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राहुल गांधी के आरोपों पर पीयूष गोयल का पलटवार, 'दो को बनाया राज्यपाल, सिटिंग मुख्य चुनाव आयुक्त को...'

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार किया है। उन्होंने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने और चुनाव आयुक्तों को राजनीतिक पद देने का आरोप लगाया। गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने चुनाव आयोग को स्वतंत्र और स्वायत्त तरीके से काम करने का अवसर दिया है।
राहुल गांधी के आरोपों पर पीयूष गोयल का पलटवार, 'दो को बनाया राज्यपाल, सिटिंग मुख्य चुनाव आयुक्त को...'
राहुल गांधी के आरोपों पर पीयूष गोयल का पलटवार

नई दिल्ली। पीयूष गोयल ने राहुल गांधी के रवैये को बचकाना बताते हुए कांग्रेस को अपने पुराने रिकॉर्ड पर नजर डालने की सलाह दी। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन, एमएस गिल और अन्य अधिकारियों के उदाहरण देकर कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए। गोयल ने कहा कि 2023 में मोदी सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए कानूनी प्रावधान किया, जिसमें नेता प्रतिपक्ष को भी चयन समिति में शामिल किया गया। SIR को लेकर उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए विपक्षी नेताओं के पुराने बयानों का हवाला दिया।

राहुल गांधी के बयानों पर पलटवार 

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर राहुल गांधी के बयानों पर जवाब देते हुए कांग्रेस पर संविधान के हर पहलू को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने राहुल गांधी के रवैये को बचकाना बताया और कहा कि कांग्रेस को चुनाव आयोग को लेकर अपने पुराने रिकॉर्ड को भी याद करना चाहिए। गोयल के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने हमेशा चुनाव आयोग को स्वतंत्र और स्वायत्त तरीके से काम करने की पैरवी की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार में चुनाव आयोग के अधिकारियों को राजनीतिक लाभ देने की कोशिश नहीं की गई और उन्हें ईमानदारी से काम करने का अवसर दिया गया।

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'मोदी सरकार ने किसी चुनाव आयुक्त को राजनीतिक पद नहीं दिया'

पीयूष गोयल ने दावा किया कि मोदी सरकार ने किसी चुनाव आयुक्त को राजनीतिक पद नहीं दिया, जबकि कांग्रेस के शासनकाल में चुनाव आयुक्तों को सांसद, मंत्री और राज्यपाल बनाया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, लेकिन अपने कार्यकाल के फैसलों और रिकॉर्ड को नजरअंदाज करती है। गोयल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के समय चुनाव आयोग के पदों पर रहे अधिकारियों को बाद में राजनीतिक जिम्मेदारियां दी गईं। उनके मुताबिक, इस तरह के उदाहरण चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर कांग्रेस के दावों पर सवाल खड़े करते हैं।

टीएन शेषन और एमएस गिल का उदाहरण दिया

पीयूष गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस उनकी ईमानदारी की तारीफ करती थी, लेकिन 1999 में उन्हें लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने का मौका दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह शेषन को उनके काम के लिए राजनीतिक रूप से पुरस्कृत करने जैसा नहीं था। गोयल ने एमएस गिल का उदाहरण देते हुए कहा कि वह 1996 से 2001 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे और वर्ष 2000 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि रिटायरमेंट के तीन साल बाद एमएस गिल कांग्रेस में शामिल हुए, 2004 में राज्यसभा पहुंचे और 2008 में केंद्रीय कैबिनेट में मंत्री बनाए गए।

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टीकाराम मीणा और रतन यू केलकर की नियुक्तियों पर सवाल

पीयूष गोयल ने टीकाराम मीणा और रतन यू केलकर के मामलों का हवाला देते हुए भी कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए अधिकारियों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि टीकाराम मीणा केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी थे और एक साल बाद उन्हें कांग्रेस की राजस्थान मेनिफेस्टो टीम में शामिल कर लिया गया। गोयल ने दावा किया कि मई 2026 में केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी रहे रतन यू केलकर को विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने अपना मुख्य सचिव घोषित कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चुनाव के दौरान मदद के बाद अधिकारियों को पद देना राजनीतिक लाभ पहुंचाने की कोशिश नहीं है।

मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के नियमों का किया जिक्र

पीयूष गोयल ने कहा कि पहले मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति सरकार अपने स्तर पर करती थी और जिसे चाहती थी, उसे इस पद पर नियुक्त कर देती थी। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 2023 में कानून के जरिए नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव किया। गोयल के मुताबिक, इस प्रावधान के तहत नेता प्रतिपक्ष को चयन समिति का सदस्य बनाया गया, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया में विपक्ष की भागीदारी सुनिश्चित हुई। उन्होंने कहा कि अब प्रधानमंत्री के साथ नेता प्रतिपक्ष भी उस समिति का हिस्सा होते हैं, जो मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर फैसला करती है।

SIR पर कांग्रेस के दावों को बताया बेबुनियाद

SIR को लेकर पीयूष गोयल ने कांग्रेस के वोट चोरी संबंधी आरोपों को बेबुनियाद और झूठा बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कई नेता पहले SIR की प्रक्रिया की तारीफ कर चुके हैं और इसके चुनावी नतीजों पर सकारात्मक बयान दे चुके हैं। गोयल ने शशि थरूर, रमेश चेन्नीथला और केरल के मुख्यमंत्री के बयानों का हवाला देते हुए दावा किया कि उन्होंने SIR के संदर्भ में कांग्रेस की जीत की बात कही थी। उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर अधीर रंजन चौधरी की तारीफ का भी जिक्र किया और सवाल उठाया कि जब विपक्ष के नेता पहले आयोग की सराहना कर चुके हैं, तो अब कांग्रेस उस पर बेबुनियाद आरोप क्यों लगा रही है।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

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