वंदे मातरम विवाद पहुंचा अदालत:परिवाद हुआ दायर-"इबादत" बताकर गाने से इनकार?

परिवाद हुआ दायर-"इबादत" बताकर गाने से इनकार?
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन में वंदे मातरम को लेकर उपजा विवाद अब सियासी गलियारों से निकलकर अदालत की दहलीज तक पहुंच गया है और मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर परिवादी विकास अवस्थी ने माननीय न्यायालय के समक्ष एक विस्तृत परिवाद पत्र प्रस्तुत करते हुए आरोप लगाया है कि यह केवल एक सामान्य विरोध नहीं, बल्कि राष्ट्रभावना को ठेस पहुंचाने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का गंभीर प्रयास है।

    गीत को गाने से इनकार -

    परिवाद पत्र के अनुसार, 7 अप्रैल और 8 अप्रैल 2026 को इंदौर नगर पालिका निगम में बजट सम्मेलन आयोजित किया गया था। 8 अप्रैल को सत्र के दूसरे दिन जब परंपरा के अनुसार सदन में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम गाया जा रहा था और महापौर परिषद के सदस्य सहित अन्य जनप्रतिनिधि इसमें शामिल थे, उसी दौरान कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख और रुबीना शेख ने कथित रूप से इस गीत को गाने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, दोनों पार्षद बैठक के बीच से ही उठकर बाहर चली गईं, जिसे परिवादी ने न केवल सदन की गरिमा के खिलाफ बताया है बल्कि राष्ट्र के प्रतीकों के प्रति असम्मान की श्रेणी में रखा है।

     

    परिवादी का आरोप

    परिवादी का आरोप है कि यह मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके बाद सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में लगातार ऐसे बयान सामने आए, जिनसे सांप्रदायिक तनाव भड़कने की आशंका पैदा हो गई। अवस्थी का कहना है कि इन बयानों ने समाज में विभाजनकारी माहौल बनाने का काम किया और लोगों की भावनाओं को भड़काने की कोशिश की गई।

    परिवादी ने रुबीना खान से फोन पर की बातचीत- 

    परिवाद में एक और गंभीर दावा किया गया है कि परिवादी ने स्वयं रुबीना खान से फोन पर बातचीत की, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा कि वह केवल अल्लाह की इबादत करती हैं और वंदे मातरम को इबादत की श्रेणी में मानती हैं, इसलिए वह इसे नहीं गा सकतीं। इस कथित बयान को परिवादी ने राष्ट्रगीत के प्रति स्पष्ट अस्वीकार और धार्मिक आधार पर विभाजनकारी सोच का उदाहरण बताया है।

     निजी परिवाद प्रस्तुत

    इन सभी तथ्यों को आधार बनाते हुए परिवादी ने न्यायालय से मांग की है कि इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पार्षदों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। उन्होंने भारतीय दंड संहिता की धारा 153A, 153B, 295A, 505 सहित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत निजी परिवाद प्रस्तुत किया है। परिवादी का कहना है कि इस प्रकार के कृत्य न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि देश की एकता और अखंडता को भी प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए सख्त कानूनी कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है।

    Hemant Nagle
    By Hemant Nagle

    हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...

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