फलों में रंग के खतरे :कपड़े और चमड़ा रंगने वाले केमिकल फलों को बना रहे ‘जहरीला’

भोपाल में सड़क किनारे मैंगो जूस पीने से चार लोग हुए बीमार हो गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसी तरह कुछ दिन पहले तरबूज खाने से कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ गई। श्योपुर में भी तरबूज खाने के बाद पिता-पुत्र की तबीयत बिगड़ गई थी, जिसमें पिता की मौत हो चुकी है। ऐसे में फलों में खतरनाक केमिकल्स की मिलावट को लेकर चिंता बढ़ गई है।
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कपड़े और चमड़ा रंगने वाले केमिकल फलों को बना रहे ‘जहरीला’

प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। गर्मी के मौसम में तरबूज, आम, खरबूज, पपीता और अंगूर जैसे फल लोगों की पहली पसंद बन जाते हैं, लेकिन अब यही फल लोगों की सेहत पर भारी पड़ते दिखाई दे रहे हैं। मुंबई में संदिग्ध फूड पॉइजनिंग से एक परिवार के चार लोगों की मौत के बाद फलों में मिल रहे खतरनाक केमिकल्स को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी बीच भोपाल में सड़क किनारे बिक रहे मैंगो जूस का सेवन करने के बाद कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

केमिकल से पकाए जा रहे हैं फल 

डॉक्टरों का कहना है कि बाजार में कई फल कैल्शियम कार्बाइड, एथिलीन स्प्रे और कृत्रिम रंगों की मदद से जल्दी पकाए और चमकदार बनाए जा रहे हैं। खुले में कटे फल और जूस में बैक्टीरिया संक्रमण का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने और फल खरीदते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि कृत्रिम तरीके से पकाए गए फल अंदर से पूरी तरह प्राकृतिक नहीं होते और उनमें मौजूद रसायन शरीर पर गंभीर असर डाल सकते हैं। सबसे ज्यादा खतरा बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को रहता है।

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फूड पॉइजनिंग से लेकर कैंसर तक का खतरा

किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय गुप्ता बताते हैं कि फलों को रंगने के लिए रॉडामाइन-बी और मेलाकाइट ग्रीन जैसे केमिकल का उपयोग किया जाता है। इनका उपयोग कपड़ा, कागज और चमड़ा उद्योग में बड़े पैमाने पर रंगने के लिए किया जाता है। इसके खाने से त्वरित स्तर पर उल्टी और घबराहट जैसी दिक्कते हो सकती है। वहीं लंबे समय तक उपयोग से पेट, किडनी, हार्ट को गंभीर नुकसान हो सकता है।

इन केमिकल का होता है उपयोग

कैल्शियम कार्बाइड-आम और केले को जल्दी पकाने के लिए, इससे सिरदर्द, उल्टी और नर्वस सिस्टम पर असर हो सकता है।

एथिलीन स्प्रे- फलों को तेजी से पकाने के लिए, गलत उपयोग से पाचन संबंधी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

रॉडामाइन-बी कलर-तरबूज और फलों को ज्यादा लाल दिखाने के लिए, इससे एलर्जी और पेट संक्रमण हो सकता है।

मेलाकाइट ग्रीन-फलों को चमकदार हरा दिखाने के लिए, यह लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।

आर्टिफिशियल वैक्स कोटिंग-सेब और अंगूर को चमकदार बनाने के लिए, खराब वैक्स पेट के लिए हानिकारक हो सकता है।

सोडियम बेंजोएट-जूस और कटे फलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए, ज्यादा मात्रा में एलर्जी और एसिडिटी बढ़ा सकता है।

सिंथेटिक स्वीटनर/सैकरीन- जूस में कृत्रिम मिठास बढ़ाने के लिए, इससे मेटाबॉलिज्म और शुगर लेवल प्रभावित हो सकता है।

दूषित पानी और बर्फ-जूस और कटे फलों में उपयोग होने पर फूड पॉइजनिंग और डायरिया का खतरा बढ़ जाता है।

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कैसे पहचानें केमिकल वाले फल?

  • बहुत ज्यादा चमकीले और एक समान रंग वाले फल संदिग्ध हो सकते हैं।
  • आम या पपीते पर असामान्य पीले धब्बे दिखें तो सावधान रहें।
  • तरबूज अंदर से बहुत गहरा लाल और स्पंजी लगे तो न खरीदें।
  • फल से प्राकृतिक खुशबू न आए तो वह कृत्रिम तरीके से पकाया गया हो सकता है।
  • कटे हुए फल या लंबे समय से खुले रखे जूस से बचें।

विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए

बच्चों में ऐसे संक्रमण तेजी से गंभीर हो सकते हैं। कई बार फूड पॉइजनिंग सीधे आंतों और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर असर डालती है। अभिभावकों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।

डॉ. राजेश टिक्कस, बाल रोग विशेषज्ञ

पेट में संक्रमण, फूड पॉइजनिंग की शिकायतें बढ़ीं

हमारे पास नियमित ऐसे मरीज आते हैं जिनमें फूड पॉइजनिंग, पेट में सूजन और संक्रमण की समस्या मिल रही है। लंबे समय तक उपयोग से इनसे उल्टी से लेकर लिवर और किडनी को भी नुकसान तक हो सकता है।

डॉ. प्रणव रघुवंशी, गेस्ट्रो मेडिसिन विशेषज्ञ

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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