
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की खबरों पर केंद्र सरकार ने साफ इनकार कर दिया है। 23 अप्रैल को पेट्रोलियम मिनिस्ट्री ने बयान जारी कर कहा कि फ्यूल के दाम बढ़ाने का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है और इस तरह की खबरें भ्रामक हैं।

दरअसल एक दिन पहले कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम ₹25-28 प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं। यह अनुमान कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका के आधार पर लगाया गया था जिसके बाद बाजार में चर्चाएं तेज हो गई थीं।
सरकार ने अपने बयान में कहा कि भारत दुनिया के उन बड़े देशों में शामिल है जहां पिछले चार साल में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की गई है।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की मुख्य वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ा तनाव है। अमेरिका-ईरान के बीच तनाव के चलते इस अहम तेल मार्ग पर असर पड़ा है जिससे सप्लाई कम हुई है और कीमतों में उछाल देखने को मिला है।
मार्च और अप्रैल में भारत का कच्चे तेल का आयात 13-15% तक घटा है लेकिन इसके बावजूद आयात बिल में रोजाना 1800-2000 करोड़ रुपए तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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फिलहाल सरकार ने साफ कर दिया है कि कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर ग्लोबल बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं तो आने वाले समय में दबाव बन सकता है।