मध्य प्रदेश राज्यसभा उपचुनाव में हरदीप पुरी निर्विरोध निर्वाचित, दो नामांकन खारिज

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुन लिए गए। मध्य प्रदेश राज्यसभा उपचुनाव में दो अन्य उम्मीदवारों के नामांकन खारिज हो गए थे। इसके बाद मैदान में सिर्फ पुरी बचे। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने गुरुवार को निर्वाचन प्रमाणपत्र लिया। यह प्रमाणपत्र रिटर्निंग ऑफिसर (चुनाव कराने वाले अधिकारी) उमेश कुमार शर्मा ने सौंपा। कार्यक्रम राज्य विधानसभा में हुआ।
ये है पूरा मामला
मध्य प्रदेश से राज्यसभा की एक सीट खाली हुई थी। केंद्रीय राज्य मंत्री एल मुरुगन ने 14 अक्टूबर को इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल मूल रूप से 2 अप्रैल 2030 तक चलना था। इसी सीट पर उपचुनाव हुआ। भारतीय जनता पार्टी (BJP – Bharatiya Janata Party) की ओर से पुरी उम्मीदवार थे। Rajya Sabha bypoll की प्रक्रिया 5 नवंबर को पूरी हो गई।
पुरी ने कब भरा था नामांकन?
पुरी ने 31 अक्टूबर को भोपाल में विधानसभा परिसर में नामांकन दाखिल किया। मुख्यमंत्री मोहन यादव इस दौरान मौजूद थे। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल और जगदीश देवड़ा भी साथ रहे। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, राज्य के कैबिनेट मंत्री और दूसरे पार्टी नेता भी पहुंचे। Hardeep Puri Rajya Sabha सीट की दौड़ का यह पहला कदम था।
ये लोग थे मैदान में
इस सीट के लिए तीन नाम सामने आए: हरदीप सिंह पुरी, राजकुमार लोहानी और कांते सायन्ना। लोहानी और सायन्ना के नामांकन जांच में खारिज हुए। तीन में से सिर्फ एक नामांकन जांच पार कर सका। वह नामांकन पुरी का था।
दो नामांकन हुए थे खारिज
जांच के दौरान दो और उम्मीदवारों के नामांकन खारिज हो गए। इनके नाम राजकुमार लोहानी और कांते सायन्ना हैं। दोनों के खारिज होने की वजह अलग-अलग थी। कांते सायन्ना के पास जरूरी हस्ताक्षर नहीं थे।
आदेश के मुताबिक विधानसभा के 10 फीसदी निर्वाचित सदस्यों के हस्ताक्षर चाहिए। या 10 निर्वाचित सदस्यों के, जो संख्या कम हो। नियम साफ हैं। उम्मीदवार को जरूरी हस्ताक्षर जुटाने पड़ते हैं। उसे तय समय में हलफनामा भी जमा करना पड़ता है। इनमें से एक भी कमी नामांकन खारिज करा सकती है।
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ऐसे रद्द हुआ लोहानी का नामांकन
राजकुमार लोहानी ने फॉर्म 26 का हलफनामा (शपथपत्र) समय पर जमा नहीं किया। आदेश के मुताबिक समयसीमा 2 नवंबर 2026 को दोपहर 3 बजे थी। उसी वजह से उनका नामांकन खारिज हुआ।
आपत्तियों के बाद भी मंजूर हुआ पर्चा
पुरी का नामांकन 3 नवंबर को स्वीकार हुआ। जांच में कांग्रेस नेताओं और निर्दलीय उम्मीदवारों ने आपत्तियां उठाई थीं। रिटर्निंग ऑफिसर ने ये आपत्तियां खारिज कर दीं। यह फैसला जांच के दौरान ही हुआ। आदेश में हर नामांकन पर अलग कारण दर्ज है।
ऐसे चुने गए हरदीप पुरी
नाम वापसी की आखिरी तारीख 5 नवंबर थी। समयसीमा दोपहर 3 बजे खत्म हुई। तब तक मैदान में कोई और उम्मीदवार नहीं था। इसलिए हरदीप सिंह पुरी निर्विरोध चुने गए की औपचारिकता पूरी हो गई। सवाल उठता है कि मतदान क्यों नहीं हुआ? जवाब सीधा है। मुकाबले में कोई दूसरा उम्मीदवार बचा ही नहीं। ऐसे में Rajya Sabha by-election में वोटिंग की जरूरत नहीं पड़ी।
प्रमाणपत्र के समय ये रहे मौजूद
गुरुवार को विधानसभा में प्रमाणपत्र खंडेलवाल को मिला। रिटर्निंग ऑफिसर उमेश कुमार शर्मा ने उन्हें यह सौंपा। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा भी मौजूद थे। बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा और भगवानदास सबनानी भी कार्यक्रम में पहुंचे। इसी मौके पर हरदीप सिंह पुरी निर्विरोध निर्वाचित होने की बात दर्ज हुई।

तारीखों में समझें पूरा सिलसिला...
घटनाक्रम तारीखों में देखें तो तस्वीर साफ हो जाती है।
- 14 अक्टूबर को एल मुरुगन ने इस्तीफा दिया।
- 31 अक्टूबर को पुरी ने भोपाल में नामांकन भरा।
- 2 नवंबर को दोपहर 3 बजे फॉर्म 26 के हलफनामे की समयसीमा खत्म हुई।
- 3 नवंबर को पुरी का नामांकन स्वीकार हुआ। लोहानी और सायन्ना के नामांकन जांच में खारिज हुए।
- 5 नवंबर को दोपहर 3 बजे नाम वापसी की समयसीमा बीती। उसी दिन तय हो गया कि हरदीप पुरी निर्विरोध निर्वाचित होंगे। गुरुवार को प्रमाणपत्र सौंपा गया।




















