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फ्रांस ने खदान को बनाया यूरोप का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर फार्म, 37,000 लोगों को मिलेगी बिजली

Haute-Marne की 127 हेक्टेयर बजरी खदान पर लगे 135,000 सोलर पैनल, 74.3 MW क्षमता के साथ शुरू हुआ Les Ilots Blandin प्रोजेक्ट। इस इंस्टॉलेशन से हर साल लगभग 37,000 लोगों के लिए बिजली पैदा होने की उम्मीद है। इससे भारी मात्रा में CO2 उत्सर्जन भी बचेगा।
फ्रांस ने खदान को बनाया यूरोप का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर फार्म, 37,000 लोगों को मिलेगी बिजली
Haute-Marne की 127 हेक्टेयर बजरी खदान पर लगे सोलर पैनल्स।

 पेरिस। फ्रांस ने Haute-Marne में बजरी निकालने वाली एक पुरानी खदान की जगह को यूरोप के सबसे बड़े फ्लोटिंग सोलर फार्म में बदल दिया है। यह 127 हेक्टेयर में फैला है और इसमें 135,000 फोटोवोल्टिक मॉड्यूल लगे हैं। Perthes के पास 'Les Ilots Blandin' प्रोजेक्ट ने जून 2025 में काम करना शुरू किया, जिसमें रिन्यूएबल बिजली बनाने के लिए खदान के बेसिन का इस्तेमाल किया गया। 74.3 MW की कुल क्षमता वाले इस इंस्टॉलेशन से हर साल लगभग 37,000 लोगों के लिए बिजली पैदा होने की उम्मीद है। इससे भारी मात्रा में CO2 उत्सर्जन भी बचेगा। Q ENERGY और Grand Est Development International ने इस प्रोजेक्ट के बारे में ये जानकारी दी।

गड्ढों को फ्लोटिंग सोलर फार्म में कैसे बदला

यह प्रोजेक्ट Blandin साइट पर बजरी निकालने के काम से बने 6 बेकार पड़े बेसिन पर बनाया गया था। Grand Est Developpement International के अनुसार 127 हेक्टेयर की यह जगह खदान का काम खत्म होने के बाद खाली पड़ी थी और सोलर इंस्टॉलेशन के लिए जमीन का कोई नया हिस्सा इस्तेमाल करने के बजाय इसी जगह का दोबारा इस्तेमाल किया गया। संस्था इस प्रोजेक्ट को यूरोप का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर पार्क बताती है। Q ENERGY ने 2019 में इस प्रोजेक्ट को डेवलप करना शुरू किया था, जिसका मकसद रिन्यूएबल एनर्जी के लिए बेकार पड़े इंडस्ट्रियल बेसिन का इस्तेमाल करना था। कंपनी ने कहा कि बजरी के पुराने गड्ढे इसके लिए सही थे। उनमें सोलर एनर्जी की अच्छी संभावना थी और जमीन के इस्तेमाल को लेकर कोई खास विवाद भी नहीं था। खदान का काम 2020 में खत्म होना था। इस जगह का एक फायदा यह भी था कि प्रोजेक्ट में उन पानी वाली जगहों का इस्तेमाल किया जा सका जो पहले से ही इंडस्ट्रियल गतिविधियों की वजह से बन गई थीं। खुली जमीन को सोलर पैनल से ढकने के बजाय,  इस इंस्टॉलेशन का ज्यादातर हिस्सा पुरानी खदानों के बेसिन में रखे तैरते हुए स्ट्रक्चर पर बना है।

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क्यों है लेस इलोट्स ब्लैंडिन प्रोजेक्ट इतना बड़ा

इसमें लगे पैनल की संख्या से इसका पैमाना साफ पता चलता है। साइट पर फ्रांस में बने तैरते हुए प्लेटफॉर्म पर 1,35,000 से ज्यादा फोटोवोल्टिक मॉड्यूल लगाए गए हैं। ग्रैंड एस्ट डेवलपमेंट इंटरनेशनल का कहना है कि इस प्रोजेक्ट में लगभग 100 लोग शामिल थे और इसके निर्माण में 15 महीने लगे। सोलर पैनल खुद 45.5 हेक्टेयर जगह घेरते हैं, जबकि पूरा प्रोजेक्ट 127 हेक्टेयर में फैला है। बाल्कन ग्रीन एनर्जी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक प्लांट की 72.3 MW क्षमता तैरते हुए प्लेटफॉर्म पर लगाई गई है। बाकी 2 MW जमीन पर लगे हिस्से से आती है। Q ENERGY का कहना है कि 2 MW वाले सिस्टम को प्रोजेक्ट में इसलिए शामिल किया गया ताकि साइट से कुल ऊर्जा उत्पादन और आर्थिक प्रदर्शन को बेहतर बनाया जा सके। वहीं 6 तैरते हुए प्लेटफॉर्म में से हर एक की क्षमता 8 MW से 17 MW के बीच है।

फ्लोटिंग सोलर फार्म की बिजली उत्पादन क्षमता

प्लांट की कुल क्षमता 74.3 Megawatt-peak (MWp) है। Q ENERGY का कहना है कि यह हर साल इतनी रिन्यूएबल बिजली पैदा कर सकता है जिससे 37,000 लोगों को बिजली मिल सके और इससे सालाना 18,000 टन CO2 उत्सर्जन को रोकने की उम्मीद है। बिजली उत्पादन ने पुरानी इंडस्ट्रियल साइट को एक नई भूमिका दी है। जो जगह कभी बजरी निकालने के काम आती थी, उसका इस्तेमाल अब बिना अतिरिक्त जमीन घेरे बिजली बनाने के लिए किया जा रहा।

उभरती हुई टेक्नोलॉजी

फ्रांस के उत्तरी हिस्सों में फ्लोटिंग सोलर अभी भी एक उभरती हुई टेक्नोलॉजी है। Q ENERGY का कहना है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स उन जगहों पर लगाए जा सकते हैं जहां जमीन के इस्तेमाल को लेकर विवाद कम हों। हालांकि फ्लोटिंग फार्म्स जमीन पर लगने वाले सोलर फार्म की तुलना में महंगे होते हैं। 

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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