ग्वालियर: आवारा कुत्तों का आतंक, 8 महीने में 8 हजार से ज्यादा लोग डॉग बाइट के शिकार

ग्वालियर में बारिश के दौरान आवारा कुत्तों के आक्रामक होने से डॉग बाइट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। जनवरी से 31 अगस्त तक शहर में 8 हजार से ज्यादा लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में रोजाना बड़ी संख्या में लोग एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं।
ग्वालियर: आवारा कुत्तों का आतंक, 8 महीने में 8 हजार से ज्यादा लोग डॉग बाइट के शिकार
ग्वालियर: आवारा कुत्तों का आतंक

ग्वालियर। जनवरी से अगस्त तक हर महीने औसतन एक हजार से ज्यादा डॉग बाइट के मरीज सामने आए हैं। जनवरी से जुलाई के बीच रेबीज से 7 लोगों की मौत भी हो चुकी है, जिनमें 3 ग्वालियर के और 4 अन्य जिलों के मरीज थे। बढ़ते मामलों के बीच नगर निगम के नसबंदी अभियान और आवारा कुत्तों को पकड़ने की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।

बारिश में बढ़ी कुत्तों की आक्रामकता

बारिश के दिनों में ग्वालियर के जलजमाव वाले इलाकों, कचरा प्वाइंट और संकरी गलियों में कुत्तों के झुंड दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान कुत्तों के आक्रामक व्यवहार के कारण डॉग बाइट की घटनाओं में भी बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से 31 अगस्त तक 8 हजार से ज्यादा लोग डॉग बाइट का शिकार हुए हैं और हर महीने औसतन एक हजार से अधिक मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं।

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सरकारी अस्पतालों में रोजाना पहुंच रहे डॉग बाइट के मरीज

शहर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में कुत्ते के काटने के मरीज लगातार पहुंच रहे हैं। 1 हजार बिस्तर वाले अस्पताल में गंभीर मामलों के मरीज आ रहे हैं, जबकि मुरार जिला अस्पताल और हजीरा सिविल अस्पताल में रोजाना करीब 70 से 80 लोग डॉग बाइट की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। बिरला नगर और थाटीपुर चिकित्सालय में भी बारिश के बाद मरीजों की संख्या में करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी बताई गई है।

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रेबीज से 7 लोगों की मौत

डॉग बाइट के बढ़ते मामलों के बीच रेबीज से होने वाली मौतों ने भी चिंता बढ़ा दी है। जनवरी से जुलाई के बीच रेबीज के कारण 7 लोगों की मौत हुई, जिनमें जयारोग्य अस्पताल में इलाज के दौरान ग्वालियर के 3 निवासियों की जान गई। इसके अलावा 4 मृतक दूसरे जिलों से थे, जिनका इलाज ग्वालियर में चल रहा था।

नसबंदी अभियान पर उठ रहे सवाल

जनवरी से अगस्त तक सामने आए आंकड़ों के बाद नगर निगम के एनिमल बर्थ कंट्रोल यानी ABC प्रोग्राम और कुत्ते पकड़ने के अभियान पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि लाखों रुपए का बजट खर्च होने के बावजूद शहर में आवारा कुत्तों की नसबंदी का अभियान प्रभावी तरीके से नहीं चल रहा है। बारिश के दौरान कुत्तों के झुंड बढ़ने से निगम के डॉग कैचर अमले की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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डॉग बाइट के मामले बढ़े  

शहर के जलजमाव वाले क्षेत्रों, कचरा प्वाइंट और संकरी गलियों में बड़ी संख्या में आवारा कुत्ते दिखाई दे रहे हैं। इन जगहों पर लोगों की आवाजाही भी रहती है, जिससे डॉग बाइट का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय स्तर पर श्वान पकड़ने और नसबंदी की कार्रवाई को लेकर लगातार प्रभावी कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

कुत्ते के काटने पर तुरंत करें ये काम

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य काटने या हल्की खरोंच की स्थिति में एंटी-रेबीज वैक्सीन यानी ARV दी जाती है, जबकि गहराई तक काटने, मांस बाहर निकलने या चेहरे और गर्दन के पास काटने को कैटेगरी III बाइट माना जाता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह के अनुसार इम्यूनोग्लोबुलिन यानी RIG दिया जाता है, जो रेडीमेड एंटीबॉडी की तरह काम करता है। डॉक्टरों के मुताबिक कुत्ते के काटने के तुरंत बाद घाव को करीब 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से धोना चाहिए, घाव पर मिर्च, हल्दी या तेल नहीं लगाना चाहिए और बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

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