बीजिंग। सोने की माइनिंग में सिर्फ सोना नहीं, बल्कि भारी मात्रा में ठोस कचरा भी निकलता है। ओपन-पिट माइनिंग में पत्थर, स्लैग और अन्य बचा हुआ मटेरियल बड़ी मात्रा में निकलता है, जिसका सही मैनेजमेंट जरूरी होता है। अब वैज्ञानिकों ने इस कचरे को सड़क बनाने में इस्तेमाल करने का तरीका खोजा है। 2026 में 'सस्टेनेबल केमिस्ट्री एंड फार्मेसी' जर्नल में पब्लिश हुई पीयर-रिव्यूड स्टडी में रिसर्चर्स ने माइनिंग वेस्ट से ही पूरा पेवमेंट मटेरियल तैयार किया है। इस मटेरियल का टेस्ट चीन के लोंगयान में मौजूद Zijinshan गोल्ड-कॉपर माइन में किया गया।
टेस्ट के नतीजे अच्छे आए
28 दिनों तक इस्तेमाल के बाद 15% कंपोजिट सॉलिड वेस्ट वाले रोड सेक्शन में सामान्य ग्रेन्युलर ब्लास्ट-स्लैग बेस की तुलना में 97.19% कम डिफ्लेक्शन यानी दबाव से झुकाव देखा गया। टेस्टिंग के दौरान इन सड़कों पर 100 टन के भारी ट्रक चलाए गए और मौसमी बारिश का असर भी परखा गया।
माइनिंग वेस्ट से सड़क बनाने पर बढ़ा फोकस
खदान के कचरे से सड़क बनाने का आइडिया नया नहीं है। जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल एंड थ्योरेटिकल एनालिसिस में 2025 में छपी रिव्यू स्टडी के मुताबिक, दुनियाभर में हर साल 100 बिलियन टन से ज्यादा माइनिंग वेस्ट निकलता है। यह रिव्यू बताता है कि कैसे टेलिंग्स, स्लैग और माइनिंग के अन्य बाय-प्रोडक्ट्स को पेवमेंट की लेयर में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे न सिर्फ कचरे का निपटारा होगा, बल्कि नए कंस्ट्रक्शन मटेरियल की जरूरत भी कम होगी, जो पर्यावरण के लिए फायदेमंद है।
बड़ी चुनौतियां सामने आईं
हालांकि रिसर्च में 3 बड़ी चुनौतियां भी बताई गई हैं - हर खदान के वेस्ट का कंपोजिशन अलग होना, जहरीले तत्वों के रिसाव (लीचिंग) का खतरा और इसके लिए कोई तय स्टैंडर्ड डिजाइन न होना। 2023 में 'मिनरल्स' जर्नल में छपी एक और रिव्यू स्टडी में पाया गया कि माइन वेस्ट को रोड बेस, सब-बेस, तटबंध और डामर तक में टेस्ट किया जा चुका है। लेकिन हर खदान के मटेरियल के फिजिकल और केमिकल गुण अलग-अलग होने से इसे बड़े पैमाने पर अपनाया नहीं जा सका।
2026 की स्टडी ने यह नया किया
नई 2026 की स्टडी इस रिसर्च को लैब से निकालकर सीधे खदान में ले गई। सिर्फ लैब सैंपल पर निर्भर रहने के बजाय रिसर्चर्स ने ब्लास्टिंग स्लैग और न्यूट्रलाइज्ड ड्रेग से बना कंपोजिट मटेरियल तैयार किया, जिसमें एक्स्ट्रा कंपोजिट सॉलिड वेस्ट भी मिलाया गया। खास बात यह है कि सड़क बनाने वाला यह पूरा मटेरियल 100% माइन वेस्ट से बना था। इससे वैज्ञानिकों को लैब की कंट्रोल्ड लोडिंग के बजाय असली खदान में चलने वाले भारी-भरकम ट्रकों के बीच इसके परफॉर्मेंस को परखने का मौका मिला।
100 टन वजनी ट्रक चलाकर किया टेस्ट
चीन की Zijinshan खदान में वैज्ञानिकों ने कई तरह के पेवमेंट बेस को परखा। वेस्ट डंप एरिया के 670-मीटर और 730-मीटर लेवल पर मौजूद ढलान वाले Haul Roads पर ये टेस्ट सेक्शन बनाए गए थे। इन रास्तों पर रोजाना 100-टन के विशाल डंपर ट्रक चलते थे। 28 दिनों तक लगातार इस्तेमाल के बाद सड़कों के परफॉर्मेंस का मूल्यांकन किया गया। रिजल्ट में FCBN-15 नाम के पेवमेंट ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इसमें 15% कंपोजिट सॉलिड वेस्ट मिलाया गया था और 28 दिन बाद इसमें बहुत ही कम डिफ्लेक्शन यानी झुकाव दर्ज किया गया। यह सामान्य स्लैग बेस के मुकाबले काफी कम है।