कटनी:कागजों पर दौड़ रहा ‘जल जीवन मिशन’, अरबों खर्च फिर भी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण

अजय शर्मा, कटनी। हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू किया गया ‘जल जीवन मिशन’ कटनी जिले में जमीनी स्तर पर दम तोड़ता नजर आ रहा है। सरकारी फाइलों में योजनाएं पूरी दिखाई जा रही हैं लेकिन गांवों की हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। कहीं नल सूखे पड़े हैं, कहीं पानी की टंकियां अधूरी खड़ी हैं तो कहीं पाइपलाइन बिछने के बाद भी सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है। भीषण गर्मी में ग्रामीण रातभर हैंडपंपों के पास जागकर पानी भरने को मजबूर हैं। वर्ष 2020 में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य तीन साल के भीतर हर ग्रामीण परिवार तक नल से जल पहुंचाना था। जिले के 893 गांवों में से 687 गांवों में एकल ग्राम नलजल योजनाएं स्वीकृत की गईं जबकि 185 गांवों को जल निगम परियोजना में शामिल किया गया। विभागीय रिकॉर्ड में 681 योजनाएं दर्ज हैं लेकिन इनमें से 165 योजनाएं आज भी अधूरी पड़ी हैं। इसका असर यह है कि जिले के 2.12 लाख परिवारों में से 19 हजार से ज्यादा परिवार अब भी नल कनेक्शन का इंतजार कर रहे हैं।
गर्मी बढ़ी तो खुल गई विभागीय दावों की पोल
गर्मी की शुरुआत होते ही लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के दावों की हकीकत सामने आने लगी। कई गांवों में पानी की सप्लाई बंद है जबकि कुछ जगहों पर लो-प्रेशर और सीमित समय की वजह से लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग सिर्फ बैठकों और समीक्षा तक सीमित है जबकि गांवों की समस्याओं पर गंभीरता से काम नहीं हो रहा।
ठेकेदारों की लापरवाही और अफसरों की सुस्ती
योजना की धीमी रफ्तार के पीछे ठेकेदारों की लापरवाही और विभागीय निगरानी की कमी को बड़ी वजह माना जा रहा है। जिले में करीब 80 ठेकेदार काम कर रहे हैं। कई एजेंसियों ने क्षमता से ज्यादा काम ले लिया लेकिन समय पर पूरा नहीं कर पाईं। गुणवत्ता और काम की गति पर सवाल उठने के बाद विभाग ने शिवम इंजीनियरिंग और एनपीएस कंस्ट्रक्शन का अनुबंध निरस्त कर दिया है। वहीं नेटलिंक, अध्या कंस्ट्रक्शन और आरएन कंस्ट्रक्शन जैसी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव भेजा गया है।
आंकड़ों में योजना की हकीकत
- जिले के 681 गांवों में योजना स्वीकृत
- सिर्फ 516 गांवों में मूल काम पूरा
- 374 योजनाएं पंचायतों को हस्तांतरित
- 165 योजनाएं अब भी अधूरी
- 75 से ज्यादा गांव बिजली संकट से प्रभावित
- 77 गांवों में लो-फोर्स और टाइमिंग की समस्या
- 26 योजनाओं पर काम शुरू तक नहीं
- जिले में 593 हैंडपंप बंद या अनुपयोगी
बसेहड़ी गांव: पानी के लिए रातभर जाग रहे लोग
बहोरीबंद क्षेत्र के आदिवासी बाहुल्य बसेहड़ी गांव में योजना लगभग ठप पड़ी है। ग्राम पंचायत बिजली बिल तक जमा कर चुकी है फिर भी 15 दिन पानी आता है और 15 दिन सप्लाई बंद रहती है। ग्रामीण रज्जन सिंह और सुनीता बाई ने बताया कि लोगों को रातभर हैंडपंपों पर जागकर पानी भरना पड़ रहा है।

शुक्ल पिपरिया: दो साल से अधूरी पड़ी पानी टंकी
ढीमरखेड़ा क्षेत्र के शुक्ल पिपरिया गांव में दो साल पहले पानी टंकी का निर्माण शुरू हुआ था लेकिन आज तक सिर्फ चार पिलर ही खड़े हो सके हैं। गांव के 17 हैंडपंपों में से 10 खराब पड़े हैं। जो पानी मिल रहा है वह भी गंदा और मटमैला है। ग्रामीण राजेश पटेल और संतोष तिवारी ने बताया कि गर्मी में स्थिति बेहद खराब हो गई है और कोई सुनवाई नहीं हो रही।
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डूंगरिया गांव: टंकी बनी, पानी नहीं पहुंचा
बहोरीबंद के पूर्ण आदिवासी गांव डूंगरिया में एक साल पहले पानी की टंकी और पाइपलाइन तैयार कर दी गई थी लेकिन योजना अब तक शुरू नहीं हुई। करीब 600 आबादी वाले इस गांव के लोग आज भी एक किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं। ग्रामीण संतलाल कोल और जयराम सिंह ने बताया कि गांव में पानी का गंभीर संकट बना हुआ है।
सीएम हेल्पलाइन में शिकायतों का अंबार
योजना की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में पानी संकट से जुड़ी 500 से ज्यादा शिकायतें सीएम हेल्पलाइन में लंबित हैं। इनमें 224 शिकायतें ऐसी हैं जहां काम पूरा होने के बावजूद पानी नहीं मिल रहा जबकि 289 शिकायतें खराब हैंडपंपों की मरम्मत से जुड़ी हैं।
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पीएचई विभाग का दावा
पीएचई के कार्यपालन यंत्री पवनसुत गुप्ता का कहना है कि जिले में वर्ष 2020 से 2023 के बीच चरणबद्ध तरीके से योजनाओं को मंजूरी मिली थी। 681 में से 516 गांवों में काम पूरा हो चुका है और 374 योजनाएं पंचायतों को सौंप दी गई हैं। उन्होंने बताया कि समय पर काम पूरा नहीं करने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई की जा रही है। गर्मी में जल संकट से निपटने के लिए 78 बसाहटों में राइजर पाइप बढ़ाने और 7 नए नलकूपों के खनन का काम शुरू किया गया है।












