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PU Special :भोपाल में एक ही दिन तीन दंपतियों के विवाद सुलझे, डालसा में 7 महीने में 91 मामले कोर्ट जाने से पहले निपटे

भोपाल डालसा की प्री-लिटिगेशन मीडिएशन से 7 महीने में 91 मामले कोर्ट जाने से पहले सुलझे। शनिवार को पत्नी के काम करने और परिवार के हस्तक्षेप से जुड़े तीन वैवाहिक विवादों में समझौता कराया गया।
भोपाल में एक ही दिन तीन दंपतियों के विवाद सुलझे, डालसा में 7 महीने में 91 मामले कोर्ट जाने से पहले निपटे
एक ही दिन तीन दंपतियों के विवाद सुलझे

पल्लवी वाघेला, भोपाल। पारिवारिक विवादों को अदालत तक पहुंचने से पहले बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिशों के सकारात्मक नतीजे सामने आ रहे हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण यानी डालसा में चल रही प्री-लिटिगेशन मीडिएशन प्रक्रिया के जरिए भोपाल में पिछले सात महीनों में 91 मामलों का समाधान किया जा चुका है। इनमें पारिवारिक विवादों के अलावा दूसरे मामले भी शामिल हैं। इसी कड़ी में शनिवार को एक ही दिन में तीन पारिवारिक विवादों में समझौता कराया गया। तीनों मामलों में पति-पत्नी के बीच लिखित समझौता हुआ और दोनों ने आपसी राजीनामे के बाद साथ रहने पर सहमति जताई। इन मामलों में कहीं पत्नी का घर से बाहर जाकर काम करना विवाद की वजह बना, तो कहीं पति-पत्नी के रिश्ते में दोनों परिवारों का बढ़ता हस्तक्षेप तनाव का कारण था।

पत्नी के नौकरी करने पर पति को थी आपत्ति

पहले मामले में दानापानी रोड निवासी दंपति के बीच विवाद चल रहा था। दोनों की शादी को करीब 12 साल हो चुके हैं और उनके 11 तथा 6 वर्ष के दो बच्चे हैं। पत्नी की ओर से शिकायत में कहा गया कि वह परिवार की जरूरतों और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए घर से बाहर काम करती है, लेकिन पति को उसका काम करना पसंद नहीं है। पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि पति शराब का अधिक सेवन करता है और अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा शराब पर खर्च कर देता है। ऐसे में परिवार का खर्च संभालने के लिए उसका काम करना जरूरी है। दूसरी ओर पति का कहना था कि पत्नी बिना बताए काम के लिए घर से निकल जाती है। उसका आरोप था कि काम के अलावा वह मायके या दूसरी जगह भी चली जाती है और इसकी जानकारी उसे नहीं दी जाती। इसी बात को लेकर दोनों के बीच लगातार विवाद होता था।

समझौते में पति-पत्नी ने तय की अपनी-अपनी जिम्मेदारियां

मीडिएशन के दौरान दोनों पक्षों से बातचीत की गई और एक-दूसरे की समस्याओं को समझने का प्रयास किया गया। आखिरकार दंपति कुछ शर्तों पर समझौते के लिए तैयार हुए। पति ने घर की जिम्मेदारी निभाने और अपनी कमाई को शराब पर बर्बाद नहीं करने की बात स्वीकार की। वहीं पत्नी ने भी सहमति दी कि काम के अलावा कहीं जाना होने पर वह पति को इसकी जानकारी देगी और घर में आपसी सामंजस्य बनाए रखने की कोशिश करेगी। लिखित समझौते के बाद दोनों ने राजीनामा कर लिया।

दो अन्य मामलों में परिवार का हस्तक्षेप बना विवाद की वजह

शनिवार को सुलझाए गए दो अन्य मामलों में भी पति-पत्नी के बीच विवाद की वजह आपसी रिश्तों से ज्यादा परिवार का हस्तक्षेप था। एक मामले में पत्नी के मायके वालों का दखल विवाद का कारण बना हुआ था जबकि दूसरे मामले में पति के परिवार की लगातार रोक-टोक से दंपति के बीच तनाव बढ़ रहा था। दोनों दंपतियों के छोटे बच्चे हैं। मीडिएशन के दौरान बच्चों के भविष्य और उन पर पड़ने वाले पारिवारिक विवाद के असर को लेकर पति-पत्नी से बातचीत की गई। इसके बाद दोनों दंपति सुलह के लिए तैयार हो गए।

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परिवारों को भी बुलाकर समझाइश दी गई

इन दोनों मामलों में केवल पति-पत्नी की काउंसलिंग तक बात सीमित नहीं रही। दोनों पक्षों के परिवारों को भी बुलाया गया और उन्हें समझाया गया कि घरेलू जीवन में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप पति-पत्नी के रिश्ते में तनाव और टकराव की वजह बन सकता है। मीडिएशन के दौरान परिवारों को सलाह दी गई कि वे दंपति को अपने स्तर पर समझदारी से समस्याएं सुलझाने का अवसर दें और हर छोटे-बड़े मामले में हस्तक्षेप से बचें। समझाइश और बातचीत के बाद दोनों मामलों में पति-पत्नी ने आपसी मतभेद खत्म किए और साथ घर लौटे।

सात महीने में 91 मामले कोर्ट जाने से पहले सुलझे

डालसा में शुरू की गई प्री-लिटिगेशन मीडिएशन सुविधा का उद्देश्य विवादों को अदालत में मुकदमा बनने से पहले ही बातचीत और मध्यस्थता के जरिए हल करना है। भोपाल में पिछले सात महीनों के दौरान इस प्रक्रिया से 91 मामले सुलझाए जा चुके हैं। इसमें पारिवारिक विवादों के अलावा अन्य तरह के मामले भी शामिल हैं। व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचाने के साथ-साथ अदालत और पुलिस व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव कम करना भी है।

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समय और पैसे दोनों की बचत

डालसा भोपाल के सचिव सुनीत अग्रवाल ने कहा कि प्रयास रहता है कि आपसी मतभेदों को बातचीत के जरिए खत्म किया जाए। इससे लोगों के समय और पैसे दोनों की बचत होती है। साथ ही परिवार टूटने से बच सकते हैं और न्यायालय पर भी अनावश्यक मुकदमों का बोझ कम होता है। प्री-लिटिगेशन मीडिएशन के जरिए विवादों को समझौते के स्तर पर सुलझाने से दोनों पक्षों को अपनी बात रखने और आपसी सहमति से समाधान तक पहुंचने का मौका मिलता है।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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