
राजीव सोनी, भोपाल। देश में GST 2.0 सुधार और अंतरराष्ट्रीय हालातों का असर अब टैक्स कलेक्शन में साफ नजर आने लगा है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के बीच मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। भोपाल जोन के तहत आने वाले इन दोनों राज्यों में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सरकार की तिजोरी में 5520 करोड़ रुपए कम जमा हुए। कुल 43,910 करोड़ रुपए के लक्ष्य के मुकाबले केवल 38,390 करोड़ रुपए का कलेक्शन हो सका। हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर तस्वीर अलग है। सर्विस सेक्टर, बैंकिंग और आईटी इंडस्ट्री में तेजी के चलते देश का कुल इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन फरवरी 2026 तक 20.27 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया जो पिछले साल से करीब 15 हजार करोड़ रुपए ज्यादा है।
दोनों राज्यों में इंडस्ट्रियल ग्रोथ सीमित होने के कारण टैक्स कलेक्शन पर असर पड़ा है। यहां मुख्य रूप से माइनिंग, आयरन, स्टील, कोल और कुछ बड़ी इंडस्ट्रीज जैसे भेल, भिलाई स्टील प्लांट और बीना रिफाइनरी पर ही रेवेन्यू निर्भर है। इसके अलावा गाड़ियों और सीमेंट पर GST दरों में कमी भी कलेक्शन घटने का एक बड़ा कारण बनी है।
सितंबर-अक्टूबर 2025 में GST 2.0 लागू होने के बाद टैक्स स्ट्रक्चर में बदलाव आया। इसके कुछ ही महीनों बाद फरवरी 2026 में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति बन गई जिससे ग्लोबल व्यापार प्रभावित हुआ। आयात-निर्यात पर पड़े इस असर ने सीधे तौर पर टैक्स कलेक्शन को प्रभावित किया है।
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सवाल: मप्र-छग में इस बार रिवेन्यू शार्टेज पर क्या कहेंगे?
जवाब: 'गल्फ वार' और जीएसटी सुधारों के अलावा माइनिंग, आयरन व स्टील में मंदी मुख्य कारण देखे जा रहे है।
सवाल: सर्विस सेक्टर और इंडस्ट्रियल ग्रोथ से रिवेन्यू कलेक्शन के मामले में मप्र-छग की क्या स्थिति है?
जवाब: इस मामले में दोनों राज्य अभी पीछे है। यहां मुख्य स्त्रोत माइनिंग, आयरन, स्टील व कोल सेक्टर हैं इनमें अच्छी संभावनाएं भी हैं।
सवाल: दोनों राज्यों की इंडस्ट्रिल ग्रोथ कैसे इम्प्रूव होगी?
जवाब: देखिए, इंडस्ट्रिल ग्रोथ बढ़ाना हमारे हाथ में नहीं है।
सवाल: इन्वेस्टर्स समिट में तो बड़े-बड़े दावे होते हैं?
जवाब: हम तो रिवेन्यू कलेक्शन के आंकड़ों पर बात कर रहे हैं।
सवाल: तंबाखू प्रॉडक्ट से टैक्स कलेक्शन में तो मप्र बेहतर है?
जवाब: हां,यहां पान मसाला, च्विइंग टोबेको और आईटीसी सिगरेट फैक्टरी भी है। उप्र के बाद मप्र का नंबर है। फिलहाल नए सिस्टम के चलते कुछ मंदी है।
सवाल: फिर रिवेन्यू बढ़ोतरी के लिए क्या उपाय करेंगे?
जवाब: इसके लिए हम टैक्स पेयर्स बेस बढ़ा रहे हैं। नए सेक्टर्स भी ढूंढ रहे हैं।
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मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में इस बार इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन लक्ष्य से काफी पीछे रह गया। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 43,910 करोड़ रुपए का टारगेट तय किया गया था लेकिन कुल कलेक्शन केवल 38,390 करोड़ रुपए ही हो सका। इसका मतलब है कि दोनों राज्यों में मिलाकर 5,520 करोड़ रुपए की सीधी कमी दर्ज हुई है।
टैक्स कलेक्शन में गिरावट सिर्फ मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रही। उत्तरप्रदेश में भी कलेक्शन कम हुआ है। फरवरी 2026 तक राज्य का कुल टैक्स कलेक्शन घटकर 90,585 करोड़ रुपए रह गया जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 1,02,255 करोड़ रुपए से ज्यादा था।
जहां कुछ राज्यों में गिरावट दिखी वहीं देश के बड़े औद्योगिक और सर्विस सेक्टर वाले राज्यों में कलेक्शन मजबूत बना रहा। महाराष्ट्र में कलेक्शन 3.28 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा रहा जो पिछले साल के लगभग बराबर है। कर्नाटक में करीब 1.44 लाख करोड़ रुपए और गुजरात में 1.23 लाख करोड़ रुपए के आसपास कलेक्शन दर्ज हुआ। तमिलनाडु में भी कलेक्शन 1.19 लाख करोड़ रुपए के करीब बना रहा जबकि हरियाणा में 1.09 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का टैक्स जमा हुआ। इन राज्यों में इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर की मजबूती के कारण गिरावट का असर ज्यादा नहीं दिखा।
दिलचस्प बात यह है कि राज्यों में गिरावट के बावजूद देश का कुल इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन बढ़ा है। फरवरी 2026 तक देशभर में 20 लाख 27 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का कलेक्शन हुआ जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह करीब 20 लाख 12 हजार करोड़ रुपए था। यानी कुल मिलाकर करीब 15 हजार करोड़ रुपए की बढ़त दर्ज की गई है।