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कुछ देर का सुकून, लंबे समय का नुकसान! जानिए नशा कैसे दिमाग और शरीर को करता है प्रभावित

Drugs Effect on Body: शराब, सिगरेट और दूसरे नशीले पदार्थ शरीर में पहुंचते ही दिमाग के काम करने के तरीके को प्रभावित करते हैं। जानिए नशा करने से डोपामिन पर क्या असर पड़ता है, बार-बार नशे की तलब क्यों उठती है और इसकी लत कैसे लगती है। साथ ही समझें दिल, लिवर, फेफड़ों और दिमाग पर इसके गंभीर नुकसान और बचाव के उपाय।
कुछ देर का सुकून, लंबे समय का नुकसान! जानिए नशा कैसे दिमाग और शरीर को करता है प्रभावित
नशा छोड़ना क्यों हो जाता है मुश्किल? दिमाग में होते हैं ये बदलाव, जानिए लत लगने के पीछे का विज्ञान

Effects of Drugs on Brain and Body: आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी, काम का दबाव, पढ़ाई की टेंशन और बढ़ते तनाव के बीच कुछ लोग राहत पाने के लिए नशे का सहारा लेने लगते हैं। शुरुआत में उन्हें लगता है कि इससे उनकी परेशानी कुछ समय के लिए कम हो जाएगी। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नशा करते ही शरीर के अंदर क्या होता है? आखिर दिमाग बार-बार उसी चीज की मांग क्यों करने लगता है? दरअसल, शराब, सिगरेट और दूसरे नशीले पदार्थ शरीर के कई अंगों के काम करने के तरीके को प्रभावित करते हैं। धीरे-धीरे इनका इस्तेमाल आदत और फिर निर्भरता में बदल सकता है।

नशा करते ही शरीर में सबसे पहले क्या होता है?

जब कोई व्यक्ति नशीले पदार्थ का सेवन करता है, तो वह शरीर में पहुंचकर अलग-अलग अंगों पर असर डाल सकता है। कई पदार्थ खून के जरिए दिमाग तक पहुंचते हैं। वहां ये दिमाग के उन केमिकल्स के काम करने के तरीके को बदल देते हैं, जो हमारी भावनाओं, सोच और व्यवहार को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

इन्हें न्यूरोट्रांसमीटर कहा जाता है।

इसी वजह से कुछ पदार्थों के असर से व्यक्ति को थोड़ी देर के लिए आराम या उत्साह महसूस हो सकता है, जबकि कुछ से सुस्ती, चक्कर या सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, हर नशीले पदार्थ का असर एक जैसा नहीं होता।

दिमाग में डोपामिन का क्या है खेल?

हमारे दिमाग में डोपामिन नाम का एक केमिकल होता है, जो प्रेरणा, सीखने और किसी अनुभव को दोबारा पाने की इच्छा से जुड़ा है। कुछ नशीले पदार्थ दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम पर तेज असर डालते हैं। इससे दिमाग उस अनुभव को दोबारा पाने की इच्छा पैदा कर सकता है। यही वजह है कि कुछ लोगों को बार-बार नशा करने की तलब महसूस होने लगती है। हालांकि, सभी नशीले पदार्थ सीधे डोपामिन पर एक जैसा असर नहीं डालते। कई पदार्थ दिमाग के अलग-अलग रिसेप्टर्स और केमिकल सिस्टम को प्रभावित करते हैं।

धीरे-धीरे कैसे लग जाती है नशे की लत?

नशे की लत अचानक नहीं, बल्कि कई बार धीरे-धीरे विकसित होती है। जब कोई व्यक्ति बार-बार नशीले पदार्थ का सेवन करता है, तो उसका दिमाग उन बदलावों के अनुसार खुद को ढालने लगता है। कुछ समय बाद पहले जैसी अनुभूति पाने के लिए ज्यादा मात्रा की जरूरत महसूस हो सकती है। इसे मेडिकल भाषा में टॉलरेंस (Tolerance) कहा जाता है। इसके अलावा, नशे का इस्तेमाल बंद करने या कम करने पर कुछ लोगों को बेचैनी, चिड़चिड़ापन, नींद की परेशानी और कंपकंपी जैसे लक्षण हो सकते हैं। इन्हें विदड्रॉल सिम्पटम्स (Withdrawal Symptoms) कहा जाता है।

नशे से शरीर के किन अंगों को होता है नुकसान?

नशीले पदार्थों का असर केवल दिमाग तक सीमित नहीं रहता। ये शरीर के दूसरे अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।

लिवर: लंबे समय तक ज्यादा शराब पीने से लिवर में सूजन, फैटी लिवर और सिरोसिस जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

फेफड़े: धूम्रपान से फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इससे सांस संबंधी बीमारियों और फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ता है।

दिल: तंबाकू और कुछ अन्य नशीले पदार्थ ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन को प्रभावित कर सकते हैं। इससे हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है।

दिमाग: लंबे समय तक नशे की आदत याददाश्त, ध्यान लगाने की क्षमता और फैसले लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

किडनी: कुछ पदार्थों का सेवन किडनी के कामकाज को भी नुकसान पहुंचा सकता है।

नशा छोड़ने पर बेचैनी क्यों होती है?

जब दिमाग किसी नशीले पदार्थ के लगातार असर का आदी हो जाता है, तो उसे अचानक बंद करने पर शरीर में कई तरह के बदलाव महसूस हो सकते हैं। कुछ लोगों को घबराहट, बेचैनी, पसीना, नींद न आना या चिड़चिड़ापन हो सकता है। इन लक्षणों की गंभीरता नशीले पदार्थ और व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करती है। खासकर शराब और कुछ अन्य पदार्थों पर निर्भरता होने पर अचानक सेवन बंद करना खतरनाक हो सकता है। इसलिए डॉक्टर की निगरानी में इलाज कराना जरूरी है।

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कैसे पहचानें कि नशा अब आदत बन चुका है?

अगर किसी व्यक्ति को बार-बार नशे की जरूरत महसूस होती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इसके कुछ संकेत हो सकते हैं:

  • नशा कम करने की कोशिश के बावजूद सफल न होना।
  • बार-बार नशीले पदार्थ का इस्तेमाल करने की इच्छा होना।
  • पढ़ाई, नौकरी या परिवार पर असर पड़ना।
  • नुकसान की जानकारी होने के बाद भी सेवन जारी रखना।
  • नशा न मिलने पर शारीरिक या मानसिक परेशानी महसूस होना।

ऐसे संकेत दिखाई देने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

क्या नशे की लत से बाहर निकलना संभव है?

नशे की लत से बाहर निकलना संभव है। इसके लिए सही इलाज, काउंसलिंग और परिवार का सहयोग मददगार हो सकता है। डॉक्टर व्यक्ति की स्थिति के अनुसार दवाओं, व्यवहार संबंधी थेरेपी और दूसरी उपचार विधियों की सलाह दे सकते हैं। यह समझना जरूरी है कि नशे की लत केवल इच्छाशक्ति की कमी नहीं है। यह एक स्वास्थ्य समस्या है, जिसका इलाज किया जा सकता है। याद रखें, तनाव से राहत पाने के लिए नशा कोई सुरक्षित समाधान नहीं है। समय पर मदद लेना बेहतर स्वास्थ्य और जीवन की ओर महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...

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