Hemant Nagle
4 Feb 2026
इंदौर - महिला पहले खुद को पीड़ित बताकर अधिवक्ता के पास क्लाइंट बनकर पहुंची। सहानुभूति और भरोसे का फायदा उठाते हुए उसने धीरे-धीरे परिचय बढ़ाया और फिर अपने गिरोह के साथ मिलकर अधिवक्ता को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। आरोप है कि महिला और उसके साथियों ने अधिवक्ता से 10 लाख रुपये की फिरौती की मांग की। जब अधिवक्ता ने रकम देने से साफ इनकार किया, तो आरोपियों ने दबाव बढ़ाते हुए धमकियां देना शुरू कर दीं। हद तब पार हो गई जब गिरोह ने झूठे आरोपों में फंसाने की चेतावनी दी। मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर पीड़ित अधिवक्ता ने आखिरकार बाणगंगा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि संगठित गिरोह की सुनियोजित साजिश हो सकती है। सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि जब कानून के जानकार भी इस जाल से नहीं बच पा रहे,
पति-पत्नी को आपस में बैठकर मामला सुलझाने की सलाह दी
फरियादी अधिवक्ता नवनीत शर्मा ने पुलिस को बताया कि 29 जनवरी को वह अपने कालिंदी गोल्ड स्थित कार्यालय पहुंचे थे। उसी दौरान कार्यालय के सामने पेंटिंग कर रहे एक मजदूर ने उनसे संपर्क किया, जिसने अपना नाम राजकुमार सेन बताया।
10 लाख की मांग से खुली पोल
इसी दिन रात में साक्षी ने अधिवक्ता को फोन कर कहा कि उनके पास उसके पति द्वारा दिए गए अश्लील फोटो हैं, जिन्हें डिलीट कर दिया जाए। इसके साथ ही उसने यह आरोप भी लगाया कि तलाक के नाम पर अधिवक्ता ने उससे करीब 10 लाख रुपये मांगे हैं, जो वह नहीं दे सकती। इस बातचीत के दौरान ही अधिवक्ता को साक्षी की मंशा पर संदेह हो गया, क्योंकि उन्होंने केवल कोर्ट फीस और लीगल ओपिनियन की बात कही थी।
ब्लैकमेलिंग और धमकियों से परेशान होकर फरियादी अधिवक्ता नवनीत शर्मा ने बाणगंगा थाने में साक्षी, सागर और ओमप्रकाश विश्वकर्मा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तीनों आरोपियों पर बीएनएस की धारा 308(3) और 351(3) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।