन, इंश्योरेंस प्रीमियम और बिल पेमेंट पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएंगे। लेकिन जहां एक तरफ सुविधा बढ़ी है वहीं दूसरी तरफ इससे जुड़े जोखिम भी सामने आने लगे हैं। सवाल यह है कि क्या यह बदलाव यूजर्स के लिए पूरी तरह सुरक्षित है?
पहले हर ट्रांजैक्शन पर OTP आने से यूजर को हर बार पेमेंट की जानकारी मिल जाती थी और किसी भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन को रोका जा सकता था। अब एक बार ई-मैंडेट मंजूर होने के बाद ₹15,000 तक का पेमेंट अपने आप कटेगा। ऐसे में अगर किसी ने गलती से या बिना समझे किसी सर्विस को अनुमति दे दी तो हर महीने पैसा कट सकता है।
आजकल OTT, गेमिंग, फिटनेस ऐप्स और कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ‘फ्री ट्रायल’ देकर बाद में ऑटो-डेबिट चालू कर देते हैं।
ये भी पढ़ें: बॉक्स ऑफिस पर कयामत! ‘जवान 2’ की तैयारी से फिर एक्शन मोड में लौटे किंग खान
हालांकि RBI ने कुछ सेफ्टी फीचर्स भी जोड़े हैं:
इस नए सिस्टम में जिम्मेदारी काफी हद तक यूजर पर भी आ जाती है।
ये भी पढ़ें: PSU म्यूचुअल फंड्स का धमाका! 3-5 साल में 34% तक रिटर्न, SBI, Invesco और ABSL ने बनाया निवेशकों को मालामाल
ऑटो-डेबिट के नए नियम से डिजिटल पेमेंट निश्चित रूप से आसान हो जाएगा और पेमेंट फेल होने की समस्या भी कम होगी। लेकिन अगर सावधानी नहीं बरती गई तो यही सुविधा धीरे-धीरे नुकसान का कारण भी बन सकती है।