इंदौर सहित पूरे मालवा क्षेत्र में गेहूं की सरकारी खरीदी में लगातार हो रही देरी ने किसानों को आक्रोशित कर दिया है। समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू न होने से किसान आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं। नाराज किसानों ने अब आंदोलन का रास्ता अपनाते हुए साफ कहा है कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो 2 अप्रैल से दूध और सब्जियों की आपूर्ति रोक दी जाएगी, जिससे शहरों में बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
किसान नेता मोती सिंह पटेल के मुताबिक मंडियों में गेहूं का भाव 1800 से 2400 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है, जबकि समर्थन मूल्य 2625 रुपये तय है। सरकार ने पहले 16 मार्च, फिर 1 अप्रैल और अब 10 अप्रैल की तारीख तय कर दी है, जिससे किसानों को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। मजबूरी में किसान कम दाम पर अपनी उपज बेच रहे हैं, जिससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है।
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देरी के कारण किसान सहकारी समितियों का कर्ज समय पर नहीं चुका पा रहे हैं। इस वजह से उन्हें 12 प्रतिशत तक अतिरिक्त ब्याज देना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ गया है। वहीं दूसरी ओर बिजली विभाग द्वारा किसानों के सामान की कुर्की की कार्रवाई भी की जा रही है, जिससे किसान खुद को दोहरी मार झेलते हुए महसूस कर रहे हैं।
किसानों ने मांग की है कि गेहूं की खरीदी तुरंत शुरू की जाए और कर्ज चुकाने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 30 मई की जाए। उन्होंने साफ कहा है कि अगर 2 अप्रैल तक हालात नहीं सुधरे तो मंडियों में ताले लगा दिए जाएंगे और इंदौर शहर में दूध और सब्जियों की सप्लाई बंद कर दी जाएगी। बता दें कि रोजाना करीब 20 लाख लीटर दूध और बड़ी मात्रा में सब्जियां शहर पहुंचती हैं, ऐसे में सप्लाई रुकने से बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।