गोपीचंद गहलोत का शनिवार को निधन हो गया। वे गुरुग्राम में रह रहे थे और लंबे समय तक हरियाणा की राजनीति में सक्रिय रहे। उनके निधन की खबर से प्रदेश की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उनके निधन पर दुख जताया।
उन्होंने कहा कि गहलोत का विनम्र स्वभाव और जनसेवा के प्रति उनका समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा। साथ ही उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
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गोपीचंद गहलोत गुरुग्राम क्षेत्र से विधायक रह चुके थे और हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर के पद पर भी उन्होंने जिम्मेदारी निभाई। वे एक समय इनेलो के वरिष्ठ नेता रहे और बाद में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे।
गहलोत का राजनीतिक सफर संघर्ष भरा रहा। 1991 में भाजपा से टिकट न मिलने पर उन्होंने बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ा हालांकि उस समय सफलता नहीं मिली। इसके बाद 1996 में उन्होंने समता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके। आखिरकार वर्ष 2000 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर बड़ा उलटफेर किया और दिग्गज नेता धर्मबीर गाबा को हराया। इसी जीत के बाद वे हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर बने। चौटाला सरकार में मिली अहम जिम्मेदारी 2000 में बनी सरकार के दौरान निर्दलीय विधायकों के समर्थन से ओम प्रकाश चौटाला की सरकार में उन्हें डिप्टी स्पीकर बनाया गया। इसके बाद वे चौटाला परिवार के करीब माने जाने लगे।
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गोपीचंद गहलोत को उनके सरल स्वभाव और जनता के बीच मजबूत पकड़ के लिए जाना जाता था। उन्होंने कई चुनाव लड़े और जनता के मुद्दों को लगातार उठाते रहे। उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और समर्थकों ने शोक व्यक्त किया है।