फर्जी एडवाइजरी पर छापा-पहले भी कर चुका था ठगी, निवेशक मिलते ही खोल दी फर्जी एडवाइजरी कंपनी

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पहले भी कर चुका था ठगी, निवेशक मिलते ही खोल दी फर्जी एडवाइजरी कंपनी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इंदौर। शेयर बाजार में मुनाफे का झांसा देकर लोगों की गाढ़ी कमाई हड़पने वाला शातिर ठग आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ गया। एमआईजी थाना क्षेत्र में पहले भी एडवाइजरी के नाम पर फर्जीवाड़ा कर चुका यह आरोपी बीते कई दिनों से सिर्फ एक निवेशक की तलाश में घूम रहा था। जैसे ही उसे शिकार मिला, उसने “रुपयों को दोगुना करने” का सपना दिखाकर फर्जी एडवाइजरी कंपनी खड़ी कर दी। खुद को शेयर मार्केट का बड़ा एक्सपर्ट बताकर आरोपी ने निवेशक को मोटे मुनाफे का लालच दिया और पूरी स्कीम समझाकर लाखों रुपये ऐंठने की कोशिश की। हालांकि, उसकी चालाकी ज्यादा दिन नहीं चल सकी। विजय नगर पुलिस को भनक लगते ही जाल बिछाया गया और समय रहते पूरे गिरोह को दबोच लिया गया। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से फर्जी एडवाइजरी का पूरा खेल चौपट हो गया।

    टीआई चंद्रकांत पटेल ने बताया कि फरियादी की शिकायत पर पुलिस ने बुधवार को ग्रेविटी मॉल में संचालित इनविजन इन्फोटेक एडवाइजरी पर छापामार कार्रवाई की। इस दौरान आरोपी कपिल उपाध्याय (बाबजी नगर), विक्की जैन (रामानंद नगर), शंकर दयाल पटेल (श्रीनाथ गोल्ड, सिगापुर टाउनशिप), सुलतान यादव (सैटेलाइट जंक्शन), सुरेंद्र बेडवाल (शीतल नगर), हरनीत सिंह (स्कीम नंबर-78), अतुल भार्गव और अमित माणिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।  पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे ठगी नेटवर्क का मास्टरमाइंड कपिल उपाध्याय है। कपिल के खिलाफ पहले से भी आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज हैं। कुछ साल पहले वह एमआईजी थाने में इसी तरह की फर्जी एडवाइजरी चलाने के मामले में जेल जा चुका है।

    कपिल है मास्टरमाइंड, ठगी का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार

    पुलिस के अनुसार कपिल को निवेशकों को फंसाने का पूरा तरीका पहले से आता था। डेटा कहां से जुटाना है, कॉलिंग कैसे करनी है और किस तरह विश्वास जीतना है,यह सब उसे अच्छी तरह मालूम था। आरोपी एक ऐप के जरिए पहले ग्राहकों से रोजाना थोड़ी-थोड़ी रकम निवेश करवाते थे और उनके खातों में मुनाफा दिखाया जाता था। शुरुआत पूरी तरह डिमैट खाते से की जाती थी, ताकि निवेशक को सब कुछ कानूनी और भरोसेमंद लगे। जैसे ही ठगों को बड़ी रकम इन्वेस्ट करानी होती थी, निवेशकों से पैसे अपने डमी खातों में डलवा लिए जाते थे। इसके बाद रकम हड़प ली जाती थी। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपियों को निवेशकों का डेटा कहां से मिला, कॉलिंग के लिए सिम कार्ड कहां से खरीदे गए और किराये पर लिए गए बैंक खातों के पीछे कौन लोग हैं।फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है और यह भी आशंका जताई जा रही है कि ठगी की यह रकम करोड़ों तक पहुंच सकती है।

     

    Hemant Nagle
    By Hemant Nagle

    हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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