ग्वालियर में डॉक्टर से 50 लाख की साइबर ठगी; बीआर नोवा ऐप से कराया निवेश, मोटे मुनाफे का दिया था लालच

ग्वालियर। मामला सिरोल थाना क्षेत्र के सनवैली का है, जहां 51 वर्षीय डॉक्टर रहते हैं और गोविंदपुरी चौराहे पर श्री गंगा क्लीनिक संचालित करते हैं। 29 जुलाई से 7 अगस्त के बीच डॉक्टर के विभिन्न खातों से कुल 50 लाख 12 हजार 196 रुपये ट्रांसफर कराए गए। इनमें 49 लाख 82 हजार 196 रुपये आईएमपीएस, एनईएफटी और आरटीजीएस से, जबकि 30 हजार रुपये यूपीआई के जरिए जमा कराए गए।
व्हाट्सऐप से संपर्क कर ट्रेडिंग का दिया झांसा
साइबर ठगों ने डॉक्टर से 29 जुलाई को व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क किया और ट्रेडिंग में निवेश करने पर अच्छा मुनाफा होने की बात कही। इसके बाद उन्हें एक कथित एलिट वीआईपी ग्रुप में जोड़ दिया गया। ग्रुप में निवेश और मुनाफे को लेकर भरोसा दिलाते हुए डॉक्टर को बीआर नोवा ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा गया। इसके बाद आरोपियों ने अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करने के निर्देश दिए और डॉक्टर उनके झांसे में आते गए।
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दस दिन में 50 लाख से ज्यादा की रकम ट्रांसफर
पुलिस के अनुसार, 29 जुलाई से 7 अगस्त के बीच डॉक्टर के विभिन्न खातों से कुल 50 लाख 12 हजार 196 रुपये ट्रांसफर किए गए। इनमें 49 लाख 82 हजार 196 रुपये आईएमपीएस, एनईएफटी और आरटीजीएस के माध्यम से भेजे गए, जबकि 30 हजार रुपये यूपीआई के जरिए जमा कराए गए। डॉक्टर लगातार रकम भेजते रहे, क्योंकि उन्हें ऐप के जरिए निवेश पर अच्छा मुनाफा मिलने का भरोसा दिलाया जा रहा था। करीब दस दिन बाद जब उन्होंने अपनी रकम वापस लेने की कोशिश की, तब ठगी का शक हुआ।
रकम वापस मांगी तो 35 प्रतिशत और मांगे
डॉक्टर ने जब अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपियों ने रकम लौटाने के बजाय मुनाफे के नाम पर 25 प्रतिशत और एप्लीकेशन इस्तेमाल करने के नाम पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त रकम की मांग की। यानी रकम वापस लेने के लिए डॉक्टर से कुल 35 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान करने को कहा गया। इस मांग के बाद डॉक्टर को ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने साइबर हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत की। इसके बाद सिरोल थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
दो ई-एफआईआर के बाद एक मामला दर्ज
ठगी का अहसास होने के बाद साइबर सेल में दो अलग-अलग ई-जीरो एफआईआर दर्ज कराई गई थीं। दोनों मामलों में बीआर नोवा ऐप के जरिए हुई ठगी की रकम समान होने के बाद डॉक्टर ने 14 अगस्त को सिरोल थाने पहुंचकर दोनों एफआईआर को मर्ज कर एक प्रकरण दर्ज करने और जांच की मांग की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और अन्य माध्यमों की पड़ताल की जा रही है।
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ऐसे फंसाया डॉक्टर को साइबर ठगों ने
साइबर ठगों ने पहले व्हाट्सऐप के जरिए डॉक्टर से संपर्क किया और ट्रेडिंग में अच्छा मुनाफा होने का झांसा दिया। इसके बाद उन्हें फर्जी वीआईपी ट्रेडिंग ग्रुप में जोड़ा गया और बीआर नोवा ऐप डाउनलोड कराया गया। सिरोल थाना प्रभारी गोविंद बंगौली ने बताया कि ऑनलाइन कम्प्लेंट के बाद एफआईआर दर्ज की गई है और मामले की पड़ताल जारी है।













