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बंगाल में फेंसिंग लगाने की प्रक्रिया शुरू :लोग बोले- शाम 5 बजे बाद घर से बाहर निकल सकेंगे, राज्य सरकार ने BSF को 27 किमी जमीन दी

भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 4,097 किलोमीटर लंबी सीमा है। इसमें बड़ी हिस्सेदारी पश्चिम बंगाल की है, जिसकी बांग्लादेश के साथ लगभग 2,216 किलोमीटर सीमा लगती है। यह दोनों देशों के बीच सबसे लंबी राज्य सीमा है।
लोग बोले- शाम 5 बजे बाद घर से बाहर निकल सकेंगे, राज्य सरकार ने BSF को 27 किमी जमीन दी
बंगाल में सीमावर्ती इलाकों में फेंसिंग लगाने का काम शुरू किया गया

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के जलंगी इलाके का सकारपाड़ा गांव इन दिनों चर्चा में है। यहां भारत-बांग्लादेश सीमा का एक हिस्सा लंबे समय से बिना बाड़ के था। गांव खत्म होते ही खेत शुरू हो जाते हैं और खेतों के बाद सीधे बांग्लादेश की सीमा लगती है। अब यहां बीएसएफ ने सीमांकन और फेंसिंग का काम शुरू किया है, जिससे स्थानीय लोगों में राहत और उम्मीद दोनों बढ़ी हैं।

फेंसिंग क्यों जरूरी मानी जा रही

भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 4,097 किलोमीटर लंबी सीमा है। इसमें बड़ी हिस्सेदारी पश्चिम बंगाल की है, जिसकी बांग्लादेश के साथ लगभग 2,216 किलोमीटर सीमा लगती है। यह दोनों देशों के बीच सबसे लंबी राज्य सीमा है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक, अधिकांश हिस्से में बाड़ लग चुकी है, लेकिन कुछ इलाकों में काम अभी बाकी है। खुले बॉर्डर वाले क्षेत्रों में घुसपैठ, तस्करी, अवैध आवाजाही और जमीन विवाद जैसी चुनौतियां ज्यादा रहती हैं। ऐसे में सरकार और सुरक्षा एजेंसियां फेंसिंग को जरूरी मानती हैं।

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पहले कैसी थी स्थिति

करीब 4 हजार आबादी वाले इस गांव के ज्यादातर लोग खेती पर निर्भर हैं। लेकिन खेती करना यहां आसान नहीं था। किसानों का आरोप रहा है कि शाम 5 बजे के बाद उन्हें अपने खेतों में जाने की अनुमति नहीं मिलती थी, जबकि सीमा पार से लोग कभी भी खेतों में घुस आते थे। फसल काटने, नुकसान पहुंचाने और विवाद की घटनाएं आम थीं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते कई दशकों में शायद ही कोई महीना ऐसा गया हो, जब सीमा को लेकर तनाव न हुआ हो। रात में खेत छोड़ने के बाद किसानों को सुबह तक फसल सुरक्षित मिलेगी या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं रहती थी।

अब क्या बदल रहा है

अब इलाके में फेंसिंग का काम शुरू हो चुका है। बीएसएफ की निगरानी बढ़ने और बाड़ लगने से किसानों को अपनी जमीन और फसल की सुरक्षा की उम्मीद जगी है। गांव वालों का मानना है कि सीमा स्पष्ट होने से अवैध घुसपैठ, खेतों में अतिक्रमण और विवाद कम होंगे।

स्थानीय लोग इसे सिर्फ सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि आजीविका से जुड़ा मुद्दा मानते हैं। उनका कहना है कि अगर खेत सुरक्षित रहेंगे, तो खेती का भरोसा भी लौटेगा।

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केंद्र ने फेंसिंग एरिया का दायरा 50 किमी किया

राज्य में नई सरकार बनने के बाद BSF को सीमावर्ती इलाकों में जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज हुई है। कई जिलों में फेंसिंग और बॉर्डर आउट पोस्ट विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है।

हालांकि सीमा सुरक्षा को लेकर राजनीति भी होती रही है। 2021 में केंद्र सरकार ने बंगाल में बीएसएफ का अधिकार क्षेत्र 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर किया था। राज्य सरकार ने इसे अपने अधिकारों में दखल बताया था।

लोगों को क्या फायदा होगा

फेंसिंग पूरी होने पर स्थानीय लोगों को सबसे बड़ा फायदा सुरक्षा और खेती की स्थिरता के रूप में मिल सकता है। किसानों को अपनी फसल बचाने में मदद मिलेगी, सीमा विवाद कम हो सकते हैं और निगरानी मजबूत होने से अवैध गतिविधियों पर भी अंकुश लगने की उम्मीद है। आसान भाषा में कहें तो सीमा पर बाड़ सिर्फ तार नहीं, बल्कि सीमावर्ती गांवों के लिए सुरक्षा, भरोसे और बेहतर जीवन की उम्मीद बन रही है।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...

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