नई दिल्ली। राज्यसभा में उपसभापति पद के लिए हुए चुनाव में हरिवंश नारायण सिंह को लगातार तीसरी बार चुना गया है। खास बात यह रही कि उनका चयन निर्विरोध हुआ, क्योंकि विपक्ष की ओर से कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरा। इससे पहले भी वे दो बार इस पद पर रह चुके हैं। अब उनका नया कार्यकाल 2032 तक रहेगा।
राज्यसभा में उपसभापति पद के लिए चुनाव हुआ, जिसमें हरिवंश नारायण सिंह को निर्विरोध चुन लिया गया। विपक्ष की ओर से कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरा, जिसके चलते उनका चयन बिना मतदान के ही हो गया। यह उनका लगातार तीसरा कार्यकाल है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे पहले वे 2018 और 2020 में भी इस पद पर चुने जा चुके हैं। इस बार उनका चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि वे मनोनीत सदस्य के रूप में सदन में लौटे हैं और फिर उपसभापति बने हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश नारायण सिंह को बधाई देते हुए इसे सदन के विश्वास का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि, लगातार तीसरी बार इस पद पर चुना जाना इस बात का संकेत है कि सदन को उनके कामकाज और अनुभव पर भरोसा है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि, हरिवंश ने हमेशा सभी दलों को साथ लेकर चलने की कोशिश की और उनके नेतृत्व में सदन की कार्यक्षमता मजबूत हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि, उनका नया कार्यकाल भी संतुलन, समर्पण और निष्पक्षता के साथ आगे बढ़ेगा।
हालांकि, हरिवंश का चयन निर्विरोध हुआ, लेकिन इसके पीछे विपक्ष का बहिष्कार एक बड़ा कारण था। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इस चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया। विपक्ष का आरोप है कि, उपसभापति के नाम पर उनसे कोई गंभीर चर्चा नहीं की गई और सरकार एकतरफा फैसले ले रही है। लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद लंबे समय से खाली है। इसी के विरोध में विपक्ष ने इस चुनाव से दूरी बनाई। इससे साफ है कि, यह चुनाव सिर्फ एक पद भरने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि सत्ता और विपक्ष के बीच चल रहे तनाव का भी संकेत है।
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हरिवंश नारायण सिंह का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गया था। आमतौर पर ऐसे मामलों में संबंधित पार्टी दोबारा नाम भेजती है, लेकिन इस बार जेडीयू ने उनका नाम आगे नहीं बढ़ाया। इसके बाद राष्ट्रपति ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया। यह मनोनयन पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के रिटायर होने से खाली हुई सीट पर किया गया। इस तरह हरिवंश दोबारा सदन में आए और फिर उपसभापति चुने गए।
हरिवंश नारायण सिंह का जीवन सफर काफी साधारण पृष्ठभूमि से शुरू होकर एक बड़े संवैधानिक पद तक पहुंचने का उदाहरण है।
जन्म: 30 जून 1956, उत्तर प्रदेश (बलिया)
शिक्षा: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन
पृष्ठभूमि: किसान परिवार
उनका संबंध बिहार के सिताब दियारा गांव से है, जो लोकनायक जयप्रकाश नारायण का भी गांव रहा है। छात्र जीवन में ही वे जेपी आंदोलन से प्रभावित हुए और उसमें हिस्सा भी लिया।
हरिवंश का करियर पत्रकारिता से शुरू हुआ। उन्होंने 1980 के दशक में ‘धर्मयुग’ पत्रिका से काम शुरू किया। इसके बाद उन्होंने कुछ समय बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी की, लेकिन बाद में फिर पत्रकारिता में लौट आए। साल 1989 में वे ‘प्रभात खबर’ से जुड़े और आगे चलकर इसके संपादक बने। उन्होंने करीब 25 साल तक इस अखबार का नेतृत्व किया और इसे एक प्रभावशाली क्षेत्रीय मीडिया संस्थान बनाया। 2014 में उन्होंने पत्रकारिता छोड़कर राजनीति में कदम रखा और जेडीयू की ओर से राज्यसभा सदस्य बने।
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वर्ष |
उपलब्धि |
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2014 |
पहली बार राज्यसभा सदस्य बने |
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2018 |
पहली बार उपसभापति चुने गए |
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2020 |
दूसरी बार उपसभापति बने |
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2026 |
तीसरी बार निर्विरोध उपसभापति |
यह लगातार तीसरी जीत उनके अनुभव और स्वीकार्यता को दर्शाती है।
इस बार का कार्यकाल कई वजहों से ऐतिहासिक माना जा रहा है-
हरिवंश नारायण सिंह की सबसे बड़ी खासियत यह मानी जाती है कि, उन्होंने कई मौकों पर पार्टी लाइन से ऊपर उठकर संवैधानिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी। जब जेडीयू ने एनडीए से अलग होकर विपक्ष का साथ दिया, तब भी हरिवंश उपसभापति पद पर बने रहे। इसके अलावा नए संसद भवन के उद्घाटन जैसे कार्यक्रमों में उन्होंने भाग लिया, जबकि उनकी पार्टी ने बहिष्कार किया था। इससे उनकी छवि एक स्वतंत्र और संतुलित नेता के रूप में बनी।