हरदा के गोंसांई मंदिर में सामूहिक जल तर्पण शुरू, पितृपक्ष में सैकड़ों लोग कर रहे पूर्वजों का स्मरण

हरदा। पितृपक्ष शुरू होते ही शहर के गोंसांई मंदिर में रविवार से सामूहिक जल तर्पण का आयोजन शुरू हो गया। पितरों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं। पंडित विवेक मिश्र के सानिध्य में प्रतिदिन सुबह 8 बजे से 9 बजे तक जल तर्पण और पूजा की जाएगी। इसका समापन सर्वपितृमोक्ष अमावस्या के दिन होगा। सामूहिक तर्पण के दौरान लोग एक साथ अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए उन्हें जल अर्पित करते हैं। आयोजन में परिवारों के साथ समाज के अन्य लोग भी शामिल होकर पितरों के लिए प्रार्थना और अंजलि दे रहे हैं।
पूर्वजों की स्मृति और आत्मिक शांति के लिए तर्पण
पंडित विवेक मिश्र ने बताया कि पितृपक्ष में तर्पण का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। जब लोग एक साथ श्रद्धा और शुद्ध भाव से अपने पितरों का स्मरण करते हैं तो धार्मिक मान्यता के अनुसार वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने कहा कि सामूहिक तर्पण में ऐसे पितरों को भी स्मरण किया जाता है, जिनका कोई वंशज नहीं है या जिन्हें समय के साथ लोग भूल चुके हैं। इस तरह का आयोजन समाज को आपस में जोड़ने के साथ नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और सनातन परंपराओं से परिचित कराने का माध्यम भी बनता है।
रोज सुबह एक घंटे होगा सामूहिक आयोजन
गोंसांई मंदिर में सामूहिक जल तर्पण हर दिन सुबह 8 से 9 बजे तक किया जाएगा। पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालु इस अवधि में पहुंचकर पूजा और तर्पण में शामिल हो सकते हैं। आयोजन में सैकड़ों लोगों की भागीदारी को देखते हुए मंदिर परिसर में आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। पितृपक्ष के अंतिम दिन सर्वपितृमोक्ष अमावस्या पर सामूहिक तर्पण का समापन होगा।
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तर्पण का क्या है धार्मिक महत्व
पंडित मिश्र के अनुसार तर्पण का अर्थ तृप्त करना है। धार्मिक मान्यताओं में माना जाता है कि जल अर्पित कर पितरों का स्मरण करने से उन्हें तृप्ति मिलती है और परिवार के प्रति उनका आशीर्वाद बना रहता है। तर्पण को पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता, सम्मान और स्मरण प्रकट करने का माध्यम भी माना जाता है। पितृपक्ष में अपने पितरों के लिए अंजलि देने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।
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पितृदोष से जुड़ी भी मान्यता
पंडित विवेक मिश्र ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृपक्ष में नियमित तर्पण करने से कुंडली में बताए जाने वाले नकारात्मक प्रभाव और पितृदोष को शांत करने में सहायता मिलती है। श्रद्धालु पूर्वजों की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ तर्पण करते हैं। आयोजन के दौरान धार्मिक विधि-विधान के साथ पितरों का स्मरण और जल अर्पण किया जा रहा है। गोंसांई मंदिर में शुरू हुए इस सामूहिक आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में भी उत्साह नजर आ रहा है।




















