
FTA के तहत भारतीय निर्यात को न्यूजीलैंड में जीरो टैरिफ एक्सेस मिलेगा। न्यूजीलैंड 5,000 भारतीय प्रोफेशनल्स को हर साल वर्क वीजा देगा। यह समझौता अगले 5 साल में द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखता है। साथ ही आने वाले 15 सालों में 20 अरब डॉलर के निवेश की संभावना जताई गई है।
दिल्ली के भारत मंडपम में इस अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस दौरान पीयूष गोयल और टॉड मैक्ले मौजूद रहेंगे। दोनों देशों ने पहले ही बातचीत पूरी कर ली थी और अब इसे औपचारिक रूप दिया जा रहा है। यह समझौता आर्थिक सहयोग को नई दिशा देगा। इससे दोनों देशों के बीच भरोसा और साझेदारी मजबूत होगी। वहीं व्यापारिक रिश्तों में पारदर्शिता और स्थिरता आएगी।
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इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) के तहत भारत को अपने 100 प्रतिशत निर्यात पर जीरो टैरिफ लगेगा। इससे भारतीय कंपनियों के लिए न्यूजीलैंड का बाजार और खुल जाएगा। वहीं न्यूजीलैंड से भारत आने वाले 95 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क खत्म या कम होगा। इसमें ऊन, लकड़ी, कोयला और फलों जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी। बता दें कि सरकार का लक्ष्य अगले 5 साल में व्यापार को दोगुना कर 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।
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हालांकि इस समझौते में भारत ने अपने किसानों और घरेलू उद्योग का भी ध्यान रखा है। डेयरी उत्पाद जैसे दूध, दही, पनीर और मट्ठा पर कोई शुल्क रियायत नहीं दी गई है। इसके अलावा प्याज, चीनी, मसाले, खाद्य तेल और रबर जैसे उत्पादों को भी संरक्षण दिया गया है। इससे देश के छोटे किसानों और उद्योगों पर असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने संतुलन बनाते हुए यह समझौता तैयार किया है। ताकि व्यापार बढ़े, लेकिन घरेलू हित भी सुरक्षित रहें।
इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा भारतीय प्रोफेशनल्स को मिलेगा। न्यूजीलैंड हर साल 5,000 वीजा का कोटा देगा, जिसकी वैधता तीन साल तक होगी। इससे आईटी, यात्रा और प्रोफेशनल सेवाओं में काम करने वालों को अवसर मिलेगा। दोनों देशों के बीच सेवा क्षेत्र का व्यापार पहले ही तेजी से बढ़ रहा है। 2024 में सेवाओं का व्यापार 1.24 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। इस नए कदम से रोजगार और कौशल विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।