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डिंडौरी:खुले बोरवेल में 5 घंटे जिंदगी से जंग लड़ता रहा 10 साल का शिवम, साइकिल की चेन उतरना बना मासूम की संजीवनी

मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में शनिवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। करंजिया विकासखंड के झनकी गांव में 10 वर्षीय मासूम शिवम खुले बोरवेल में गिर गया और करीब पांच घंटे तक अंदर फंसा रहा।
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खुले बोरवेल में 5 घंटे जिंदगी से जंग लड़ता रहा 10 साल का शिवम, साइकिल की चेन उतरना बना मासूम की संजीवनी

मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में शनिवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। करंजिया विकासखंड के झनकी गांव में 10 वर्षीय मासूम शिवम खुले बोरवेल में गिर गया और करीब पांच घंटे तक अंदर फंसा रहा। अंधेरे, दर्द और डर के बीच बच्चा मदद का इंतजार करता रहा। गनीमत रही कि वहां से गुजर रहे एक बच्चे की साइकिल की चेन उतर गई और उसी दौरान उसकी नजर बोरवेल में फंसे शिवम पर पड़ गई। इसके बाद ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत कर बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

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कुदाल निकालने के दौरान बिगड़ा संतुलन

जानकारी के मुताबिक गांव के सड़क किनारे स्थित पुराने बोरवेल में शिवम की कुदाल गिर गई थी। वह उसे निकालने की कोशिश कर रहा था तभी अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे बोरवेल में जा गिरा। घटना के समय आसपास कोई मौजूद नहीं था इसलिए लंबे समय तक किसी को इसकी जानकारी नहीं लग सकी। करीब पांच घंटे तक शिवम बोरवेल के भीतर फंसा रहा और मदद के लिए आवाज लगाता रहा।

साइकिल की चेन उतरना बना जिंदगी बचाने की वजह

इसी दौरान वहां से साइकिल से गुजर रहे एक अन्य बच्चे की साइकिल की चेन उतर गई। जब वह सड़क किनारे रुककर साइकिल ठीक करने लगा तो उसे बोरवेल के अंदर से आवाज सुनाई दी। उसने झांककर देखा तो शिवम अंदर फंसा हुआ दिखाई दिया। बच्चे ने तुरंत गांव पहुंचकर ग्रामीणों को सूचना दी। खबर मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए।

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ग्रामीणों ने रस्सियों के सहारे निकाला बाहर

गांव के थानसिंह कुंजाम समेत अन्य ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू किया। स्थानीय संसाधनों और रस्सियों की मदद से काफी मशक्कत के बाद शिवम को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हादसे में बच्चे को मामूली चोटें आई हैं लेकिन उसकी जान बच जाने से परिवार और गांव के लोगों ने राहत की सांस ली।

खुले बोरवेल को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी

घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि खुले बोरवेल लगातार हादसों को न्योता दे रहे हैं लेकिन जिम्मेदार विभाग इन्हें लेकर गंभीर नहीं है। हादसे के तुरंत बाद ग्रामीणों ने बोरवेल में मिट्टी और पत्थर डालकर उसे बंद कर दिया।

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पीएचई विभाग ने जांच के दिए निर्देश

पीएचई विभाग के उपयंत्री अंशुल बिसेन ने बताया कि यह बोरवेल नल-जल योजना के तहत करीब तीन साल पहले कराया गया था। पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण वर्ष 2024 में इसे बंद कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि अब यह जांच कराई जाएगी कि बोरवेल को किसने और क्यों दोबारा खोला। मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

मास कम्युनिकेशन में Ph.D और M.Phil पूर्ण की है तथा टीवी और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते ...Read More

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