नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होने जा रहा है। इस चरण की शुरुआत से पहले ही राजनीतिक माहौल गरम हो गया है। संभावना जताई जा रही है कि, सत्र के पहले ही दिन लोकसभा में जोरदार हंगामा देखने को मिल सकता है। दरअसल, विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव का नोटिस दिया है और इस प्रस्ताव पर चर्चा सोमवार को ही हो सकती है।
लोकसभा सचिवालय की ओर से 9 मार्च के लिए जारी कार्यसूची के अनुसार उस दिन प्रश्नकाल के अलावा मुख्य रूप से इसी प्रस्ताव पर चर्चा की कार्यवाही रखी गई है। यही वजह है कि, सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने सांसदों को सदन में मौजूद रहने के निर्देश दे चुके हैं।
संसद का बजट सत्र दो चरणों में आयोजित किया जाता है। पहला चरण पहले ही समाप्त हो चुका है, जबकि दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान कुल 17 बैठकों का कार्यक्रम तय किया गया है।
सत्र के कार्यक्रम के मुताबिक,
हालांकि, सत्र की शुरुआत ही स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक टकराव के साथ होने की संभावना है।
विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव का नोटिस दिया है। इस प्रस्ताव पर कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, इस प्रस्ताव में तृणमूल कांग्रेस के 29 सांसदों ने हस्ताक्षर नहीं किए, जिससे विपक्ष की एकजुटता पर सवाल भी उठ रहे हैं।
प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि, लोकसभा स्पीकर ने सदन की कार्यवाही चलाने में निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर सत्ता पक्ष के प्रति झुकाव दिखाया। विपक्ष का कहना है कि, उन्हें सदन में बोलने के पर्याप्त अवसर नहीं दिए गए और उनकी बातों को कई बार रिकॉर्ड से हटाया गया।
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लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी कार्यसूची के मुताबिक, 9 मार्च को प्रश्नकाल के बाद इस प्रस्ताव पर चर्चा की जा सकती है। प्रस्ताव को कांग्रेस सांसद मो. जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि सदन में पेश करेंगे। यदि यह प्रस्ताव सदन में लिया जाता है तो उस पर चर्चा होगी और बाद में मतदान कराया जाएगा।
नियमों के अनुसार, जब स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा होती है तो उस समय स्पीकर स्वयं सदन की अध्यक्षता नहीं करते। सदन की कार्यवाही किसी अन्य सदस्य द्वारा संचालित की जाती है। हालांकि, स्पीकर को अपने पक्ष में बोलने और मतदान करने का अधिकार होता है।
संविधान और लोकसभा के नियमों के अनुसार, स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव साधारण बहुमत से पारित होता है। लेकिन मौजूदा लोकसभा की संख्या को देखते हुए इस प्रस्ताव का पारित होना मुश्किल माना जा रहा है। वर्तमान में एनडीए के पास लगभग 290 से अधिक सांसदों का समर्थन है, जबकि विपक्ष के पास संख्या कम है। एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत है, इसलिए प्रस्ताव के पास होने की संभावना काफी कम मानी जा रही है।
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गठबंधन |
अनुमानित सांसद |
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एनडीए |
290 से ज्यादा |
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विपक्ष |
लगभग 230 |
स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव को देखते हुए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही सतर्क हो गए हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने सांसदों के लिए 3-लाइन व्हिप जारी किया है, जिसमें उन्हें 9 से 11 मार्च तक सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
कांग्रेस ने अपने सांसदों से कहा है कि, वे इन दिनों संसद में मौजूद रहें क्योंकि स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। वहीं भाजपा ने भी अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है, ताकि किसी भी स्थिति में पार्टी की संख्या पूरी बनी रहे।
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विपक्ष द्वारा दिए गए प्रस्ताव में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर कई आरोप लगाए गए हैं। प्रस्ताव में कहा गया है कि स्पीकर के कुछ फैसलों के कारण सदन के सुचारु संचालन को खतरा पैदा हुआ है। विपक्ष का आरोप है कि विवादित मुद्दों पर स्पीकर अक्सर सत्तापक्ष के सांसदों का पक्ष लेते हैं।
इसके अलावा यह भी कहा गया है कि, स्पीकर विपक्ष के अधिकारों की रक्षा नहीं कर पाए हैं और उन्होंने कई बार गैर-पक्षपाती रवैया नहीं अपनाया। विपक्ष का कहना है कि, स्पीकर का पद पूरी तरह निष्पक्ष होना चाहिए और उन्हें सभी पक्षों का विश्वास हासिल करना चाहिए, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा नहीं हो रहा है।
बजट सत्र का पहला चरण भी काफी हंगामेदार रहा था। कई दिनों तक सदन की कार्यवाही ठीक से नहीं चल पाई और बार-बार स्थगित करनी पड़ी।
12 फरवरी: राहुल गांधी की सदस्यता खत्म करने का नोटिस
