इंदौर। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच देशभर में गैस सप्लाई को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि प्रशासन का कहना है कि गैस सिलेंडर की सप्लाई सामान्य है और किसी तरह की कमी नहीं है, लेकिन इसके बावजूद इंदौर में गैस बुकिंग को लेकर एक अलग ही समस्या सामने आ रही है।
दरअसल, कई ग्राहक गैस की संभावित कमी की आशंका के चलते पैनिक बुकिंग कर रहे हैं। इसका असर यह हुआ है कि गैस कंपनियों का बुकिंग सिस्टम अचानक बढ़े दबाव को संभाल नहीं पा रहा है। इसी समस्या को लेकर शहर की गैस एजेंसियों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप करने की मांग की है।
गुरुवार को शहर की तीन प्रमुख गैस कंपनियों एचपी गैस, इंडेन गैस और भारत गैस के डीलर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और कलेक्टर शिवम वर्मा से मुलाकात की। गैस वितरकों ने बताया कि, बुकिंग सिस्टम पूरी तरह कंपनियों के सॉफ्टवेयर पर निर्भर है। पिछले कुछ दिनों में कंपनियों द्वारा सिस्टम में लगातार बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे एजेंसी संचालकों के सामने नई परेशानियां खड़ी हो गई हैं। डीलरों ने कहा कि, इन तकनीकी समस्याओं के कारण ग्राहकों और एजेंसियों के बीच विवाद की स्थिति बन रही है।
गैस वितरकों के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत सिलेंडर बुकिंग के लिए OTP वेरिफिकेशन जरूरी कर दिया गया है। लेकिन कई मामलों में ग्राहकों के मोबाइल पर OTP नहीं पहुंच पा रहा है। इसके कारण ग्राहक बुकिंग नहीं कर पा रहे और गुस्से में एजेंसी कार्यालय पहुंचकर कर्मचारियों से बहस कर रहे हैं। डीलरों का कहना है कि, यह तकनीकी समस्या उनके नियंत्रण में नहीं है, क्योंकि पूरा सिस्टम गैस कंपनियों के सॉफ्टवेयर से संचालित होता है।
हाल ही में गैस कंपनियों ने बुकिंग नियमों में बदलाव करते हुए एक सिलेंडर डिलीवरी के बाद अगले सिलेंडर की बुकिंग के लिए 25 दिन का समय तय किया है। इस बदलाव के बाद कई ग्राहक नाराज हैं। पहले जहां 20 दिन के भीतर बुकिंग संभव थी, वहीं अब पांच दिन का अतिरिक्त इंतजार करना पड़ रहा है।
ग्राहकों को यह डर भी है कि यदि समय पर सिलेंडर नहीं मिला तो रसोई में परेशानी हो सकती है, इसलिए वे जल्द से जल्द बुकिंग करने की कोशिश कर रहे हैं।
गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में बुकिंग का दबाव अचानक बढ़ गया है। इसके कारण कंपनियों के सर्वर और सॉफ्टवेयर कई बार क्रैश हो रहे हैं। जब सिस्टम बंद हो जाता है तो बुकिंग रुक जाती है और एजेंसियों के बाहर लोगों की भीड़ लगने लगती है। इस स्थिति में ग्राहकों का गुस्सा एजेंसी कर्मचारियों पर निकलता है, जबकि असली समस्या तकनीकी है।
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इन सभी समस्याओं को देखते हुए गैस एजेंसी संचालकों ने कलेक्टर शिवम वर्मा से हस्तक्षेप की मांग की है। डीलरों ने कहा कि प्रशासन गैस कंपनियों से बातचीत कर तकनीकी दिक्कतों को जल्द दूर करवाए, ताकि ग्राहकों और एजेंसियों दोनों को राहत मिल सके। कलेक्टर ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला आपूर्ति अधिकारी एम.एल. मारू को गैस एजेंसी संचालकों की समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए हैं।
गैस वितरकों और प्रशासन दोनों का कहना है कि, शहर में गैस सिलेंडर की कोई वास्तविक कमी नहीं है। सप्लाई सामान्य है और सभी एजेंसियों को पर्याप्त मात्रा में सिलेंडर मिल रहे हैं। समस्या केवल बुकिंग सिस्टम और तकनीकी गड़बड़ियों के कारण पैदा हुई है। अधिकारियों का कहना है कि, लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है और अनावश्यक पैनिक बुकिंग से बचना चाहिए।
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विशेषज्ञों का मानना है कि जब लोग किसी संभावित संकट की आशंका में जरूरत से ज्यादा बुकिंग करने लगते हैं, तो सिस्टम पर अचानक दबाव बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में तकनीकी प्लेटफॉर्म और सप्लाई चैन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इंदौर में भी फिलहाल यही स्थिति बन गई है, जहां वास्तविक कमी नहीं होने के बावजूद बुकिंग सिस्टम पर दबाव बढ़ गया है।
गैस एजेंसी संचालकों और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक घबराहट में गैस बुकिंग न करें। यदि किसी के घर में पर्याप्त गैस उपलब्ध है तो जल्दबाजी में बुकिंग करने से बचें, ताकि सिस्टम पर अनावश्यक दबाव कम हो सके और जरूरतमंद ग्राहकों को समय पर सिलेंडर मिल सके।