छिंदवाड़ा-पांढुर्णा में सूखाग्रस्त जिला घोषित करने की मांग, किसानों ने कहा 2 लाख रुपए तक की मदद मिले

छिंदवाड़ा-पांढुर्णा। किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर मंगलवार को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। इसमें सूखे की स्थिति, फसलों को हुए नुकसान, ग्रामीण क्षेत्रों में संभावित पेयजल संकट, वन्यजीवों से बढ़ते खतरे और भुली जलाशय से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने सहित विभिन्न मांगें उठाई गईं। ज्ञापन में कहा गया कि वर्षा की कमी और कृषि संबंधी समस्याओं के कारण किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की किल्लत बढ़ने की आशंका भी जताई गई। किसानों ने मांग की कि जिले में तत्काल सर्वे कराकर फसल नुकसान का आकलन किया जाए और पांढुर्णा जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर प्रभावित किसानों को राहत दी जाए।
कर्जमाफी और फसल बीमा भुगतान की मांग
ज्ञापन में सभी किसानों को 2 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता देने और संपूर्ण कृषि ऋण माफ करने की मांग की गई। इसमें स्पष्ट किया गया कि राहत का लाभ भूमि स्वामियों के साथ ठेके और बटाई पर खेती करने वाले वास्तविक किसानों को भी मिलना चाहिए। किसानों के कृषि बिजली पंपों के बिल पूरी तरह माफ करने और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पात्र किसानों को बीमा राशि का समय पर भुगतान करने की मांग भी की गई। खाद वितरण में ई-टोकन व्यवस्था से होने वाली परेशानियां दूर कर पूर्ववत सरल व्यवस्था लागू करने तथा वास्तविक कृषि आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की बात कही गई। इसके अलावा सूखे से प्रभावित किसानों के बच्चों की स्कूल और कॉलेज फीस माफ करने अथवा आर्थिक सहायता देने की मांग उठाई गई, ताकि आर्थिक तंगी के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।
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पशुओं के लिए चारा-पानी और गांवों में पेयजल व्यवस्था मजबूत हो
किसानों ने सूखे की स्थिति को देखते हुए पशुधन के संरक्षण के लिए पर्याप्त हरा और सूखा चारा, स्वच्छ पानी तथा जरूरत के अनुसार पशु शिविर स्थापित करने की मांग की। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट से निपटने के लिए हैंडपंपों की मरम्मत, जलस्रोतों का रखरखाव, जरूरत के अनुसार टैंकरों से जलापूर्ति, पाइपलाइन विस्तार और वर्षाजल संचयन के कार्य प्राथमिकता से कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। वन क्षेत्रों में पानी की कमी के कारण जंगली जानवरों के आबादी और खेतों की ओर आने की आशंका जताते हुए जलस्रोतों के पुनर्जीवन, जलकुंड बनाने और वन विभाग की निगरानी बढ़ाने की मांग की गई। वन्यजीवों से प्रभावित परिवारों को नियमानुसार शीघ्र सहायता और मुआवजा देने पर भी जोर दिया गया।
भुली जलाशय प्रभावित किसानों को समान मुआवजा मिले
ज्ञापन में भुली जलाशय से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने में ग्रामों और राजस्व हल्कों के आधार पर कथित असमानता की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई। किसानों का कहना है कि समान प्रकृति और श्रेणी की भूमि के लिए समान मुआवजा मानदंड लागू किए जाएं। दोबारा सर्वे कर कम मुआवजा पाने वाले पात्र किसानों को नियमानुसार अंतर की राशि दी जाए और मुआवजा निर्धारण के आधार सार्वजनिक किए जाएं। इसके साथ ही सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, खेत-तालाब निर्माण, भूजल पुनर्भरण और जलग्रहण विकास जैसे दीर्घकालीन उपाय अपनाने की मांग की गई। किसानों ने कृषि उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने तथा उपज की खरीदी अधिकृत कृषि उपज मंडियों के माध्यम से सुनिश्चित करने की मांग भी रखी।
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