इंदौर में फिर हनीट्रैप -10 लाख की फिरौती नहीं दी तो वकील को बदनाम करने की धमकी-प्रकरण दर्ज

इंदौर में फिर हनीट्रैप -10 लाख की फिरौती नहीं दी तो वकील को बदनाम करने की धमकी-प्रकरण दर्ज
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इंदौर - महिला पहले खुद को पीड़ित बताकर अधिवक्ता के पास क्लाइंट बनकर पहुंची। सहानुभूति और भरोसे का फायदा उठाते हुए उसने धीरे-धीरे परिचय बढ़ाया और फिर अपने गिरोह के साथ मिलकर अधिवक्ता को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। आरोप है कि महिला और उसके साथियों ने अधिवक्ता से 10 लाख रुपये की फिरौती की मांग की। जब अधिवक्ता ने रकम देने से साफ इनकार किया, तो आरोपियों ने दबाव बढ़ाते हुए धमकियां देना शुरू कर दीं। हद तब पार हो गई जब गिरोह ने झूठे आरोपों में फंसाने की चेतावनी दी। मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर पीड़ित अधिवक्ता ने आखिरकार बाणगंगा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि संगठित गिरोह की सुनियोजित साजिश हो सकती है। सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि जब कानून के जानकार भी इस जाल से नहीं बच पा रहे, 

      पति-पत्नी को आपस में बैठकर मामला सुलझाने की सलाह दी 

    फरियादी अधिवक्ता नवनीत शर्मा ने पुलिस को बताया कि 29 जनवरी को वह अपने कालिंदी गोल्ड स्थित कार्यालय पहुंचे थे। उसी दौरान कार्यालय के सामने पेंटिंग कर रहे एक मजदूर ने उनसे संपर्क किया, जिसने अपना नाम राजकुमार सेन बताया। राजकुमार ने अधिवक्ता को बताया कि उसका अपनी पत्नी साक्षी से पिछले कई दिनों से पारिवारिक विवाद चल रहा है और वह पत्नी को समझाने में मदद चाहता है। भरोसा जीतने के लिए उसने पत्नी के कुछ अश्लील फोटो और सोशल मीडिया के स्क्रीनशॉट भी अधिवक्ता को दिखाए। पारिवारिक विवाद की बात सुनकर मानवता के नाते अधिवक्ता ने साक्षी को फोन कर समझाइश दी और पति-पत्नी को आपस में बैठकर मामला सुलझाने की सलाह दी। कुछ देर बाद साक्षी अपनी एक महिला मित्र के साथ अधिवक्ता नवनीत शर्मा के कार्यालय पहुंची। यहां साक्षी और राजकुमार ने एक साथ रहने से इनकार करते हुए तलाक लेने की बात रखी। इस पर अधिवक्ता ने दोनों को तलाक की कानूनी प्रक्रिया और नियमों की जानकारी दी। बातचीत के बाद सभी वहां से चले गए।

    10 लाख की मांग से खुली पोल

    इसी दिन रात में साक्षी ने अधिवक्ता को फोन कर कहा कि उनके पास उसके पति द्वारा दिए गए अश्लील फोटो हैं, जिन्हें डिलीट कर दिया जाए। इसके साथ ही उसने यह आरोप भी लगाया कि तलाक के नाम पर अधिवक्ता ने उससे करीब 10 लाख रुपये मांगे हैं, जो वह नहीं दे सकती। इस बातचीत के दौरान ही अधिवक्ता को साक्षी की मंशा पर संदेह हो गया, क्योंकि उन्होंने केवल कोर्ट फीस और लीगल ओपिनियन की बात कही थी। फोन पर चर्चा जारी ही थी कि अचानक कॉल किसी अन्य व्यक्ति ने ले लिया, जिसने खुद को अधिवक्ता बताते हुए अपना नाम सागर बताया। उसने फरियादी से उनकी सनद (लाइसेंस) पूछते हुए दबाव बनाना शुरू कर दिया। बातचीत के दौरान कहासुनी बढ़ गई। तभी एक तीसरे व्यक्ति ओमप्रकाश विश्वकर्मा ने फोन लेकर सीधे-सीधे 10 लाख रुपये देने की मांग की और रकम नहीं देने पर अधिवक्ता को बदनाम करने की धमकी दी।

     बाणगंगा थाने में मामला दर्ज 

    ब्लैकमेलिंग और धमकियों से परेशान होकर फरियादी अधिवक्ता नवनीत शर्मा ने बाणगंगा थाने में साक्षी, सागर और ओमप्रकाश विश्वकर्मा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तीनों आरोपियों पर बीएनएस की धारा 308(3) और 351(3) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।  

    Hemant Nagle
    By Hemant Nagle

    हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...

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