यूट्यूबर निकला हत्याकांड का आरोपी:31 साल तक छुपा रहा सच, अस्पताल में हुआ खुलासा

अस्पताल में इलाज के दौरान लिए गए फिंगरप्रिंट ने एक ऐसा राज खोल दिया जो 31 साल से छिपा हुआ था। खुद को यूट्यूबर और सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाला सलीम वास्तव में 1995 के अपहरण और हत्या मामले का फरार आरोपी निकला, जो सालों तक पहचान बदलकर सामान्य जिंदगी जीता रहा।
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31 साल तक छुपा रहा सच, अस्पताल में हुआ खुलासा

गाजियाबाद के लोनी में रहने वाला और खुद को यूट्यूबर व सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाला सलीम वास्तिक दरअसल 1995 के एक सनसनीखेज अपहरण और हत्या कांड का फरार आरोपी निकला। करीब 31 साल तक पहचान बदलकर सामान्य जिंदगी जीने वाले इस शख्स की असलियत तब सामने आई जब अस्पताल में उसके फिंगरप्रिंट पुराने पुलिस रिकॉर्ड से मैच हो गए। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और दशकों पुराने मामले में एक बड़ा खुलासा हो गया।

कैसे हुआ पूरा मामला

पुलिस के अनुसार साल 1995 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली से 13 साल के संदीप वर्मा का अपहरण किया गया था। आरोपी ने 30 हजार रुपये की फिरौती मांगी थी लेकिन रकम मिलने से पहले ही बच्चे की गला घोंटकर हत्या कर दी गई। वारदात के बाद आरोपी सलीम फरार हो गया और लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।

पहचान बदलकर जी रहा था सामान्य जिंदगी

जांच में सामने आया कि फरारी के दौरान सलीम ने कई शहरों में ठिकाने बदले। कुछ समय वह हरियाणा के करनाल और अंबाला में रहा जहां उसने बेल्ट बनाने का काम किया। इसके बाद 2010 में गाजियाबाद के लोनी में आकर बस गया और सलीम वास्तिक के नाम से नई पहचान बना ली। यहां वह कपड़ों और छोटे सामान का काम करने लगा और धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर सक्रिय होकर खुद को सामाजिक कार्यकर्ता और यूट्यूबर के रूप में पेश करने लगा।

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हमले के बाद खुला 31 साल पुराना राज

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ 27 फरवरी 2026 को आया जब सलीम पर उसके ऑफिस में दो युवकों ने जानलेवा हमला कर दिया। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गया और अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस घटना के बाद पुलिस ने दोनों हमलावरों को मुठभेड़ में मार गिराया। इसी दौरान इलाज के समय सलीम के फिंगरप्रिंट लिए गए जिनका मिलान पुराने रिकॉर्ड से किया गया। यहीं से उसकी असली पहचान सामने आ गई।

ठीक होने का इंतजार कर पुलिस ने किया गिरफ्तार

फिंगरप्रिंट मैच होने के बाद पुलिस ने जल्दबाजी नहीं की और सलीम के स्वस्थ होने का इंतजार किया। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने पुख्ता सबूतों के आधार पर उसे गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी ने 31 साल पुराने केस को फिर से जिंदा कर दिया और यह साबित किया कि तकनीक की मदद से पुराने अपराधियों तक भी पहुंचा जा सकता है।

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मार्शल आर्ट क्लास से हुई थी पहचान

जांच में यह भी सामने आया कि सलीम पहले एक स्कूल में मार्शल आर्ट सिखाता था। वहीं उसकी पहचान बच्चे संदीप से हुई थी और उसी के बाद उसने इस वारदात को अंजाम दिया।

Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

मास कम्युनिकेशन में Ph.D और M.Phil पूर्ण की है तथा टीवी और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते ...Read More

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