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EV Charging:‘वन नेशन-वन पेमेंट’ सिस्टम नहीं, हर कंपनी का अलग ई-वॉलेट बना परेशानी

ईवी चार्जिंग के दौरान भुगतान करना उपभोक्ताओं के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है क्योंकि ‘वन नेशन-वन पेमेंट’ सिस्टम लागू नहीं है। हर चार्जिंग कंपनी का अलग ई-वॉलेट रखना पड़ रहा है जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
‘वन नेशन-वन पेमेंट’ सिस्टम नहीं, हर कंपनी का अलग ई-वॉलेट बना परेशानी
AI Generated Image

मध्य प्रदेश समेत देशभर में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) उपभोक्ताओं के लिए चार्जिंग पेमेंट सिस्टम बड़ी परेशानी बनता जा रहा है। ईवी चार्जिंग के लिए अब तक कोई एक समान पेमेंट सिस्टम लागू नहीं हो पाया है। ऐसे में अलग-अलग कंपनियों के चार्जिंग स्टेशनों पर अलग-अलग ई-वॉलेट से भुगतान करना पड़ रहा है।

प्रदेश में 1795 चार्जिंग स्टेशन, लेकिन पेमेंट सिस्टम अलग-अलग

मध्य प्रदेश में फिलहाल 1795 ईवी चार्जिंग स्टेशन संचालित हो रहे हैं। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन जैसे बड़े शहरों में टाटा, अडाणी, जियो समेत कई कंपनियों ने चार्जिंग स्टेशन लगाए हैं लेकिन सभी कंपनियों की भुगतान व्यवस्था अलग है। इस वजह से ईवी उपभोक्ताओं को हर कंपनी का अलग ई-वॉलेट बनाना पड़ रहा है।

हर वॉलेट में रखना पड़ता है मिनिमम बैलेंस

उपभोक्ताओं का कहना है कि ज्यादातर कंपनियां चार्जिंग के लिए अपने ई-वॉलेट का इस्तेमाल अनिवार्य कर रही हैं। इतना ही नहीं हर वॉलेट में कम से कम ₹200 बैलेंस रखना जरूरी होता है। यदि किसी व्यक्ति को अलग-अलग कंपनियों के चार्जिंग स्टेशन इस्तेमाल करने हों, तो उसे कई वॉलेट में अलग-अलग पैसा रखना पड़ता है।

RBI से मान्यता नहीं, फिर भी ई-वॉलेट से भुगतान

सबसे बड़ी बात यह है कि इन ई-वॉलेट्स को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मान्यता भी नहीं मिली है। इसके बावजूद चार्जिंग स्टेशन संचालक इन्हीं माध्यमों से भुगतान ले रहे हैं।

चार्जिंग दरों में भी भारी अंतर

प्रदेश में ईवी चार्जिंग के लिए कोई एक समान टैरिफ भी तय नहीं है। कहीं उपभोक्ताओं से ₹20 प्रति यूनिट तो कहीं ₹25 प्रति यूनिट तक वसूले जा रहे हैं। ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी के मुताबिक फास्ट चार्जिंग के लिए बिजली, लैंड लीज और GST मिलाकर शुल्क तय होता है। सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक चार्जिंग कराने पर 20% छूट मिलती है जबकि उसके बाद 20% सरचार्ज लिया जाता है।

बड़े शहरों में चार्जिंग स्टेशन

शहर चार्जिंग स्टेशन
भोपाल 133
इंदौर 167
जबलपुर 89
ग्वालियर 64
उज्जैन 49

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एनर्जी ऑडिट नहीं होने पर भी सवाल

चार्जिंग स्टेशनों के एनर्जी ऑडिट को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। भोपाल के कोलार निवासी ईवी उपभोक्ता रमेश मेहरा ने बताया कि उन्होंने रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के पास एक स्टेशन पर गाड़ी चार्ज कराई थी। चार्जिंग के दौरान बैटरी 100% दिखा रही थी लेकिन कुछ देर बाद बैटरी लेवल 60% पर आ गया। उनका कहना है कि यदि नियमित ऑडिट हो तो इस तरह की गड़बड़ियों की जांच हो सकती है। 

शिकायत के लिए भी नहीं कोई मंच

ईवी उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए फिलहाल कोई अलग फोरम मौजूद नहीं है। ऐसे में गलत बिलिंग, खराब चार्जिंग या तकनीकी गड़बड़ी होने पर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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फिलहाल कोई एक समान मैकेनिज्म नहीं

मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक शैलेंद्र सक्सेना ने कहा कि टैरिफ का निर्धारण ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी के आधार पर किया जाता है। उन्होंने माना कि पेमेंट के लिए फिलहाल कोई एक समान मैकेनिज्म नहीं बनाया गया है और अन्य शहरों में भी ई-वॉलेट से ही भुगतान हो रहा है।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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