Naresh Bhagoria
29 Nov 2025
Mithilesh Yadav
29 Nov 2025
रामचन्द्र पाण्डेय,भोपाल। प्रदेश में स्कूली बच्चों का शैक्षणिक सत्र आधा गुजर जाने के बावजूद 40 हजार बच्चे बिना किताबों के पढ़ाई कर रहे हैं। सरकार की तरफ से दी जाने वाली नि:शुल्क किताबें इन बच्चों को अभी तक नहीं मिली हैं। भोपाल जिले में सभी सुविधाओं का उपयोग करने वाले बीआरसीसी की किताबों के वितरण के मामले में स्थिति खराब है। राज्य शिक्षा केंद्र के 14 अक्टूबर 2025 की स्थिति के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में कुल 57 लाख 75 हजार 623 बच्चों को नामांकन हुआ है। इनमें से 39,295 बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें अभी तक किताबें नहीं मिली है। प्रदेश में कुल 6904 स्कूलों में किताबों का वितरण अभी-भी पेंडिंग है।
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली से 8वीं तक के बच्चों को सरकार नि:शुल्क किताबें उपलब्ध कराती है। इनकी प्रिंटिंग का जिम्मा पाठ्य-पुस्तक निगम के पास है। पाठ्य-पुस्तक निगम से किताबें मिलने के बाद राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा बीआरसीसी के जरिए स्कूलों में किताबें बच्चों को दी जाती हैं। शैक्षणिक सत्र 2024-25 की किताबें पाठ्य-पुस्तक निगम ने अप्रैल के पहले बीआरसीसी के पास पहुंचा दी थीं। भोपाल समेत कई जिलों में आधा सत्र गुजरने के बाद भी 40 हजार बच्चों को किताबें नहीं मिली हैं।
भोपाल में सभी सुविधाओं का उपयोग करने वाले बीआरसीसी ने आधा सत्र बीतने के बाद 98 फीसदी स्कूलों में किताबें पहुंचाई हैं। किताबों के वितरण मामले में भोपाल जिले की 49वीं रैंक है। श्योपुर जिला सबसे पीछे है। पहले नंबर पर उज्जैन जिला है।
स्कूलों में किताबों के वितरण के लिए राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा बीआरसीसी को फंड दिया जाता है। इस फंड का उपयोग कर BRCC स्कूलों में किताबें पहुंचाते हैं, लेकिन भोपाल समेत अधिकांश जिलों की यह स्थिति है कि कुछ BRCC ने स्कूलों में किताबें नहीं पहुंचाई, बल्कि शिक्षकों को BRCC कार्यालय बुलाकर किताबें दी हैं। इससे कई स्कूल छूट गए हैं। भोपाल जिले में भी किताबों के फर्जी बिल बनाकर राशि हड़पने के कई मामले सामने आ चुके हैं।
इस बारे में पाठ्य पुस्तक निगम के एमडी विनय निगम का कहना है कि निगम से सभी पुस्तकें समय से डिपो में भेज दी गई हैं। अब स्कूलों तक पुस्तकें पहुंचाना विभाग की जिम्मेदारी है।
जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार का दावा है कि जिले के सभी स्कूलों में शत-प्रतिशत किताबें पहुंचा दी गई हैं। हमारे पास पुराना स्टॉक भी रहता है, जिसे दोनों मिलाकर स्कूलों को बांटा गया है। अभी भी हमारे पास नई किताबों का स्टॉक मौजूद है।
कटनी जिले के भैंसवाही हायर सेकंडरी सकल के प्राचार्य एके मिश्रा ने बताया कि कुछ विषयों की किताबों को छोड़कर शेष सभी किताबें सत्र की शुरुआत में ही मिल गई थीं। हालांकि अभी भी कक्षा 11वीं इंडियन इकोनॉमिक्स और स्टेटिसटिक्स यह दो किताबें नहीं मिली हैं। लेकिन, एनसीईआरटी कोर्स में एक विषय की कई किताबें होने के कारण पढ़ाई बाधित नहीं हो रही है। विद्यार्थियों का सिलेबस पूरा कराने के लिए अभी भी पुरानी किताबों का भी उपयोग कर रहे हैं।