हरदा: नसरीन ने अकेले खोदा 35 फुट गहरा कुआं, कई परिवारों की बुझ रही प्यास

हरदा। रेलवे लाइन के पास स्थित देवकालोनी की छोटी बस्ती में कभी रहवासियों को पीने और जरूरत के लिए पानी दूर से लाना पड़ता था। नसरीन ने इस परेशानी को दूर करने के लिए खुद कुआं खोदना शुरू किया, जिसमें उसके माता-पिता और बहनों ने भी मदद की। आज वह कुआं पक्का हो चुका है और नसरीन के जज्बे की कहानी लेखिका सपना शिवाले सोलंकी की किताब थोड़ी सी धूप में हारूंगी नहीं शीर्षक से दर्ज हुई है।
पानी की परेशानी ने लिया कुआं खोदने का संकल्प
बात वर्ष 2006 की है। रेलवे लाइन के पास स्थित देवकालोनी की एक छोटी बस्ती में कच्चे मकान थे। रहवासियों को पीने के साथ-साथ जरूरत का पानी दूर से लाना पड़ता था। इन्हीं में से एक परिवार की सबसे बड़ी बेटी नसरीन को रोज अपनी दो बहनों के साथ दूर से पानी लाना पड़ता था। एक दिन नसरीन ने ठान लिया कि कब तक ऐसी तकलीफ सहेंगे। उसने अकेले कुआं खोदने का फैसला कर लिया।
ये भी पढ़ें: छिंदवाड़ा में 6 माह की बेटी को कुएं में फेंकने वाली मां हिरासत में, पुलिस ने कोर्ट में किया पेश
20 दिन की मेहनत के बाद फूटी पानी की धार
सुबह से शाम तक नसरीन लगातार खुदाई करती। शुरुआत में हाथों से मिट्टी निकाली, फिर एक कटे पेड़ को गड्ढे के ऊपर रखकर रस्सी और डलिया के सहारे मिट्टी बाहर फेंकी। इस काम में उसकी बहनें और मां-पिता मदद करते। कुएं से निकली मिट्टी से बांस-खपच्ची से बने अपने कच्चे घर को सबने मिलकर लीप-पोतकर रहने लायक बनाया। लगातार खुदाई के 20वें दिन, 35 फुट गहरे गड्ढे में कुदाली की चोट पड़ते ही जमीन से पानी की धार फूट पड़ी।
कच्चे कुएं से आसपास के रहवासियों की बुझने लगी प्यास
उस दिन नसरीन और उसके परिवार की मेहनत का पसीना सार्थक हो गया। उस कच्चे कुएं से न सिर्फ उसके परिवार, बल्कि आसपास के रहवासियों की प्यास बुझने लगी। पहले का कच्चा कुआं अब पक्के कुएं में तब्दील हो चुका है। पहले जिस कुएं से नसरीन रस्सी-बाल्टी से पानी खींचती रही, वहां अब सुरक्षित जाली लगे कुएं में पानी की मोटर भी लगी है। पूरे परिवार की पानी की जरूरत को कुआं पूरा कर रहा है। नसरीन की उपलब्धि पर पूरा परिवार नाज करता है।
गरीब तबके के बच्चों को शिक्षित करने का सपना
नसरीन आज भी गरीब तबके के बच्चों को शिक्षित करने का सपना देखती हैं। नसरीन एक ऐसे मंच की तलाश में हैं, जहां से वह अपने नेक इरादों को साकार कर सकें। पानी की परेशानी दूर करने के लिए कुआं खोदने वाली नसरीन अब शिक्षा के जरिए जरूरतमंद बच्चों के जीवन में बदलाव लाना चाहती हैं।
किताब में दर्ज हुई जज्बे की कहानी
जैसे हर माता-पिता विदाई पर बेटी को उपहार देते हैं, नसरीन ने विदाई से पहले ही अपने बाबुल को जीवनभर का जलस्रोत उपहार में देकर एक नई मिसाल कायम की है। उल्लेखनीय है कि एडिशनल कमिश्नर इंदौर (कमर्शियल टैक्स) एवं लेखिका सपना शिवाले सोलंकी के हाल ही में प्रकाशित नौ कहानियों के संग्रह थोड़ी सी धूप में नसरीन के इसी जज्बे को हारूंगी नहीं शीर्षक से कहानी का रूप दिया गया है। मालूम हो, शिवाले मैडम तत्समय प्रशासनिक अधिकारी के पद पर हरदा में पदस्थ थीं। शिवाले मैडम ने कहा कि वे नसरीन से संपर्क कर उन्हें कहानी संग्रह भेंट करेंगी।




















