महात्मा गांधी का रोल निभाएंगे मनोज बाजपेयी, सुधीर मिश्रा की फिल्म में दिखेगा इतिहास का अनसुना अध्याय

फिल्म की कहानी उस दौर पर आधारित है, जब महात्मा गांधी दिल्ली में सत्ता के केंद्र से दूर चले गए थे और आत्ममंथन के एक अहम दौर से गुजर रहे थे। अनुभव सिन्हा ने भारत के स्वतंत्रता सेनानियों की नैतिक ताकत, आपसी सम्मान और एकता पर बात की है। उन्होंने गांधी, डॉ. बीआर आंबेडकर, सरदार पटेल और जवाहरलाल नेहरू के बीच के संबंधों का जिक्र करते हुए उस समय के नेताओं की सोच को सामने रखा। फिल्म को अनुभव सिन्हा और नरेंद्र हिरावत ने प्रोड्यूस किया है, जबकि इसका निर्देशन सुधीर मिश्रा ने किया है।
मनोज बाजपेयी पर्दे पर निभाएंगे महात्मा गांधी की भूमिका
जाने-माने फिल्ममेकर अनुभव सिन्हा और सुधीर मिश्रा ने अपनी नई फिल्म के लिए हाथ मिलाया है। इस फिल्म में नेशनल अवॉर्ड विजेता मनोज बाजपेयी महात्मा गांधी की भूमिका में नजर आएंगे, जबकि सौरभ शुक्ला भी अहम किरदार निभाएंगे। फिल्म में भारत की आजादी के इतिहास से जुड़े ऐसे अध्याय को दिखाया जाएगा, जिसके बारे में आमतौर पर कम चर्चा होती है। इसे अनुभव सिन्हा ने नरेंद्र हिरावत के साथ बनारस मीडिया वर्क्स के बैनर तले प्रोड्यूस किया है और NH स्टूडियोज इसे प्रेजेंट कर रहा है।
गांधी के जीवन के 21 दिनों की कहानी दिखाएगी फिल्म
फिल्म की कहानी आजादी के समय के उन 21 दिनों पर आधारित है, जब महात्मा गांधी दिल्ली में सत्ता के केंद्र से दूर चले गए थे। इस दौरान उनके कदम को आत्ममंथन और खुद को समझने की कोशिश के तौर पर पेश किया जाएगा। अनुभव सिन्हा का मानना है कि भारत के बड़े नेताओं के जीवन से जुड़ी कहानियों में आज के दौर के लिए भी कई अहम सीख मौजूद हैं। उन्होंने अपने बेटे के साथ गांधी की नैतिक ताकत पर हुई बातचीत का जिक्र करते हुए बताया कि गांधी लोगों को आपसी झगड़े खत्म करने के लिए प्रेरित करते थे।
अनुभव सिन्हा ने गांधी की नैतिक ताकत का किया जिक्र
अनुभव सिन्हा ने महात्मा गांधी के प्रभाव को याद करते हुए कहा कि गांधी लोगों से कहते थे कि अगर वे आपस में झगड़ना बंद नहीं करेंगे, तो वह खाना नहीं खाएंगे। सिन्हा के मुताबिक, उनके बेटे ने इस बात पर सवाल किया था, जिसके जवाब में उन्होंने बताया कि लोग कई बार गांधी की बात मानकर झगड़े बंद कर देते थे। फिल्ममेकर ने इसे गांधी की नैतिक ताकत का उदाहरण बताया। उनका मानना है कि उस दौर के नेताओं का प्रभाव केवल उनके पदों से नहीं, बल्कि उनके विचारों और लोगों के बीच बने सम्मान से भी जुड़ा था।
आंबेडकर, पटेल और नेहरू के आपसी सम्मान पर भी बोले
अनुभव सिन्हा ने महात्मा गांधी और डॉ. बीआर आंबेडकर के संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों के विचारों में मतभेद होने के बावजूद देश के हित को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने बताया कि संविधान सभा के गठन के समय आंबेडकर को संविधान तैयार करने की जिम्मेदारी देने के लिए जवाहरलाल नेहरू से कहा गया था, क्योंकि वह देश और वंचित वर्गों को बेहतर समझते थे। सिन्हा ने सरदार पटेल और नेहरू से जुड़े प्रसंग का भी उल्लेख किया और कहा कि उस दौर के नेताओं ने अपने मतभेदों के बावजूद एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखा। उनके मुताबिक, गांधी, आंबेडकर, पटेल, नेहरू, वीपी मेनन, भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस जैसे व्यक्तित्वों पर और काम किए जाने की जरूरत है।
वहीदा रहमान की वापसी से फिल्म को लेकर बढ़ी चर्चा
इस फिल्म को लेकर पहले से ही फिल्म इंडस्ट्री में चर्चा है और दिग्गज अभिनेत्री वहीदा रहमान के जुड़ने से इसकी दिलचस्पी और बढ़ गई है। वह करीब आठ साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं। फिल्म में मनोज बाजपेयी, सौरभ शुक्ला और वहीदा रहमान जैसे कलाकार नजर आएंगे। सुधीर मिश्रा के निर्देशन में बन रही इस फिल्म को अनुभव सिन्हा और नरेंद्र हिरावत ने बनारस मीडिया वर्क्स के बैनर तले प्रोड्यूस किया है, जबकि NH स्टूडियोज इसे प्रेजेंट कर रहा है। फिल्म के जरिए इतिहास के उन मानवीय पहलुओं को सामने लाने की कोशिश की जाएगी, जो आज भी प्रासंगिक माने जाते हैं।




















