हरदा में पटवारियों ने सौंपा ज्ञापन, लंबित मांगों पर जताई नाराजगी

हरदा। मध्यप्रदेश पटवारी संघ की लंबित मांगों और विभागीय समस्याओं को लेकर जिले के पटवारियों ने बुधवार को डिप्टी कलेक्टर आशाराम चिरामन को ज्ञापन सौंपा। प्रांतीय उपाध्यक्ष राजीव जैन और जिलाध्यक्ष विकास जोशी के नेतृत्व में पहुंचे पटवारियों ने शासन की ओर से पहले दिए गए आश्वासनों के बावजूद मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई। संघ ने सरकार से लंबित मांगों का जल्द निराकरण करने के साथ मैदानी स्तर पर काम कर रहे पटवारियों को तकनीकी समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराकर की जा रही दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की।
आश्वासन के बाद स्थगित की थी हड़ताल
पटवारी संघ के मुताबिक आंदोलन स्थगित करने से पहले 6 अगस्त 2026 को भोपाल के पीआरसी भवन में बैठक हुई थी। इसमें प्रदेश के जिलाध्यक्षों और प्रदेश पदाधिकारियों के सामने शासन की ओर से कई मांगों पर कार्रवाई का भरोसा दिया गया था। संघ के अनुसार इसमें कैडर रिव्यू कमेटी के गठन, पटवारी संघ के पदाधिकारियों के नीति विरुद्ध किए गए स्थानांतरण निरस्त करने संबंधी आदेश जारी करने और फसल गिरदावरी समेत अन्य विभागीय समस्याओं के समाधान का आश्वासन शामिल था। मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारियों से चर्चा तथा शासन के भरोसे के बाद पटवारियों ने किसान हित और जनविश्वास अभियान को ध्यान में रखते हुए अपनी हड़ताल तीन महीने के लिए स्थगित कर दी थी। लेकिन तय अवधि में मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से पटवारियों में नाराजगी बढ़ रही है।
फार्मर आईडी की तकनीकी खामियों का मुद्दा
ज्ञापन में पटवारियों ने फार्मर आईडी से जुड़े काम में आ रही परेशानियों को भी प्रमुखता से उठाया। संघ का कहना है कि इस प्रक्रिया में गलत खसरे हटाने, सॉफ्टवेयर की तकनीकी खामियों और सर्वर के ठीक से काम नहीं करने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। पटवारियों के मुताबिक राज्य स्तर पर इन तकनीकी दिक्कतों का स्थायी समाधान नहीं होने के बावजूद कई जिलों में मैदानी कर्मचारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है। संघ ने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि तकनीकी खामी का खामियाजा पटवारियों को भुगतना पड़ रहा है। पहले तकनीकी और व्यवहारिक समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए और उसके बाद ही काम की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
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फसल गिरदावरी में जियो टैग की अनिवार्यता हटाने की मांग
पटवारी संघ ने खरीफ फसल गिरदावरी को लेकर भी अपनी मांग रखी। संघ के अनुसार, फिलहाल कई जगह फसल गिरदावरी का काम लोकल यूथ के माध्यम से कराया जा रहा है। लेकिन कुछ गांवों में लोकल यूथ की नियुक्ति नहीं होने या उनके द्वारा काम नहीं किए जाने के कारण यह जिम्मेदारी दोबारा पटवारियों पर आ रही है। संघ ने कहा कि यदि पटवारी स्तर पर फसल गिरदावरी कराई जाती है तो इसमें जियो टैग की अनिवार्यता समाप्त की जाए। पटवारियों का कहना है कि जियो टैग से जुड़ी तकनीकी और मैदानी परेशानियों के कारण काम करने में दिक्कत आती है। संघ के मुताबिक इस मुद्दे पर पहले भी कई बार पत्राचार किया जा चुका है और भोपाल में हुई बैठक में भी समाधान को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी निराकरण नहीं हुआ है।
इन मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
पटवारी संघ ने ज्ञापन के जरिए शासन के सामने प्रमुख रूप से ये मांगें रखीं-
- हड़ताल अवधि के वेतन का भुगतान किया जाए।
- कैडर रिव्यू कमेटी के गठन का आदेश जारी किया जाए।
- पटवारी संघ के पदाधिकारियों के नीति विरुद्ध स्थानांतरण निरस्त किए जाएं।
- फार्मर आईडी से जुड़ी तकनीकी समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाए।
- पटवारी स्तर पर कराई जाने वाली फसल गिरदावरी से जियो टैग की अनिवार्यता हटाई जाए।
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मांगें नहीं मानी तो प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
पटवारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया तो प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। संघ ने कहा कि मांगों के निराकरण की जिम्मेदारी अब शासन की होगी और आंदोलन की स्थिति बनने पर इसके लिए सरकार पूरी तरह जिम्मेदार रहेगी।




















