सीहोर में जंगली जानवर का आतंक, गाय का शिकार; ग्रामीणों में दहशत
सीहोर। सुबह गाय का क्षत-विक्षत शव मिलने और आसपास पगमार्ग दिखाई देने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। तेंदुए की आशंका के बीच किसानों और विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, वन्यजीव की वास्तविक पहचान की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
रात के अंधेरे में गाय पर हमला
किसान सन्नी यादव और मनीष यादव के मुताबिक, पचामा दरगाह के पास स्थित उनके खेत में कुएं के नजदीक गाय बंधी हुई थी। रात करीब 3 बजे तक गाय सुरक्षित थी। इसके बाद सुबह 4 से 5 बजे के बीच किसी जंगली जानवर ने उस पर हमला कर दिया। जब किसान दोबारा खेत पर पहुंचे तो गाय का क्षत-विक्षत शव पड़ा मिला। घटनास्थल के आसपास मिले पगमार्गों ने मामले को गंभीर बना दिया है।
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पैरों के निशान से तेंदुए की आशंका
घटनास्थल पर मिले पंजों जैसे निशानों के आधार पर ग्रामीण किसी बड़े जंगली जानवर की मौजूदगी की आशंका जता रहे हैं। कुछ लोगों को इसके पीछे तेंदुए का हाथ होने का संदेह है। हालांकि, केवल पगमार्ग देखकर किसी वन्यजीव की पहचान निश्चित नहीं की जा सकती। निशानों की विशेषज्ञ जांच और घटनास्थल के अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में अफवाहों के बजाय वन विभाग की जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
सीसीटीवी कैमरे बंद
किसानों के मुताबिक, घटना के बाद आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया, लेकिन कैमरे बंद मिले। यदि कैमरे चालू होते तो रात के दौरान हुई गतिविधियों और जंगली जानवर की पहचान में मदद मिल सकती थी। अब घटनास्थल पर मिले निशान और अन्य साक्ष्य ही जांच के लिहाज से अहम हो सकते हैं।
विद्यार्थियों की सुरक्षा पर सवाल
सत्यसाईं यूनिवर्सिटी क्षेत्र में रोजाना बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं का आना-जाना रहता है। ऐसे क्षेत्र के नजदीक मवेशी का शिकार होने से विद्यार्थियों, कर्मचारियों और आसपास के रहवासियों में चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि, फिलहाल किसी व्यक्ति पर हमले की जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन एहतियात के तौर पर क्षेत्र में सतर्कता और निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
एक महीने पहले अवधपुरी में दिखा था बाघ
करीब एक महीने पहले अवधपुरी क्षेत्र में भी बाघ की मौजूदगी की सूचना से दहशत फैल गई थी। उस दौरान वन विभाग की टीम ने सर्चिंग और कॉम्बिंग अभियान चलाया था। अब सत्यसाईं यूनिवर्सिटी के पास गाय के शिकार की घटना ने जंगली जानवरों की आवाजाही को लेकर पुरानी चिंताएं फिर बढ़ा दी हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं में किसी एक ही जानवर के शामिल होने की पुष्टि नहीं हुई है।
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वन विभाग से सर्चिंग और गश्त बढ़ाने की मांग
घटना के बाद क्षेत्र के लोगों ने वन विभाग से मांग की है कि पगमार्गों की वैज्ञानिक तरीके से जांच कराई जाए, आसपास के खेतों और रास्तों पर निगरानी बढ़ाई जाए तथा जरूरत के अनुसार सर्चिंग अभियान चलाया जाए। किसानों का कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि मवेशियों के साथ किसी इंसान की जान भी खतरे में न पड़े। अब निगाहें वन विभाग की जांच पर टिकी हैं, जिससे स्पष्ट हो सकेगा कि गाय का शिकार किस वन्यजीव ने किया और इलाके में उसकी मौजूदगी कितनी गंभीर है।






