बजट सत्र के दौरान भाजपा के एक सांसद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता खत्म करने के लिए नोटिस दिया था। यह नोटिस राहुल गांधी के एक भाषण को लेकर दिया गया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने इस मामले में विशेषाधिकार हनन का नोटिस लाने का फैसला नहीं किया। इस पर प्रियंका गांधी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छाती 56 इंच की बताई जाती है तो उनके खिलाफ भी प्रस्ताव आना चाहिए। हालांकि, भाजपा अब भी राहुल गांधी के भाषण से कुछ हिस्से हटाने की मांग पर अड़ी हुई है।
11 फरवरी: राहुल गांधी का अडाणी और एपस्टीन फाइल्स पर बयान
लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने अमेरिका में उद्योगपति गौतम अडाणी से जुड़े केस का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि अडाणी पर चल रहा केस दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दबाव बनाने का तरीका है। इसके अलावा उन्होंने एपस्टीन फाइल्स का भी जिक्र किया था।
इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जवाब देते हुए तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी के जीएसटी से जुड़े आरोपों का खंडन किया था। उन्होंने कहा था कि कुछ लोग गलत जानकारी फैला रहे हैं।
10 फरवरी: स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस
बजट सत्र के दौरान 10 फरवरी को विपक्ष ने औपचारिक रूप से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था।
इस नोटिस पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर थे। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार उस समय यह भी चर्चा थी कि प्रस्ताव गिरने के बाद ही स्पीकर दोबारा सदन की अध्यक्षता करेंगे।
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9 फरवरी: लोकसभा केवल 13 मिनट चली
बजट सत्र के दौरान 9 फरवरी को लोकसभा की कार्यवाही केवल 13 मिनट ही चल पाई थी। विपक्ष लगातार यह मांग कर रहा था कि राहुल गांधी को सदन में बोलने दिया जाए। राहुल गांधी ने कहा था कि स्पीकर ने उन्हें पहले बोलने का आश्वासन दिया था, लेकिन उन्हें मौका नहीं दिया गया।
6 फरवरी: केंद्रीय मंत्री बिट्टू का राहुल गांधी पर तंज
लोकसभा में लगातार हंगामे के बीच केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा था कि अगर राहुल प्रधानमंत्री की पाठशाला में चले जाएं तो उन्हें जीवन में सफलता मिल सकती है। उनका यह बयान उस समय आया था जब सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक टिप्पणी को लेकर चर्चा हो रही थी।
5 फरवरी: लोकसभा में पीएम के भाषण के बिना धन्यवाद प्रस्ताव पास
बजट सत्र के सातवें दिन लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव हंगामे के बीच पारित हो गया। 2004 के बाद यह पहली बार हुआ जब यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री के भाषण के बिना ही पास हो गया। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में करीब 97 मिनट तक भाषण दिया था।
4 फरवरी: स्पीकर के कार्यालय में बहस
4 फरवरी को लोकसभा स्पीकर के कार्यालय में भाजपा और विपक्षी सांसदों के बीच तीखी बहस हुई थी। इस दौरान भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने गांधी परिवार और कांग्रेस से जुड़ी कुछ किताबें और दस्तावेज दिखाए थे, जिनमें उन्होंने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए थे।
3 फरवरी: राहुल गांधी बोले- मैं विपक्ष का नेता हूं
3 फरवरी को लोकसभा में राहुल गांधी ने कहा था कि वह विपक्ष के नेता हैं, लेकिन उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने एक आर्टिकल को टेबल करते हुए कहा था कि वह अपने दावों को प्रमाणित करने के लिए इसे पेश कर रहे हैं। लेकिन जैसे ही उन्होंने भाषण शुरू किया, सदन में हंगामा शुरू हो गया।
2 फरवरी: चीन के टैंकों का मुद्दा
2 फरवरी को लोकसभा में राहुल गांधी ने लद्दाख सीमा के पास चीनी टैंकों की मौजूदगी का मुद्दा उठाया था। उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की एक अप्रकाशित किताब का हवाला दिया था। इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने आपत्ति जताई थी।
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1 फरवरी: बजट पेश
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में 2026-27 का बजट पेश किया था। अपने करीब 85 मिनट के भाषण में उन्होंने कई योजनाओं का जिक्र किया। हालांकि, विपक्ष ने आरोप लगाया कि बजट में आम लोगों के लिए कोई बड़ा ऐलान नहीं किया गया।
बजट की मुख्य बातें
29 जनवरी: आर्थिक सर्वे पेश
बजट सत्र से पहले संसद में आर्थिक सर्वे पेश किया गया था। इसमें अनुमान लगाया गया कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस समय कहा था कि उनकी सरकार की पहचान रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म है।
28 जनवरी: राष्ट्रपति का अभिभाषण
बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से हुई थी। उन्होंने अपने भाषण में ऑपरेशन सिंदूर, देश की आर्थिक स्थिति और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका जैसे मुद्दों का जिक्र किया था।