Peoples Update Special :हनीमून पीरियड में टूट रहे रिश्ते, परिवार के दबाव में हुई शादी बन रही तलाक की बड़ी वजह

पल्लवी वाघेला, भोपाल। इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर जैसे प्रमुख शहरों में हनीमून पीरियड के दौरान तलाक के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। काउंसलिंग के दौरान कई दंपतियों ने स्वीकार किया कि वे किसी और से शादी करना चाहते थे, लेकिन परिवार के दबाव में यह रिश्ता स्वीकार करना पड़ा। ऐसे मामलों में करीब 70 फीसदी जोड़ों में किसी एक पार्टनर ने पहले से ही तलाक लेने का मन बना लिया था। विशेषज्ञों का कहना है कि शादी से पहले बच्चों की इच्छा और भावनाओं को समझना बेहद जरूरी है।
हनीमून पीरियड में बढ़ रहे तलाक के मामले
हनीमून पीरियड को दांपत्य जीवन का गोल्डन पीरियड माना जाता है, जब पति-पत्नी के बीच प्यार और समझ मजबूत होती है। लेकिन अब यही समय कई रिश्तों के टूटने की वजह बन रहा है। अकेले मध्य प्रदेश में जून 2025 से जून 2026 के बीच ऐसे 5 दर्जन से ज्यादा मामले फैमिली कोर्ट पहुंचे हैं। वहीं, इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर जैसे चार प्रमुख महानगरों में ऐसे 48 मामले दर्ज हुए हैं। चिंताजनक बात यह है कि करीब 70 फीसदी मामलों में किसी एक पार्टनर ने शादी से पहले ही तलाक लेने का मन बना लिया था।
काउंसलिंग में सामने आई रिश्ते टूटने की असली वजह
फैमिली कोर्ट की काउंसलिंग के दौरान कई दंपतियों ने बताया कि वे किसी और से शादी करना चाहते थे, लेकिन परिवार के दबाव में उन्हें यह रिश्ता स्वीकार करना पड़ा। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि अब तलाकशुदा होने के बाद वे अपनी पसंद के व्यक्ति से शादी कर सकेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में शादी के बाद छोटी-छोटी बातों पर विवाद बढ़ता जाता है और मामला जल्द ही तलाक तक पहुंच जाता है। यह स्थिति परिवार और समाज, दोनों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।
तीन मामलों ने खोली रिश्तों की सच्चाई
इंदौर के एक कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले दंपति की शादी के दो महीने बाद ही मामला तलाक तक पहुंच गया। हनीमून के दौरान विवाद हुआ और बाद में युवती ने स्वीकार किया कि वह किसी और से शादी करना चाहती थी। भोपाल के एक मामले में पति ने पत्नी के पुराने रिश्ते को लेकर दूरी बना ली, जबकि पत्नी ने माना कि शादी उसकी मर्जी के खिलाफ हुई थी, हालांकि वह रिश्ता निभाना चाहती थी। वहीं, जबलपुर के एक युवक ने शादी के दो महीने बाद तलाक की अर्जी लगाई और बाद में स्वीकार किया कि उसने परिवार के दबाव में शादी की थी और पहले से ही अलग होने का मन बना लिया था।
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चार प्रमुख शहरों में सामने आए इतने मामले
जून 2025 से जून 2026 के बीच इंदौर में ऐसे 19, भोपाल में 14, जबलपुर में 9 और ग्वालियर में 6 मामले फैमिली कोर्ट पहुंचे। इन मामलों में एक समान बात यह रही कि अधिकतर दंपतियों के बीच शादी से पहले ही मानसिक दूरी मौजूद थी। काउंसलिंग के दौरान यह भी सामने आया कि परिवार की इच्छा को प्राथमिकता देने के कारण कई युवाओं ने अपनी पसंद को नजरअंदाज किया। बाद में यही असहमति रिश्तों के टूटने की वजह बनी।
विशेषज्ञ बोले-बच्चों की मर्जी से ही हो शादी
फैमिली कोर्ट काउंसलर शैल अवस्थी का कहना है कि शादी जबरदस्ती नहीं, बल्कि मन का मामला है। उनके अनुसार इन दिनों ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें दंपति हनीमून पीरियड में ही अलग होने का फैसला ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकतर मामलों में लड़का या लड़की का पहले से किसी और के साथ संबंध होता है, लेकिन परिवार के दबाव में उनकी शादी कहीं और कर दी जाती है। उनका मानना है कि परिवारों को बच्चों की भावनाओं को समझना चाहिए और यदि किसी बात पर असहमति हो तो पहले उन्हें समझाएं, लेकिन शादी उनकी मर्जी से ही करें।












