‘पहले आओ-पहले पाओ’ दिल्ली में रामलीला के मैदान की बुकिंग पर HC सख्त, तय किए नए नियम

दिल्ली में रामलीला और दूसरे धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए मैदान आवंटित करने की प्रक्रिया में बदलाव हो सकता है। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि मैदान देने के लिए हर साल स्पष्ट नियम तय किए जाने चाहिए। कोर्ट ने ‘पहले आओ, पहले पाओ’ की नीति पर भी सवाल उठाए और कहा कि इससे सभी संस्थाओं को बराबर अवसर नहीं मिल पाता। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मैदानों के आवंटन की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी ‘रे ऑफ न्यू बिगिनिंग फाउंडेशन’ नाम की संस्था की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। संस्था ने दिल्ली में रामलीला आयोजित करने के लिए मैदान मांगा था। उसका कहना था कि उसने वर्ष 2023 और 2024 में भी उसी मैदान पर रामलीला का आयोजन किया था। जानकारी के अनुसार, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की नीति के तहत पुराने आयोजकों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी, लेकिन दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) ने पहले आवेदन करने वाली दूसरी संस्था को मैदान आवंटित कर दिया।
90 दिन पहले जारी करना होगा नोटिस
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि मैदानों के आवंटन के लिए कार्यक्रम शुरू होने से कम से कम 90 दिन पहले सार्वजनिक नोटिस जारी किया जाना चाहिए। इस नोटिस में उपलब्ध मैदानों की जानकारी, आवेदन करने की अंतिम तारीख और आवंटन से जुड़े सभी नियम स्पष्ट रूप से बताए जाने चाहिए। कोर्ट के मुताबिक, इससे सभी इच्छुक संस्थाओं को समय पर जानकारी मिल सकेगी और वे आवेदन करने का उचित अवसर पा सकेंगी। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि मैदान आवंटित करने की प्रक्रिया किसी एक संस्था के पक्ष में न हो।
‘पहले आओ, पहले पाओ’ नीति पर क्यों उठे सवाल?
हाई कोर्ट ने कहा कि यदि मैदान आवंटित करने का फैसला केवल पहले आवेदन करने के आधार पर किया जाता है, तो कुछ संस्थाओं को अनुचित लाभ मिल सकता है। जिस संस्था को मैदान खाली होने की जानकारी पहले मिल जाती है, वह सबसे पहले आवेदन करके मैदान हासिल कर सकती है। इससे दूसरी योग्य संस्थाओं को बराबर मौका नहीं मिल पाता। अदालत ने निर्देश दिया कि यदि एक ही मैदान के लिए कई संस्थाएं आवेदन करती हैं, तो अधिकारियों को तय नियमों के आधार पर सभी आवेदनों की तुलना करनी होगी। इसके बाद उचित कारणों के साथ फैसला लेना होगा।
पुराने आयोजकों को मिल सकती है प्राथमिकता
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले रामलीला आयोजित कर चुकी संस्था को उसके पिछले रिकॉर्ड और नियमों के पालन के आधार पर कुछ प्राथमिकता दी जा सकती है। हालांकि, इससे संस्था को उस मैदान पर स्थायी अधिकार नहीं मिल जाएगा। यदि दूसरी योग्य संस्थाएं भी मैदान के लिए आवेदन करती हैं, तो किसी एक संस्था को लगातार दो साल से अधिक प्राथमिकता नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि मैदान के आवंटन और उससे जुड़ी शिकायतों का निपटारा कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही कर लिया जाना चाहिए, ताकि आयोजन के समय विवाद की स्थिति न बने।
2026 के आयोजन के लिए आवंटन नहीं बदला
हालांकि, वर्ष 2026 के आयोजन का समय नजदीक होने के कारण हाई कोर्ट ने मौजूदा आवंटन रद्द करने या मैदान याचिकाकर्ता संस्था को देने का आदेश नहीं दिया। अदालत की टिप्पणी का मुख्य उद्देश्य भविष्य में मैदान आवंटित करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है।
जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन भी चर्चा में
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन भी चर्चा में रहा है। संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इससे पहले CJP ने 19 जून से 25 जुलाई तक जंतर-मंतर पर पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भी प्रदर्शन किया था। इस दौरान संगठन ने अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया था।




















