गूगल पर अस्पताल का नंबर खोजा:5 रुपये के लालच में बैंक खाते खाली! फर्जी अस्पताल कर्मचारी बन ठगों ने महिला से लूटे 3.96 लाख

इंदौर। बाणगंगा थाना क्षेत्र में साइबर ठगी का मामला सामने आया है। आंखों के इलाज के लिए गूगल पर अस्पताल का नंबर सर्च करना एक महिला को महंगा पड़ गया। सर्च में मिले नंबर पर संपर्क करने के बाद ठग ने खुद को अस्पताल का कर्मचारी बताया और ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक करने के नाम पर महिला को 5 रुपए का टोकन पेमेंट करने के लिए कहा। इसके बाद मोबाइल पर एक लिंक भेजकर बैंक खातों से जुड़ी जानकारी भरवा ली। कुछ दिन बाद ठगों ने महिला के दो बैंक खातों से कुल 3 लाख 96 हजार रुपए निकाल लिए। पीड़िता की शिकायत पर बाणगंगा थाना पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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अपॉइंटमेंट बुक करने की बात:
पुलिस के अनुसार पीड़िता अनिता जैन ने 13 सितंबर को आंखों के इलाज के लिए गूगल पर राजश्री नेत्रालय का नंबर सर्च किया था। सर्च के दौरान मिले नंबर पर उन्होंने संपर्क किया। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को अस्पताल का कर्मचारी बताते हुए अपॉइंटमेंट बुक करने की बात कही। आरोपी ने इसके लिए 5 रुपए का ऑनलाइन टोकन पेमेंट करने को कहा और महिला के मोबाइल पर एक लिंक भेज दिया। लिंक खोलने पर एक फॉर्म सामने आया, जिसमें बैंक खाते से संबंधित जानकारी मांगी गई। महिला ने आरोपी के कहने पर जानकारी भर दी।
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ट्रांजेक्शन पहली बार फेल:
पुलिस के मुताबिक 5 रुपए का ट्रांजेक्शन पहली बार फेल हो गया। इसके बाद आरोपी ने महिला से दूसरे बैंक खाते से भुगतान करने को कहा। महिला ने एसबीआई, आईसीआईसीआई सहित तीन अलग-अलग बैंकों के खातों की जानकारी भी फॉर्म में भर दी। इसके बाद 16 सितंबर को ठगों ने महिला के एक खाते से 80 हजार रुपए और दूसरे खाते से 3 लाख 16 हजार रुपए निकाल लिए। इस तरह कुल 3 लाख 96 हजार रुपए खाते से पार हो गए। आरोपियों ने तीसरे खाते से भी रकम निकालने का प्रयास किया, लेकिन ट्रांजेक्शन सफल नहीं हो सका।
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रकम निकलने के मैसेज मिलने के बाद पता चला:
बैंक खातों से रकम निकलने के मैसेज मिलने के बाद महिला को ठगी का पता चला। उन्होंने तत्काल साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद बाणगंगा पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर फर्जी मोबाइल नंबर, भेजे गए लिंक और जिन बैंक खातों में रकम गई, उनकी जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि फर्जी हेल्पलाइन नंबर के पीछे कौन लोग हैं और ठगी की रकम किस नेटवर्क के जरिए आगे पहुंचाई गई।


















